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उत्तराखंड में आपदा की आफत के बाद महामारी की टेंशन

05/09/25
in उत्तराखंड, देहरादून, हेल्थ
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डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में आसमानी आफत बरसी. प्राकृतिक आपदाओं ने भी इस महीने देवभूमि को जमकर घेरा. अगस्त के महीने उत्तराखंड के अलग अलग जिलों में बारिश, लैंडस्लाइड, बाढ़, बादल फटने की घटनाएं सुर्खियों में रही. इन घटनाओं के कारण उत्तराखंड को करीब ₹1 हजार करोड़ का नुकसान हुआ. अगस्त के महीने हुई इन घटनाओं में सबसे ज्यादा सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुये उत्तराखंड में विषम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते हर साल आपदा जैसे हालात बनते रहे हैं. साल 2025 उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा के लिहाज से काफी अधिक भयावह रहा है. राज्य में अगस्त महीने में हुई भारी बारिश के चलते उत्तरकाशी, चमोली, पौड़ी समेत तमाम हिस्सों में आपदा जैसी स्थिति बनी हुई है. साथ ही मैदानी क्षेत्रों में जल भराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है. भारी बारिश के चलते आई प्राकृतिक आपदाओं की वजह से जहां एक ओर जान- माल का काफी नुकसान हुआ है. वहीं, दूसरी ओर आपदाग्रस्त क्षेत्र में महामारी फैलने का खतरा बना हुआ है. आपदाग्रस्त और जलभराव वाले क्षेत्रों में काफी अधिक गंदगी फैलने की वजह से बड़ी बीमारी फैलने की संभावना जताई जा रही है.उत्तराखंड में पिछले महीने अत्यधिक भारी बारिश हुई है. जिसके चलते प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों पर तमाम जगहों पर प्राकृतिक आपदाओं की वजह से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. साथ ही जल भराव के चलते लोगों का जीना मुहाल हो गया है. जल भराव और चारों तरफ मलबा और गंदगी होने की वजह से ही उत्तराखंड सरकार भी इस बात को मान रही है की लोगों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. जलभराव के कारण तमाम तरह के संक्रमण फैलने या महामारी होने की संभावना है. यही वजह है कि उत्तराखंड सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट कर दिया है.दरअसल, मानसून सीजन के दौरान सीजनल बीमारियां होने का खतरा रहता है. यही वजह है कि डॉक्टर्स इस बात पर जोर देते रहे हैं कि खासकर मानसून सीजन के दौरान खाने पीने और साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए. खासकर, हर जगह का पानी ना पीते हुए घर का साफ पानी ही पिएं. मानसून सीजन के दौरान जहां एक और सीजनल बीमारियों का खतरा बना हुआ है तो वहीं दूसरी ओर आपदाग्रस्त और जल भराव वाले क्षेत्रों में बीमारियों के फैलने का खतरा है. यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग इस बात पर जोर दे रहा है कि आपदाग्रस्त और जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखा जाये.उत्तराखंड राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, प्राकृतिक आपदा की वजह से 1 अप्रैल से अभी तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा 114 लोग घायल और अभी भी 95 लोग लापता हैं. प्राकृतिक आपदा की वजह से सिर्फ इंसानों की क्षति नहीं हुई है बल्कि 88 बड़े पशु और 1481 छोटे पशुओं की भी क्षति हुई है. यही नहीं प्राकृतिक आपदा की वजह से 1828 मकानों का कुछ हिस्सा और 71 मकानों का आधे से अधिक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है. यही नहीं, 229 मकान पूरी तरह जमींदोज हो गये हैंआपदा प्रभावित या जल भराव वाले क्षेत्रों में संक्रमण फैलने के सवाल पर सचिवालय चिकित्सालय के ने कहा कि आपदाग्रस्त क्षेत्र में टाइफाइड, कालरा (हैजा), पीलिया समेत और बीमारियां फैलने की संभावना रहती हैं. ऐसे में आपदा ग्रस्त क्षेत्रों या जल भराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानियां बरतने की जरूरत है. ऐसे में लोगों को इस बात पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है कि बाहर की गंदगी उनके घरों के अंदर ना, बच्चे घर के बाहर न जाएं और साफ सुथरी जगह पर रहें. ऐसे क्षेत्रों में संक्रमण फैलने का खतरा काफी अधिक रहता है. इसके अलावा लोगों को हाइजीन का ध्यान रखते हुए हेल्दी खाना और साफ पानी पीने पर विशेष ध्यान देना चाहिए. जिससे वे खुद को संक्रमण से दूर रख सकें.लेकिन सवाल तो यही है की योजनाएं धरातल पर क्यों नहीं उतरती है.। *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*

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