देहरादून। सचिव स्वास्थ्य डा.पंकज कुमार पांडे ने निर्देशित किया है कि कोविड-19 पाजिटिव मरीजों को लेकर जाने वाली एंबुलेंस में हर समय आक्सीजन की व्यवस्था होनी चाहिए।
आज जारी किए गए कार्यालय आदेश में स्वास्थ्य सचिव ने कहा है कि संबंधित अफसर इन आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें। आदेश की प्रति समस्त जिलाधिकारियों, महानिदेशक सिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, राज्य के समस्त मुख्य चिकित्साधिकारियों, समस्त मेडिकल कालेज के प्राचार्यों, चिकित्सा अधीक्षक, निजी मेडिकल कालेजों, महाप्रबंधक 108 एंबुलेंस सेवा, समस्त एंबुलेंस संचालकों को जारी किए हैं।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में अन्य राज्यों की तरह आक्सीजन की मारा मारी मची हुई है। दो दिन पहले के राज्य के स्वास्थ्य सचिव डा.पंकज पांडे के बयान को देखें, जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य में तीन बड़े आक्सीजन बनाने वाली फर्म हैं और बीएचईएल हरिद्वार को भी आक्सीजन निर्माण की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने जो खास बात कही उस पर गौर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में उत्पादित आक्सीजन का सिर्फ 20 प्रतिशत का ही उपयोग होता है। इसका मतलब है कि राज्य के पास उत्पादित आक्सीजन का 80 प्रतिशत सरपलस है। यदि यह बात सच है कि राज्य में आक्सीजन की कमी क्यों महसूस हो रही है? क्या है आक्सीजन वितरण प्रबंधन का संकट है? इसके लिए पहले ही सचिव स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी सौंप दी गई है, इसके बावजूद राज्य में आक्सीजन की किल्लत हो रही है तो यह कृत्रिम ही है? यदि यह बात सच है तो क्या यह राज्य की जनता के प्रति व्यवस्था का बना बनाया घोर अपराध नहीं है? इसके लिए जिम्मेदार कौन है, उस पर कार्यवाही नहीं होनी चाहिए?