रिपोर्ट-सत्यपाल नेगी/रुद्रप्रयाग
कहते है कि मातृ शक्ति में ताकत ही नहीं बल्कि स्नेह का भी बड़ा भण्डार होता है। ऐसा ही समय इस बार जनपद रुद्रप्रयाग की केदारनाथ सीट पर नजर आने लगा है।

जी हॉ केदारनाथ विधानसभा की दो पूर्व महिला विधायक रही आशा नोटियाल व शैलारानी रावत भाजपा की मजबूत महिला नेत्री हैं, आपको पता ही होगा कि बीजेपी को इस बार केदारनाथ सीट पर यह तय करने में लम्बा समय भी लगा था कि किसे टिकट दे। मगर लंबी चर्चा, मंथन के बाद बीजेपी ने शैलारानी रावत को प्रत्याशी घोषित किया, वही चर्चाये भी रही कि आशा नोटियाल नाराज हैं।
जैसे.जैसे चुनाव प्रचार रफ्तार पकड़े लगा वैसे ही आशा नोटियाल ओर शैलारानी रावत फिर से एक साथ गले, मिली, पार्टी को विजयी बनाने का संकल्प लेकर एक साथ चुनावी मंचों पर दिखी, तो कार्यकर्ताओं में अचानक अतिरिक्त ऊर्जा नजर आती दिखने लगी है।
आपको बता दे कि 2017 के चुनाव मे भाजपा ने शैलारानी को टिकट दिया था तो आशा नोटियाल निर्दलीय चुनाव लड़ी थी, जिससे भाजपा केदारनाथ सीट जीतने से रह गई थी।
अब इसबार दोनों महिला पूर्व विधायक अपने गिले शिकवे भुलाकर पार्टी को केदारनाथ सीट से विजयी दिलाने के लिए ही नही एक साथ हुई बल्कि उत्तराखण्ड मे दुबारा से भाजपा सरकार बनाने में भी जुट गई हैं।
केदारनाथ सीट पर भाजपा के दिग्गज नेता पूर्व राज्य मंत्री अशोक खत्री, अजय अजेंद्र, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चन्डी प्रसाद भट्ट, दिनेश बगवाड़ी, रमेश बेंजवाल सहित अन्य सभी जिस प्रकार एक साथ खड़े हो गये हैं, तो ऐसे मे भाजपा की स्थिति अब मजबूत दिखने लगी है। अब ये देखना होगा कि आपसी मतभेद भुलाकर ये सभी नेता कैसे कमल का फूल खिलाकर देते हैएयह सब 10 मार्च को ही पता लगेगा।
इस बात को लेकर एक चर्चा शुरू हो गई कि केदारनाथ सीट पर जिस प्रकार भाजपा के दिग्गज नेताओं व कार्यकर्ताओं में एकता आने से जोश भी दिखाई देने लगा है। अब सब कार्यकर्ताओं की असली परीक्षा का परिणाम वोटिंग व रिजल्ट आने तक देखना बाकी है।











