डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
चारधाम यात्रा के शुरुआती चरण में ही सरकारी महकमों में आपसी तालमेल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यात्रा मार्गो की स्थिति का सवाल हो या फिर यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर बुनियादी सुविधाओं की बात। तकरीबन हर मामले में सरकारी महकमे एक-दूसरे की व्यवस्थाओं व योजनाओं से बेखबर नजर आ रहे हैं। आगामी मानसून सीजन में दैवीय आपदा के बीच चारधाम यात्रियों की सुरक्षा व कुशलता को लेकर भी सरकार की खामोशी ने चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं। हद तो यह है कि यात्रा के दौरान आपदा से कैसे निपटेंगे, सरकार को अब कहीं जाकर इसका एक्शन प्लान बनाने की याद आ रही है।देवभूमि उत्तराखंड के पवित्र चारधामों के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालुओं के जत्थे उमड़ने लगे हैं। तीर्थाटन के लिहाज से प्रदेश के इस सबसे बड़े आयोजन में लचर इंतजामों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। इस बार भी यात्रा व्यवस्थाओं की तस्वीर नहीं बदली। यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से तीर्थयात्रियों को जूझना पड़ रहा है। शुरुआती दिनों में ही पवित्र धामों में पांच श्रद्धालुओं की मौत ने भी सरकारी इंतजामों की पोल खोल दी है।उत्तराखंड में चारधाम यात्रा सिर पर है, लेकिन गंगोत्री और केदारनाथ को जोड़ने वाले सड़क पर अभी तक पुल नहीं बन पाया है. साल 2021 में आई आपदा मांडो-तेखला बाईपास और साड़ा के पास बहे पुलों का निर्माण 5 साल बाद भी नहीं हो पाया है. मांडो में गदेरे के बीच से तो साड़ा में बदहाल पड़े बैली ब्रिज से वाहनों की आवाजाही हो रही है. ये दोनों पुल एक बड़ी आबादी के साथ ही गंगोत्री-केदारनाथ यात्रा समेत वन वे सिस्टम को जोड़ने वाले मार्ग पर अहम भूमिका निभाते हैं. साल 2021 में मांडो समेत कंकराड़ी और साड़ा में विनाशकारी आपदा आई थी. उस दौरान मांडो-तेखला बाईपास का पुल बहने के कारण वहां पर कई दिनों तक आवाजाही बंद रही. साथ ही साड़ा के पास पुल बहने के कारण बाड़ागड्डी के आधे और धौंतरी क्षेत्र का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया था. साड़ा में लोक निर्माण विभाग की ओर करीब 20 मीटर लंबे बैली ब्रिज का निर्माण कर आवाजाही शुरू करवाई गई. साथ ही मांडो में गदेरे के बीच से ही सड़क का निर्माण कर आवाजाही शुरू करवाई गई, लेकिन आपदा के पांच साल बीत जाने के बाद दोनों स्थानों पर पुल का निर्माण नहीं हो पाया है. बारिश के दौरान गदेरे में पानी आने के कारण वहां पर वाहनों की आवाजाही में खतरा बना रहता है. साथ ही मानसून सीजन में कई बार आवाजाही बंद हो जाती है. जबकि, यह मांडो-तेखला बाईपास समेत उत्तरकाशी-लंबगांव मोटर मार्ग यात्रा के दौरान वन वे का काम करता है.इसके अलावा गंगोत्री-केदारनाथ यात्रा के मुख्य आवाजाही के मार्ग भी है. उसके बावजूद भी शासन-प्रशासन इसके निर्माण पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं कर रहा है. इससे चारधाम यात्रा में यात्रियों के साथ स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. सड़क के अभाव में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी उन्हें करीब 10 किलोमीटर पैदल रास्ता तय करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि सड़क की कटिंग पूरी होने के बावजूद पुल न बनने से उनकी समस्या जस की तस है. जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है. सड़क मार्ग से न जुड़ने के कारण न उन्हें कोई सामान पहुंचाने में दोगुनी रकम खर्च करनी पड़ती है. उन्हें घोड़े-खच्चरों से सामान पहुंचाना पड़ा है. जो काफी महंगा पड़ जाता है इसके अलावा गंगोत्री-केदारनाथ यात्रा के मुख्य आवाजाही के मार्ग भी है. उसके बावजूद भी शासन-प्रशासन इसके निर्माण पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं कर रहा है. इससे चारधाम यात्रा में यात्रियों के साथ स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.












