• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

सिट्रोनेला की खेती से भविष्य संवारें

19/04/20
in उत्तराखंड, हेल्थ
Reading Time: 1min read
363
SHARES
454
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखण्ड आदि काल से ही महत्वपूर्ण जड़ी.बूटियों व अन्य उपयोगी वनस्पतियों के भण्डार के रूप में विख्यात है। इस क्षेत्र में पाये जाने वाले पहाड़ों की श्रृंखलायें, जलवायु विविधता एवं सूक्ष्म वातावरणीय परिस्थितियों के कारण प्राचीन काल से ही अति महत्वपूर्ण वनौषधियों की सुसम्पन्न सवंधिनी के रूप में जानी जाती हैं। कुदरत ने उत्तराखंड को कुछ ऐसे अनमोल तोहफे दिए हैं, जिनमें अद्भुत गुणों की भरमार है। भारत में सिट्रोनेला की खेती असोम, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा, केरल तथा मध्य प्रदेश में हो रही है। विश्व में भारत, चीन, श्रीलंका, ताईवान, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया इत्यादि देशों में इसकी खेती व्यवासायिक तौर पर की जा रही है, इस कारण भारत सहित अन्य देशों में इसकी व्यवासायिक स्तर पर खेती में वृद्धि हुई है।
वर्तमान समय में देश के विभिन्न भागों में सिट्रोनेला की व्यापक स्तर पर सफलतापूर्वक खेती की जा रही है। भविष्य में इसके और अधिक प्रसार की संभावनाएं हैं। भारत में लगभग 8500 हे. क्षेत्रफल में इस फसल की बुआई की जाती है। उत्तर पूर्वी क्षेत्रों में देश भर में होने वाली पूरी पैदावार का 80 प्रतिशत उत्पादन होता है। वर्तमान समय में सिट्रोनेल तेल की कीमत लगभग 1000-1200 रूपये तथा बुआई के प्रथम वर्ष में 150-200 कि. ग्रा. तथा दुसरे से पांचवें वर्ष तक 200-300 कि. ग्रा. की पैदावार प्रति हे. होती है। लागत पर खर्च बिल्कुल ही कम होता है। इससे किसान का शुद्ध लाभ लगभग 50-70 प्रतिशत होता है। इस फसल में कीट व बीमारियों का प्रकोप बहुत कम होता है। सिट्रोनेला घास की खेती कर आप अधिक लाभ कमा सकते हैं।
दरअसल यह घास कई प्रकार से उपयोग में लायी जाती है। जहां एक ओर सौंदर्य के लिए क्रीम आदि बनाने में इसका उपयोग होता है तो वहीं दूसरी ओर मच्छर व मक्खियों को दूर भगाने के लिए इस घास की खास उपयोगिता है। यह काफी दिनों तक लगने वाली घास है, जिसके फलस्वरूप किसान एक बार की लागत में कई गुना ज्यादा उत्पादन प्राप्त कर आसानी से अच्छा लाभ कमा सकते हैं। इस घास की एक नई किस्म जोर लैब सी. 5 जावा जो कि असम के उत्तर.पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्दोगिकी संस्थान द्वारा अनुसंधान की गई थी उसे खेती के लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जारी की थी। यह घास अधिक औषधीय गुण रखने के कारण आजकल काफी व्यापक पैमान पर खेती के अन्तर्गत किसानों को अधिक मुनाफा दे रही है। बताते हैं कि यह घास कम उर्वरा शक्ति वाली भूमि पर आसानी से उपजाई जा सकती है। इस घास से निकला हुआ तेल में मौजूद रसायन ही कई प्रकार के उत्पाद बनाने में लाभकारी होते हैं। इसकी खेती भारत में पूर्वोत्तर राज्यों समेत यूपी, पश्चिम बंगाल मध्य प्रदेश के साथ.साथ दक्षिण में तमिलनाडु एवं केरल में बड़े स्तर पर की जाती है। यह बुवाई के तीन महीने बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है। एक कटाई के बाद बहुत जल्द कटाई के लिए तैयार होने के कारण यह साल में तीन से चार फसल देती है। जिससे सिंट्रोनेला व्यावसायिक खेती के लिए काफी लाभकारी है।
इस घास की एक एकड़ खेती से 80 किलोग्राम तक तेल प्राप्त किया जा सकता है जबकि इसकी तेल की कीमत डेढ़ हजार रुपए तक मिलती है। दैनिक जीवन में इस्तेमाल किए जाने वाले साबुन, क्रीम आदि के लिए इस घास के तेल में मौजूद रसायन काफी लाभकारी होते हैं। मच्छर व मक्खी आदि को भगाए जाने के लिए आज कल बनने वाले उत्पादों के निर्माण में यह लाभदायक होती है। सिट्रोनेलए सिट्रोनिलोल, जिरेनियाल, सिट्रोनिलेल एसिटेट, एलिमसिन इत्यादि। इसके तेल में 32 से 45 प्रतिशत स्ट्रोनिलेल, 12 से 18 प्रतिशत जिरेनियालए 11 से 15 प्रतिशत सिट्रोनिलोल, 3.8 प्रतिशत जिरेनियल एसिटेट, 2 से 4 सिट्रोनेलाइल एसिटेट, 2 से 5 प्रतिशत एलमिसीन तथा अन्य रासायनिक घटक पाए जाते हैं। इन रासायनिक घटक पाए जाते हैं। इन रासायनिक घटक कोण का उपयोग साबुन, क्रीम जैसे सौन्दर्य प्रसाधनों के उत्पादन में किया जाता है। औडोमॉस, एंटीसेप्टिक क्रीमों के उत्पादन में भी इनका उपयोगी होता है।
सुगंधित रसायनों जैसे जिरेनियाल तथा हाइड्रोक्सी सिट्रोनेलोल के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सिट्रोनेला की फसल से वर्ष भर में औसतन चार कटाइयों में लगभग 150 से 250 किग्राण् प्रति हे. सुगंधित तेल उत्पादित होता है। इस प्रकार यह फसल प्रथम वर्ष में लगभग 80,000 रूपये प्रति हे. का शुद्ध लाभ देती है, जबकि आगामी वर्षों से लाभ की मात्रा लगभग दोगुनी 160,000 हो जाती है या इससे अधिक भी हो सकती है। डेंगू.मलेरिया मच्छर के काटने से होता है। इन्हें भगाने के लिए लोग केमिकल इस्तेमाल करते हैं। इससे एलर्जी हो सकती है। इसलिए सिट्रोनेला घास से मच्छर भगाए जा सकते हैं। इसकी खुशबू से मच्छर भाग जाते हैं।
सिट्रोनेला के रस का उपयोग इत्र, स्प्रे, साबुन, सौंदर्य उत्पाद व दवा निर्माण में होता है। यह शरीर पर लगाने से मच्छर भागते हैं। साइड इफेक्ट नहीं है। तेल सिट्रोनेला घास की पत्तियों व तने से निकलता है। बुखार, सामान्य संक्रमण व गठियावात में भी उपयोगी है। मोमबत्ती सिट्रोनेला तेल में भिगोकर जलाने से मच्छर नहीं ठहरते। इससे बारिश के दौरान बल्ब जलाने पर आने वाले कीड़े भाग जाते हैं। इसके स्प्रे का उपयोग कर्नाटक, असम, ओडिशा, तमिलनाडु व महाराष्ट्र में एयर फ्रेशनर के रूप में होता है। उत्तराखंड में किसानों की किस्मत चमकाने के लिए सगंध खेती सुगंध देने वाले पौधे पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। इस खेती के उत्साहजनक नतीजों और इसकी अपार संभावनाओं के मद्देनजर अब अगले पांच साल का खाका खींचा है। इसके तहत हर साल सगंध खेती का दायरा पांच हजार हेक्टेयर बढ़ाकर प्रतिवर्ष 10 हजार किसानों को इससे जोड़ने का लक्ष्य है।
पांच वर्षों में मुहिम से 50 हजार किसानों को जोड़ा जाएगाए ताकि वे भी आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। वर्तमान में प्रदेश में साढ़े आठ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 18120 किसान सगंध फसलों की खेती कर रहे हैं और उनका सालाना टर्नओवर लगभग 70 करोड़ का है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड के गांवों से हो रहे पलायन ने खेती.किसानी को गहरे तक प्रभावित किया है। अविभाजित उत्तर प्रदेश में यहां आठ लाख हेक्टेयर में खेती होती थी, जबकि 2.66 लाख हेक्टेयर जमीन बंजर थी। राज्य गठन के बाद अब खेती का रकबा घटकर सात लाख हेक्टेयर पर आ गया है, जबकि बंजर भूमि का क्षेत्रफल बढ़कर 3.66 लाख हेक्टेयर हो गया है। अगले पांच वर्षों में राज्य में 50 हजार लोगों को सगंध खेती से जोड़ा जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, मनरेगा, हॉर्टिकल्चर मिशन के साथ ही राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत सगंध खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा एरोमा पार्क भी विभिन्न स्थानों पर तैयार होंगे, जहां किसान संगध खेती से मिलने वाले सगंध तेल समेत उत्पादों की बिक्री कर सकेंगे। यही नहीं, एरोमा पार्क में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के दरवाजे भी खुलेंगे। मौजूदा दौर में बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए पारिस्थितिकी और आर्थिकी के मध्य संतुलन बेहद जरूरी है। फिर असल विकास भी वही है, जिसमें प्रकृति के साथ कोई छेड़छाड़ न हो। उत्तराखंड में इस चुनौती से पार पाने का आसान जरिया ढूंढा गया है और इसके अपेक्षित नतीजे भी सामने आए हैं। यह है सगंध ;एरोमा खेती यानी गंधयुक्त औषधीय पौधों की खेती। सगंध खेती से जहां बंजर हो चुकी 7600 हेक्टेयर कृषि भूमि में हरियाली लौटी है, वहीं 20 हजार किसानों की आर्थिकी भी संवर रही है। अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि राज्य में सगंध खेती का सालाना व्यवसाय 70 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। यही नहीं, जिन क्षेत्रों में यह खेती हो रही है, वहां जलस्रोत रीचार्ज होने के साथ ही वातावरण भी शुद्ध हुआ है। इस तरह पारिस्थितिकी और आर्थिकी के लिहाज से मॉडल धीरे.धीरे अपनी जगह बना रहा है। उत्तराखंड सरकार भी इसे प्रोत्साहन दे रही है।

Share145SendTweet91
Previous Post

दूसरे राज्यों से उत्तराखंड के छात्रों को लाने की तैयारी

Next Post

सांसद बलूनी की पहल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद

Related Posts

उत्तराखंड

स्वयं सहायता समूहों से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर : ब्लॉक प्रमुख

January 17, 2026
32
उत्तराखंड

“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम के तहत गुप्तकाशी में लगा बहुउद्देशीय शिविर

January 17, 2026
7
उत्तराखंड

राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में अध्यापकों को भारी भरकम टोटा है

January 17, 2026
5
उत्तराखंड

स्टार्टअप इंडिया रैंकिंग में उत्तराखण्ड को मिला ‘लीडर’ दर्जा

January 17, 2026
7
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री धामी का शेफ समुदाय से संवाद, उत्तराखंड के स्वाद को “लोकल से ग्लोबल” बनाने का आह्वान

January 17, 2026
5
उत्तराखंड

गंगा में खूब फल-फूल रहे हैं घड़ियाल

January 17, 2026
5

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67583 shares
    Share 27033 Tweet 16896
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45769 shares
    Share 18308 Tweet 11442
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38040 shares
    Share 15216 Tweet 9510
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37430 shares
    Share 14972 Tweet 9358
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37312 shares
    Share 14925 Tweet 9328

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

स्वयं सहायता समूहों से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर : ब्लॉक प्रमुख

January 17, 2026

“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम के तहत गुप्तकाशी में लगा बहुउद्देशीय शिविर

January 17, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.