डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2025 की तैयारियां जोरों पर हैं। यमुनोत्री हाईवे पर लंबे समय से परेशानी का कारण बन रहे भूस्खलन जोन का ट्रीटमेंट कार्य अब अंतिम चरण में है। कार्यदायी संस्था का दावा है कि यह कार्य 15 अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा, जिससे चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इस ट्रीटमेंट से न केवल यमुनोत्री हाईवे बल्कि गंगोत्री हाईवे पर भी सुगम यातायात सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे यात्रियों को बार-बार सड़क बंद होने की समस्या से छुटकारा मिलेगा।पिछले दो वर्षों से यह भूस्खलन जोन यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए एक गंभीर समस्या बना हुआ था। बारिश के मौसम में भारी मलबा और बोल्डर गिरने के कारण सड़क कई दिनों तक बंद रहती थी, जिससे चारधाम यात्रा बाधित होती थी और स्थानीय लोगों को भी आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। शासन के निर्देश पर टीएचडीसी ने इस समस्या के समाधान के लिए डीपीआर तैयार की थी, जिसके बाद एनएच विभाग ने करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से ट्रीटमेंट कार्य शुरू किया।अब कार्यदायी संस्था ने चारधाम यात्रा को ध्यान में रखते हुए इस कार्य को 15 अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। साइड इंचार्ज के अनुसार, मुख्य भूस्खलन जोन का ट्रीटमेंट रॉक बॉल्ट और जालियों के माध्यम से किया जा रहा है। यह कार्य पूरा होने के बाद यमुनोत्री और गंगोत्री हाईवे पर आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुगम हो जाएगा, जिससे यात्रियों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। चारधाम मार्ग में भूस्खलन चुनौती बना हुआ है। केवल एनएच के अधीन चारधाम मार्ग पर 42 स्थान ऐसे हैं जहां पर भूस्खलन की समस्या है। इनके उपचार के लिए एनएच जुटा है पर सभी जगह पर अगले साल तक काम पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। चारधाम मार्ग का चौड़ीकरण किया गया है। मार्ग के चौड़ा होने के साथ यात्रा सुगम हुई है, इसके साथ ही समय भी कम लग रहा है पर मार्ग पर भूस्खलन की चुनौती बनी है। एनएच के मुख्य अभियंता कहते हैं कि चारधाम मार्ग के अंतर्गत एनएच के पास सड़क है, उसमें 42 स्थान चिह्नित हैं। इसी तरह बीआरओ के अधीन सड़क में करीब 25 जगहों पर समस्या होने की बात है। 42 में 39 जगहों पर काम किया जा रहा है, तीन जगह का जल्द ही प्रस्ताव तैयार कर लिया जाएगा। इन सभी कामों को अगले साल जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन पर करीब डेढ़ हजार करोड़ व्यय होगा। उत्तराखंड राज्य में बार-बार होने वाले भूस्खलन और जाम को राज्य की आर्थिकी और लोगों की सुरक्षा के लिए बेहद चिंताजनक बताया है।राज्य सरकार का यह प्रयास है कि चारधाम यात्रा 2025 को श्रद्धालुओं के लिए न केवल आध्यात्मिक बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी सुरक्षित और सुकूनदायक बनाया जाए। **लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं।लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं|*