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किताब कौतिक अभियान के तहत 14वां पुस्तक मेला पिथौरागढ़ जिले के ऐतिहासिक शहर डीडीहाट में संपन्न

17/06/25
in उत्तराखंड, पिथौरागढ़, साहित्य
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https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

रिपोर्ट – डीडीहाट किताब कौतिक (6,7 और 8 जून 2025)
किताब कौतिक अभियान के तहत 14वां पुस्तक मेला पिथौरागढ़ जिले के ऐतिहासिक शहर डीडीहाट में संपन्न हुआ। इस आयोजन को सफल बनाने में डीडीहाट नगरपालिका, यूथ सोसायटी डीडीहाट, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान पिथौरागढ़ (डीडीहाट) और रामलीला समिति के साथ स्थानीय जनता का अमूल्य सहयोग मिला। टीम क्रिएटिव उत्तराखंड द्वारा दूरस्थ इलाकों में रचनाशीलता को बढ़ावा देने और नए पर्यटन स्थलों को मुख्यधारा में लाने के अपने उद्देश्यों से किया जा रहा यह आयोजन इस बार “पहाड़ में स्वरोजगार” थीम पर केंद्रित किया गया था। साहसिक खेल, पर्यटन, बागवानी, पर्यावरण, रंगमंच, फिल्म, हस्तशिल्प, तकनीक और विज्ञान, लोक संस्कृति जैसी बहुआयामी गतिविधियों के संचालन के साथ यह मेला ऐतिहासिक रूप से सफल रहा।
# 1 से 5 जून तक जीआइसी डीडीहाट में कक्षा 6,7,8 के बच्चों के लिए बाललेखन कार्यशाला हुई। बालप्रहरी पत्रिका के सम्पादक उदय किरौला जी द्वारा संचालित इस कार्यशाला में डीडीहाट के 12 स्कूलों के 100 से अधिक बच्चे शामिल हुए। इन सभी बच्चों ने 100 हस्तलिखित पुस्तकें, नुक्कड़ नाटक, समूह गीत तैयार किए। अपनी रचनात्मकता को बच्चों ने किताब कौतिक के दौरान स्टाल लगाकर प्रस्तुत किया।
# विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों द्वारा डीडीहाट के स्कूलों में करियर काउंसलिंग सत्र किए गए। ललित सिंह पोखरिया जी ने अभिनय और रंगमंच, मेनका गुंज्याल जी ने साहसिक खेल, डॉ. राजेश्वरी कापड़ी जी ने एनसीसी और शिक्षा से जुड़े अनुभव, शांतनु शुक्ला जी ने विविध रोजगार संभावना, अतुल किशोर जी ने विधिक क्षेत्र, उदय किरौला जी ने साहित्य, लखपत सिंह रावत जी ने वन्यजीवों के विषय में जानकारी दी। DIET, जीआइसी, जीजीआइसी, ग्लोरियल, विद्यासागर, शिखर, अभिलाषा और विवेकानंद सहित अन्य शिक्षण संस्थानों में यह जानकारीपरक सत्र आयोजित हुए।
# 6 जून (शुक्रवार) को बाजार के मध्य स्थित रामलीला मैदान में डीडीहाट किताब कौतिक का शुभारंभ पद्मश्री सम्मान से अलंकृत लोकगायिका श्रीमती बसंती बिष्ट, नगरपालिका अध्यक्ष गिरीश चुफाल, डी, एस. पांगती जी, देव सिंह पोखरिया जी, ललित पोखरिया जी सहित अन्य गणमान्य लोगों की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन और भगवद-स्तुति के साथ हुआ। हजारों किताबों, हस्तशिल्प, अत्याधुनिक तकनीक – विज्ञान और स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी के लिए शहर के सभी विद्यालयों के बच्चों और आम जनता में इस आयोजन को लेकर भारी उत्साह देखा गया।
बेड़ीनाग के पर्यटन व्यवसायी तरुण माहरा द्वारा आयोजन स्थल के निकट ही एक चार मंजिला भवन में निशुल्क रैपलिंग करवाई गई। 2 दर्जन से अधिक युवाओं ने पहली बार इस साहसिक गतिविधि का रोमांचकारी अनुभव प्राप्त किया। मशहूर पैराग्लाइडर शंकर सिंह के निर्देशन में मनीष मखोलिया ने गंगोलीहाट से उड़ान भरकर डीडीहाट शहर के ऊपर पैराग्लाइडिंग का प्रदर्शन किया। प्रसिद्ध रंगकर्मी ललित सिंह पोखरिया जी (लखनऊ) ने “अभिनय एवं रंगमंच में करियर” विषय पर अपनी बात रखी। जीजीआईसी और अभिलाषा अकैडमी के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। सायंकालीन सत्र में पद्मश्री बसंती बिष्ट जी ने “उत्तराखंड के लोकगीतों में श्रीकृष्ण” विषय पर अपनी टीम के साथ प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति में व्याख्यान के साथ साथ लोकनृत्य और स्थानीय भाषा के गीतों का मनमोहक समावेश था। बसंती बिष्ट जी की यह प्रस्तुति संगीत नाटक अकादमी, संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार) के सहयोग से हुई। मंच संचालन संजू पंत जी ने किया।
# दूसरे दिन 7 जून की शुरुआत जीआईसी मैदान में साहसिक खेल गतिविधियों से हुई। तरुण माहरा जी ने लगभग 20 लोगों को निशुल्क रॉक क्लाइम्बिंग और रैपलिंग करवाई। मुख्य आयोजन स्थल रामलीला मैदान में समय साक्ष्य प्रकाशन, मुनस्यारी हाउस, शृंखला, शिवालिक साइंस फाउंडेशन, ऐपण टेक्नोलॉजी, लाटी आर्ट्स, पहरु कुमाउनी पत्रिका, आदलि कुशलि पत्रिका, फाग रंग मंच की सांस्कृतिक कठपुतलियों और बाललेखन कार्यशाला के बच्चों द्वारा लगाए गए स्टॉल पर लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। प्रसिद्ध शिकारी लखपत सिंह रावत जी (गैरसैण) ने शिकारी जीवन के रोमांचकारी अनुभवों के साथ आदमखोर जानवरों से बचाव पर बहुत महत्वपूर्ण जानकारियां दी। पलायन जैसे ज्वलंत मुद्दे पर स्थानीय स्तर पर बनने के बाद अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ख्याति प्राप्त कर चुकी फिल्म Pyre (पायर) के मुख्य कलाकार हीरा देवी जी, पदम सिंह जी और सुधीर राठौर जी ने अपने जीवन संघर्ष और फिल्म से जुडी यादों को उपस्थित जनता से साझा किया।
बागेश्वर से आए समर्पित पर्यावरणविद किशन सिंह मलड़ा जी ने अपनी वार्ता में “देवकी लघु वाटिका” के माध्यम से किए जा रहे कार्यों के बारे में बताया। उत्तराखंड बोर्ड 2024 की टॉपर प्रियांशी रावत और NCC घुड़सवारी की राष्ट्रीय चैम्पियन स्वर्णिका राठौर ने उपस्थित छात्र – छात्राओं से बातचीत में उन्हें प्रोत्साहित किया। लोककला के शोधार्थी सत्यम जोशी ने “लोकगीत और स्थानीय भाषा” विषय पर सारगर्भित वार्ता की। प्रकाश चंद्र पांडे जी ने संयोजन में एक दर्जन से अधिक कवियों ने बहुभाषीय कवि सम्मेलन में अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। कवि सम्मेलन का संचालन नवीन पंत जी (चम्पावत) ने किया।
# किताब कौतिक के तीसरे और अंतिम दिन की शुरुआत प्रकृति के बीच Nature Walk – Bird Watching के साथ हुई। इस भ्रमण के दौरान रामनगर के वरिष्ठ वन्यजीव विशेषज्ञ राजेश भट्ट जी और काफल हिल्स के संस्थापक तरुण माहरा (बेड़ीनाग) ने बाहर से आए अतिथियों और स्थानीय लोगों को इलाके की प्राकृतिक संपदा और जैव-विविधता के बारे में बताया। लोगों ने पैदल यात्रा के दौरान मिलने वाले औषधीय पौधों और जंगली फलों की जानकारी भी प्राप्त की। इस नेचर वॉक में पक्षियों की 33 प्रजातियों को चिह्नित किया गया। Nature Walk में शामिल लोगों को सुरेंद्र बिष्ट जी (गंगोलीहाट) ने मधुमक्खियों के बारे में और पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डॉ. ललित उप्रेती जी ने अंगदान जागरूकता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। यह यादगार सामूहिक पैदल यात्रा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. धनी लाल शाह के आवास पर चाय और माधुरी बड़थ्वाल जी, पुष्पा फर्त्याल जी और शिवांशु मेहता के गीतों की प्रस्तुति के साथ संपन्न हुई।
# मुख्य आयोजन स्थल पर रविवार के कारण लोगों की अच्छी उपस्थिति रही। ग्लोरियल पब्लिक स्कूल के बच्चों ने शिक्षाविद डॉ. अशोक कुमार पंत की उपस्थिति में सांस्कृतिक कार्यक्रमों से तीसरे दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत की। दीक्षा जोशी जी द्वारा संचालित Puppet Making कार्यशाला में बच्चों ने पुराने कागज और गत्ते से क्रियाशील कठपुतलियां बनाई। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से ‘अंगदान से रक्तदान जागरूकता अभियान’ के अंतर्गत ब्लड बैंक, पिथौरागढ़ द्वारा “रक्तदान शिविर” भी आयोजित किया गया। अभिनव पांगती और उनकी धर्मपत्नी ने अंगदान से जुड़े अपने अनुभवों को जनता से साझा किया। प्रसिद्ध हस्तशिल्प कलाकार जया वर्मा के संयोजन में पेंटिंग और ऐपण प्रतियोगिताएं सफलतापूर्वक सम्पादित हुई। अज़ीम प्रेमजी फॉउंडेशन के सभागार में “सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता” नवाचारी शिक्षक धीरज खड़ायत द्वारा करवाई गई।
# उभरते हुए बाल कलाकार शिवांशु मेहता ने अपने गीतों की प्रस्तुति से लोगों को प्रभावित किया। राज नारायण धामी जी ने युवा लेखक और शिक्षक नवीन पोखरिया से उनके लेखन और नए उपन्यास पर वार्ता की। “एकीकृत कृषि एवं पशुपालन से पहाड़ में स्वरोजगार” विषय पर “धिनाली डेयरी फार्म” के संचालक उमेश चंद्र भट्ट (बिन्दुखत्ता) ने अपने विचार प्रस्तुत किए। सायंकालीन सत्र में दीप्ति भट्ट जी (पिथौरागढ़) ने पद्मश्री से सम्मानित लोकगायिका माधुरी बड़थ्वाल जी से “हमारे लोकगीतों को बचाना क्यों जरुरी है?” विषय पर सार्थक चर्चा की। इस वार्ता के दौरान माधुरी जी ने उत्तराखंड के लोकगीतों की प्रस्तुति के साथ इन गीतों के व्यापक विस्तार और महत्व पर श्रोताओं को बताया।
# समापन सत्र में शिक्षाविद दुष्यंत सिंह पांगती जी ने कहा कि डीडीहाट किताब कौतिक ने शहर में रचनात्मकता की लहर पैदा कर दी है। कार्यक्रम के स्थानीय संयोजक संजू पंत जी ने बताया कि यह आयोजन अपने उद्देश्यों में पूर्णतः सफल रहा। क्रिएटिव उत्तराखंड संस्था के अध्यक्ष दयाल पांडे जी ने सभी अतिथियों, सहयोगियों और डीडीहाट की जनता का आभार व्यक्त किया।

DIET प्रशिक्षुओं की मदद से डीडीहाट तहसील के स्कूली छात्र – छात्राओं के रचनात्मक लेखन को E -Book “न्यौलि कलम – डीडीहाट” में संकलित किया गया। इस चौदहवें आयोजन के सफलतापूर्वक संपन्न होने के साथ ही किताब कौतिक के अगले पड़ाव की तैयारियां शुरू हो गई है।

हेम पंत
संयोजक – किताब कौतिक अभियान
मो. 9368846300

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