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इस गांव में जंगली फल के चटपटेपन ने रोका पलायन

07/04/20
in उत्तराखंड, संस्कृति
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https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखण्ड आदि काल से ही महत्वपूर्ण जड़ी.बूटियों व अन्य उपयोगी वनस्पतियों के भण्डार के रूप में विख्यात है। इस क्षेत्र में पाये जाने वाले पहाड़ों की श्रृंखलायें, जलवायु विविधता एवं सूक्ष्म वातावरणीय परिस्थितियों के कारण प्राचीन काल से ही अति महत्वपूर्ण वनौषधियों की सुसम्पन्न सवंधिनी के रूप में जानी जाती हैं। पहाड़ की सबसे बड़ी पीड़ा है पलायन। रोजगार की तलाश में निकले लोगों ने एक बार गांव छोड़ा तो लौटकर नहीं आए। नतीजा, उत्तराखंड के तीन लाख घरों में ताले लग गए। पौड़ी जिले के द्वारीखाल ब्लाक के ग्वीन छोटा गांव भी इन्हीं में से एक था, लेकिन आज हालात बदल रहे हैं। महिलाओं ने घर पर अचार और चटनी बनाकर छोटा सा कारोबार शुरू किया तो इसकी महक हरिद्वार और देहरादून तक फैल गई।
घर बैठे हर माह ढाई से तीन हजार रुपये कमाने वाले ग्वीन गांव की ममता देवी बताती हैं कि सिर्फ तीन साल पहले तक गांव की आबादी करीब 250 थी, लेकिन आज आधे से ज्यादा लोग पलायन कर चुके हैं। ममता कहती हैं पहले हम घास.पात और चूल्हे.चौके में ही दिन बिता देते थे, मगर अब ऐसा नहीं है। वह बताती हैं कि हमारे द्वारा तैयार गींठी, तिमला, आम, कटहल, पहाड़ी मिर्च, पहाड़ी आंवला, कंडाली और बसिंगा का अचार व चटनी के दीवाने सिर्फ कोटद्वार ही नहीं, देहरादून और हरिद्वार तक हैं।
दरअसल गांव को इस मुकाम तक खड़ा करने का श्रेय जाता है स्वयं सेवी संस्था हिमगढ़ केसरी के संस्थापक मनोज सिंह को। मनोज बताते हैं कि इसी गांव के कमल उनियाल उनके मित्र हैं। एक दिन बातों.बातों में उन्होंने अपनी पीड़ा बयां की। फिर क्या थाए मनोज ने कमल के सहयोग से हालात बदलने की ठान ली। वर्ष 2016 में दोनों ने मिलकर गांव में महिलाओं को अचार, चटनी व जूस बनाने का प्रशिक्षण दिया। तय किया गया कि अचार व चटनी पहाड़ी फल से ही बनाए जाएंगे। इसके लिए एक छोटी सी फैक्ट्री शुरू की गई। संतोषी और मीरा देवी बताती हैं कि शुरू में पांच.छह महिलाएं ही मुहिम से जुड़ीं, लेकिन धीरे.धीरे यह संख्या बढऩे लगी। आज 25 महिलाएं अचार व चटनी से अपने परिवार को आर्थिक संबल दे रही हैं। महिलाएं गींठी, तिमला, पहाड़ी आम, कटहल, पहाड़ी मिर्च, आंवला आदि को एकत्र फैक्ट्री तक लाती हैं।
तैयार उत्पाद खच्चरों के जरिए द्वारीखाल बाजार स्थित गोदाम में लाया जाता है। यहां से तैयार उत्पाद कोटद्वार, ऋषिकेश, सतपुली, हरिद्वार व देहरादून के बाजार में भेजा जाता है। मनोज बताते हैं कि फैक्ट्री में प्रतिदिन एक क्विंटल माल तैयार हो रहा है। आम तौर पर कभी जब कोई प्राकृतिक संकट आता है तो वो कुछ देशों या राज्यों तक ही सीमित रहता है। लेकिन इस बार ये संकट ऐसा है, जिसने विश्व भर में पूरी मानवजाति को संकट में डाल दिया है। जिससे देश की आर्थिक समृद्धि बढ़ेगी एवं लोगो का स्वास्थ्य लाभ होगा और देश मे सुख.शांति बढ़ेगी। पूरा विश्व इस समय संकट के बहुत बड़े गंभीर दौर से गुजर रहा है। आम तौर पर कभी जब कोई प्राकृतिक संकट आता है तो वो कुछ देशों या राज्यों तक ही सीमित रहता है। लेकिन इस बार ये संकट ऐसा है, जिसने विश्व भर में पूरी मानवजाति को संकट में डाल दिया है।
राज्य सरकार ने पिछले दिनों पलायन आयोग गठित किया था। इस आयोग ने 13 जिलों की 7950 ग्राम पंचायतों में सर्वे कराया था। इसके बाद पलायन पर रिपोर्ट तैयार हुई। रिपोर्ट के अनुसार 50 प्रतिशत लोगों ने रोजगार, 15 प्रतिशत ने शिक्षा के लिए और 8 प्रतिशत ने चिकित्सा के लिए पलायन किया है। राज्य के 734 गाँव पूरी तरह खाली हो चुके हैं। पलायन करने वालों में 70 प्रतिशत लोग गाँवों से गए तो वहीं 29 प्रतिशत ने शहरों से पलायन किया है।

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