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उत्तराखंड के किसानों ने अपनाया किवी, न्यूजीलैंड, इटली को पीछे छोड़ा

02/01/20
in उत्तराखंड, हेल्थ
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https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
कीवी का उत्पति स्थल चीन है, हालांकि कीवी को चीन के अलावा न्यूजीलैंड, इटली, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, पाकिस्तान, ईरान, नेपाल, चिली, स्पेन और भारत में भी उगाया जा रहा है। भारत में इसकी खेती हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मेघालय, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में उगाया जा रहा है। इसकी खेती मैदानी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, केरल में भी की जाने लगी है। इस फल को 1000 मीटर से 2500 मीटर की समुर्द तल से ऊँचाई पर उगाया जाता है। कीवी फल देखने में हल्का भूरा, रोएदार व आयताकार, रूप में चीकू फल की तरह का होता है। इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
एक समय में विश्व भर में न्यूजीलैंड और इटली किवी के लिए मशहूर होते थे। आजकल इन दोनों देशों की किवी को पछाडक़र हिमाचली किवी ने देश भर में अपनी विशेष पहचान बना ली है। कुछ वर्ष पहले तक न्यूजीलैड व इटली का फल कहे जाने वाले के किवी के पौधे को हिमाचल प्रदेश की जलवायु रास आ गई है। जिसके चलते प्रदेश में दिन प्रतिदिन किवी के बगीचे किसान.बागावन लगा रहे है। भारत में हिमाचल के अतिरिक्त किवी का उत्पादन जमू.काशमीर, उत्तराखंड, उतर प्रदेश के पहाडी क्षेत्रों, सिक्किम, मेद्यालय, अरूणाचल प्रदेश, कर्नाटक व केरल में भी होता है। हिमाचल प्रदेश में किसानों व बागवानों ने अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए अब किवी को नए नकदी फल के रूप में विकसित करने के विकल्प को चुना है। एक फल का वनज 40-50 ग्राम तक होता है। उत्तराखंड में इस फल की खेती नैनीताल जिले के रामगढ़, धारी, भीमताल, ओखलकांडा, बेतालघाट, लमगड़ा, मुक्तेश्वर, नथुवाखान, तत्तापानी आदि क्षेत्रों के लिए लाभदायक सिद्ध हुई है।
कीवी फल खाओ, दीर्घ आयु पाओ। एक किलोग्राम कीवी फल खाने से व्यक्ति की आयु एक महीना अधिक लंबी हो जाती है। यह फल मनुष्य की सुखद तथा सहज मनोदशा बनाए रखने के लिए एक अदवितीय प्राकृतिक स्त्रोत है। इसका नियमित सेवन करने से मनुष्य की आयु दीर्घ हो जाती है। कीवी फल में वे सभी उपयोगी तत्व मौजूद होते हैं जिसकी मानव शरीर को आवश्यकता होती है। इस फल में बहुत कम कैलोरी होती है इसलिए, डाक्टर की लोगों से यही सलाह है कि अधिक मात्रा में कीवी फल खाओ और दीर्घ आयु पाओ। कीवी ऊर्जा के विभिन्न स्त्रोतों के साथ पैक एक बिजलीघर फल है। यह मुक्त कण के निराकरण में मदद करता है। यह प्रीबायोटिक के रूप में कार्य करता है। यह विटामिन का अच्छा प्रतिशत प्रदान करता है यह वजन घटाने के लिए उपयोगी है। यह इम्यूनल गुण बढ़ाता है। यह क्षतिग्रस्त डीएनए की मरम्मत करता है। यह पाचन में मदद करता है। यह आपके दिल को स्वस्थ्य रखता है। यह कोलेजन का उत्पादन बढ़ने से त्वचा को लोच देता है।
किवी का पौधा जनवरी.फरवरी के महीने में लगाया जाता है। किवी का पौधा पांच वर्षों में फल देना शुरू कर देता है। मई माह में किवी के पोलीनेशन का कार्य किया जाता है। किवी में पोलीनेशन का मुख्य काम होता है, इसमें मेल व फीमेल फूल को टच करा कर फल तैयार किया जाता है। बागवानों द्वारा मेल व फीमेल किस्म के पौधे अलग.अलग खेतों में लगाये जाते है। ताकि पोलीलेशन कराने में कोई समस्यां न हो। पोलीनेशन के बाद जुलाई.अगस्त में किवी का फल तैयार होता है। प्रदेश में 15 सितंबर से 15 तक नवंबर तक किवी का तुडान किया जाता है। मंडियों में भेज रहे हैं संस्थान के निदेशक और पंतनगर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ने बताया कि कुछ साल पहले निगलाट भवाली स्थित एनबीपीजीआर केंद्र से कीवी की पौध यहां लगाई गई थी। पिछले साल तक इसकी पौध में कीवी का उत्पादन तो होता था, लेकिन काफी कम। बताते हैं कि कीवी का उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्होंने प्रयोग के तौर पर बगीचे के आसपास मधुमक्खियों के कुछ बक्से रख दिए। प्रयोग सफल रहा और मधुमक्खियों द्वारा किए गए परागण के चलते इस बार कीवी पूरे बहार पर है और तीन नाली भूमि में स्थित बगीचा कीवी के फलों से लदा हुआ है।बताते हैं कि मधुमक्खियां रखने से केवल कीवी को ही नहीं बल्कि आसपास में स्थित फल फूलों में भी खासी वृद्धि देखी जा रही है।
संस्थान के निदेशक ने बताया कि कीवी का आयात मुख्य रूप से न्यूजीलेंडए ईरान और अमेरिका से किया जाता है। पिछले साल तीन करोड़ रुपए से अधिक की कीवी आयातित हुई। वह कहते हैं कि यदि उत्तराखंड के काश्तकार मेहनत करें तो देश की जरूरत के मुताबिक कीवी का उत्पादन अकेले उत्तराखंड में किया जा सकता है, क्योंकि कीवी उत्पादन के लिए यहां की जलवायु बेहद मुफीद है। कीवी का कच्चा फल कसैला होता है, लिहाजा बंदर भी इसे पसंद नहीं करते। कीवी में कम कैलोरी, शून्य कोलेस्टेरोल और पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए, सी और बी.6 तथा कैल्सियम, पोटेशियम, मैगनेशियम, सोडियम खाद्य लवण, शर्करा, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर होता है। इसके चलते कीवी सेहत के लिए बेहद अच्छी मानी जाती है। उन्होंने बताया कि नवंबर के अंत तक यह फल पककर तैयार हो जाता है और तब यह काफी महंगा बिकता है। भीमताल नैनीताल। यूं तो यहां स्थित बिड़ला इंस्टीट्यूट आफ एप्लाइड साइंसेस बिड़ला संस्थान को उच्च तकनीकी शिक्षा केंद्र के रूप में पहचाना जाता है, लेकिन अब यहां स्थित कीवी का बगीचा भी इसकी पहचान बना हुआ है। बगीचा का हर पेड़ फलों से लदा है। यहां चाय बागान से लेकर अलग. अलग प्रजातियों के फूल और फलों के पौधे भी खूब फल फूल रहे हैं। कीवी को व्यवसायिक रूप से उत्पादित किया जाय तो यह राज्य में बेहतर अर्थिकी का स्रोत बन सकता है। जो पर्यावरण के संतुलन, जल और वायु की शुद्धता, भूमि के प्राकृतिक रूप को बनाये रखनेमें सहयोगी, जलधारण क्षमता बनाये रखने में सक्षम थीं इसी लिए यह सदियों से कम लागत से लम्बे समय तक बेहतर उत्पादन देने में समर्थ बनीं रही, इन पर परम्परगत ज्ञान का ठप्पा लगा तो इसे पिछड़ेपन का संकेत माना गया है। उत्तराखण्ड हिमालय राज्य होने के कारण बहुत सारे बहुमूल्य फसल उत्पाद जिनकी अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक मांग रहती हैण्भारत में प्रायः सभी प्रान्तों में पाया जाता हैं।उत्तराखण्ड के परिप्रेक्ष्य में इतनी पोष्टिक एवं औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण फसल जिसका अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अधिक मांग हैए को प्रदेश में व्यवसायिक रूप से उत्पादित कर जीवका उपार्जन का साधन बनाया जा सकता है।

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