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भव्य रूप से आयोजित किया गया बंसी नारायण मेला उर्गम घाटी

30/08/23
in चमोली
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रिपोर्ट:लक्ष्मण सिंह नेगी
उर्गमघाटी। श्री बंसी नारायण का मंदिर हिमालय के उत्तराखंड क्षेत्र के बद्रिकाश्रम के अति निकट श्री क्षेत्र कल्प क्षेत्र में स्थित 12000 हजार फीट की ऊंचाई पर पंच केदार के मध्य कल्पेश्वर के अति निकट रुद्रनाथ के समीप यह स्थान अत्यधिक सुंदर और रमणीक है। इस स्थान को जहां विष्णु भगवान ने अपनी लीलास्थली बनाया, पांडवों ने अपनी तपस्या स्थली बनायी, शिव भगवान ने अपने ईष्ट के सम्मुख अपने स्थान की स्थापना की, कल्पेश्वर जटामोली शंकर के सम्मुख बंसी नारायण जी का प्राचीन मंदिर है । यह मंदिर कतयूरी शैली में बना हुआ ऊंचा तप वाला मंदिर है, जो उच्च हिमालय क्षेत्र में स्थित है, यहां पर कोई बस्ती नहीं है । हिमालय के वीरान तपस्या स्थल बंसी नारायण की मूर्ति एक जलेरी में स्थित है । जिसे शिव और विष्णु के भक्त पूजा करते रहे हैं । हिमालय की कंधराओं में कई रहस्य भरे मंदिर है इस मंदिर में वर्ष भर में मात्र रक्षाबंधन का दिन ही मेले का आयोजन होता है । ऐसी मान्यता है कि राजा बलि की घोर तपस्या के कारण जब विष्णु भगवान ने उनकी परीक्षा ली और तीन वलस्त जमीन दान देने की मांग राजा बालि से की दानवीर राजा बलि पूरा राज पाट देने के बाद भी शर्त पूरी नहीं हो पाई तो उन्होंने कहा कि हे स्वामी ! आप मेरे सर के ऊपर पैर रख दीजिए जैसे भगवान विष्णु ने राजा बलि की सर के ऊपर भगवान विष्णु ने पैर रखा तो राजा बलि पताल लोक चले गए राजा बलि को भगवान विष्णु ने पाताल लोक का राजा घोषित किया जब विष्णु वहां से निकलने लगे तो राजा बलि ने विष्णु भगवान से कहा ईश्वर आप मेरे द्वारपाल बन जाइए मेरी रक्षा कौन करेगाऔर वह कई समय तक वही द्वारपाल बने रहे। त्रिलोकी में लक्ष्मी जी के पास नारद स्वामी जब जाते हैं वह कहते हैं कि तुम्हारे पति पाताल लोक में राजा बलि के यहां द्वारपाल बने हुए हैं लक्ष्मी ने नारद से पूछा देव ऋषि नारद जी उपाय बताइए मेरे पति को कैसे छुड़ाया जा सकता है उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के दिन तुम पाताल लोक में जाकर के राजा बलि के हाथों राखी बांधना जब दक्षिण देने की बात आएगी। तुम उनसे अपने पति को वहां से छुड़ा लेना ऐसी कथा का वर्णन वंशी नारायण के बारे में बताया जाता है वंशी नारायण शब्द से लगता है कि कृष्ण का मंदिर होगा किंतु भगवान विष्णु का चतुर्भुज मूर्ति विराजमान है यहां पर गणेश भैरव कुबेर घंटाकरण वन देवियों की मूर्तियां विराजमान है सैकड़ो वर्षों से यहां इस मंदिर में रक्षाबंधन का मेले का आयोजन होता रहा है प्राचीन काल से यहां रक्षाबंधन के दिन कलगोठ गांव की जाख देवता के पुजारी यहां की पूजा करते रहे हैं समय-समय पर व्यवस्थाओं में बदलाव आता रहा है यहां हर वर्ष कलगोठ ग्राम के लोग रक्षाबंधन से एक दिन पूर्व यहां पहुंच करके भगवान नारायण को घी,मक्खन,सत्तू आदि का भोग चढ़ते हैं यहां मखमली गलीचे बुग्याल दूर तक दिखाई देते हैं। यहां पहुंचने के लिए दो रास्ते मुख्य हो सकते हैं श्री कल्पेश्वर के दर्शन के बाद उरगम घाटी के गीरा, वांसा, उर्वशी आश्रम होती हुई मूला बुग्याल, कुडमूला,वरजिक, होते हुए देवदर्शनी को पार करके बंसी नारायण पहुंच जाता है जो लगभग देव ग्राम से 10 से 12 किलोमीटर का रास्ता पार करके यहां पहुंचा जा सकता है। दूसरा रास्ता उर्गम श्री बंसी नारायण के लिए पल्ला जखोला किमाणा कलगोठ होती हुई बंसी नारायण पहुंचा जा सकता है जो लगभग 16 किलोमीटर की लगभग है जिसमें 10 किलोमीटर गाड़ी से जा सकते हैं 6 किलोमीटर पैदल दूरी तय करना पड़ेगा और बंसी नारायण पहुंचा जा सकता है वर्तमान समय में सड़क की स्थिति ठीक नहीं है यात्रियों के लिए उर्गम से बंसी नारायण की यात्रा सुगम रहेगी। देवग्राम उर्गम मैं रुकने के लिए होम स्टे की व्यवस्था पूर्ण रूप से उपलब्ध है।

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