डोईवाला, (प्रियांशु सक्सेना)। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की कार्रवाई को क्षेत्र में भू-माफियाओं ने खुली चुनौती दे दी है। बताया जा रहा है कि प्राधिकरण द्वारा ध्वस्त की गई अवैध प्लाटिंग पर दोबारा निर्माण कार्य कर दिया गया है। इससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि एमडीडीए की कार्रवाई का भूमाफियाओं पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा है और उनके हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
प्राधिकरण की ओर से अवैध प्लाटिंग के खिलाफ निरंतर अभियान चलाए जाने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हरिद्वार–दून हाईवे के समीप लालतप्पड़ स्थित साईं मंदिर के पीछे लगभग 25 से 30 बीघा भूमि पर बड़े पैमाने पर की गई अवैध प्लाटिंग को गत वर्ष दिसंबर माह में एमडीडीए की टीम ने जेसीबी की सहायता से ध्वस्त किया था। उस समय इस कार्रवाई को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया था, लेकिन अब उसी भूमि पर दोबारा प्लॉट काटने और बिक्री शुरू करने की सूचना सामने आई है। सूत्रों के अनुसार संबंधित भूमि पर किसी स्थानीय व्यक्ति द्वारा साझेदारी में प्लाटिंग कराए जाने की चर्चा है। आरोप है कि कृषि भूमि को बिना भूमि उपयोग परिवर्तन कराए ही आवासीय प्लॉट के रूप में बेचा जा रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्राधिकरण की कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। ध्वस्तीकरण के बाद संबंधित स्थल की नियमित निगरानी नहीं की जाती, जिसका फायदा उठाकर भूमाफिया दोबारा सक्रिय हो जाते हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि केवल एक बार की कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि निरंतर मॉनिटरिंग और कठोर कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि अवैध प्लाटिंग पर स्थायी रोक लगाई जा सके। उनका कहना है कि आम लोग भूमाफियाओं के झांसे में आकर अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर प्लॉट खरीद लेते हैं और बाद में जब प्रशासनिक कार्रवाई होती है तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा रानीपोखरी, माजरी ग्रांट, कुड़कावाला, जीवनवाला, बुल्लावाला और दुधली आदि क्षेत्रों में भी अवैध प्लाटिंग का खेल धड़ल्ले से जारी है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो अवैध कॉलोनियों का जाल और फैल सकता है। अब देखना यह होगा कि प्राधिकरण इस मामले में कितनी गंभीरता से संज्ञान लेकर प्रभावी कार्रवाई करता है। “मामला अभी संज्ञान में नहीं आया है। उक्त प्रकरण की जांच कराई जाएगी। यदि अवैध प्लाटिंग दोबारा की गई है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। अवैध निर्माण या प्लाटिंग की अनुमति किसी को नहीं है और गलत कार्य करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।” प्रमोद मेहरा, सहायक अभियंता, एमडीडीए












