चमोली (लक्ष्मण सिंह नेगी)। उत्तराखंड हिमालय अनादि काल से ही कई महत्वपूर्ण रूप से धार्मिक स्थान पूरी दुनिया में जाने जाते है जिसमें जोशीमठ ज्योर्तिमठ का भी अपना अलग स्थान है ऐसी मान्यता है जब हिरण कश्यप के अत्याचार के बाद भक्त प्रल्हाद का जन्म हुआ और वह पहले से ही भगवान नारायण की परम भक्त रहे जोशीमठ में ही भगवान नरसिंह का नरसिंह अवतार हुआ और यही शांत रूप भी माना जाता है पूरी दुनिया का नरसिंह मंदिर जोशीमठ अपनी प्रसिद्धि प्राप्त है पूरी दुनिया की नरसिंह की उपासक जोशीमठ को नरसिंह की जन्मस्थली मानते हैं यहां आकर के अपने ईष्ट को प्रणाम करते हैं और धन्य कहलाते हैं यह स्थान काफी प्राचीन माना जाता है भगवान नरसिंह को सप्त बद्री के रूप में यहां पर पूजन किया जाता है सप्त बद्री में दो मुख्य स्थान है जिनमें नरसिंह बद्री और आदि बद्री यह दोनों स्थान सप्त बद्री के रूप में चमोली जिले में पूजित हैं यहां पर जोशीमठ में नरसिंह बद्री के अलावा तिमुंडा वीर वासुदेव मंदिर दुर्गा मंदिर महालक्ष्मी मंदिर कई अन्य मंदिरों एवं देवस्थल यहां विराजमान है नरसिंह मंदिर बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अंतर्गत आने वाले मंदिरों में से एक है नरसिंह मंदिर का पुनर्निर्माण बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के द्वारा किया गया और यहां पर देश विदेश के लोग भगवान नरसिंह के दर्शन के लिए आते हैं ऐसी लोक मान्यता है जब भगवान नरसिंह का एक हाथ की बाहे जो पतली होती जा रही है जिस दिन टूट जाएगी उस दिन बद्री नाथ का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और भविष्य बद्री में भगवान की पूजा की जाएगी। नरसिंह मंदिर ऋषिकेश से 250 किलोमीटर के लगभग दूरी पर स्थित बद्रिका आश्रम से 50 किलोमीटर पहले है और यहां पर वर्षभर नरसिंह मंदिर के कपाट खुले रहते हैं।










