डोईवाला, (प्रियांशु सक्सेना)। रानीपोखरी के लिस्ट्राबाद गांव में प्रस्तावित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की मांग को लेकर बीते 38 दिनों से धरना–प्रदर्शन जारी है। बुधवार को प्रस्तावित स्थल पर पुलिस, प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प देखने को मिली। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
बुधवार सुबह तहसील प्रशासन की टीम भूमि के सीमांकन के लिए पहुंची। सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और आंदोलनकारी भी मौके पर जुट गए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित लॉ यूनिवर्सिटी की भूमि को सॉन्ग बांध परियोजना के लिए स्थानांतरित किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे डोईवाला क्षेत्र की उपेक्षा हो रही है, जबकि विश्वविद्यालय बनने से स्थानीय लोगों को रोजगार और शिक्षा के बेहतर अवसर मिल सकते थे। गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2019 को विधि विश्वविद्यालय को स्वीकृति दी गई थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसका शिलान्यास भी किया था, लेकिन छह वर्ष बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि यह भूमि सॉन्ग बांध परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए सिंचाई विभाग को हस्तांतरित की गई है। सीमांकन के दौरान ग्रामीणों ने विरोध कर कार्य रुकवाने का प्रयास किया। आंदोलनरत ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित भूमि को किसी अन्य कार्य के लिए स्थानांतरित नहीं होने देंगे और जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच झड़प हुई। पुलिस ने कई आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर रायवाला थाने भेज दिया। गिरफ्तारी का विरोध करते हुए कुछ लोग पुलिस वाहन के आगे लेट गए। ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक पर जनता को गुमराह करने का आरोप भी लगाया। मौके पर पहुंचे विधायक बृजभूषण गैरोला को भी लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। इस दौरान ब्लॉक प्रमुख गौरव चौधरी, कांग्रेस जिला अध्यक्ष मोहित उनियाल, ग्राम प्रधान सुधीर रतूड़ी सहित कई जनप्रतिनिधियों को पुलिस ने हिरासत में लिया। कांग्रेस पूर्व जिला अध्यक्ष अश्विनी बहुगुण, बालेंद्र सजवान व राजेश्वरी देवी ने कहा कि सरकार के भीतर आपसी खींचतान का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक लॉ यूनिवर्सिटी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।ऋषिकेश उपजिलाधिकारी योगेश मेहरा ने बताया कि ग्राम लिस्ट्राबाद में रेशम विभाग के नाम दर्ज 6.233 हेक्टेयर भूमि को सॉन्ग बांध परियोजना के विस्थापितों के पुनर्वास के लिए विधिवत शासनादेश के तहत सिंचाई विभाग के नाम हस्तांतरित किया गया है। जिलाधिकारी द्वारा गठित समिति के माध्यम से संबंधित विभाग को भूमि का पजेशन (कब्जा) देने की कार्रवाई की गई है। एसडीएम ने बताया कि यदि ग्रामीणों के पास लॉ यूनिवर्सिटी से संबंधित कोई वैध दस्तावेज या शासनादेश है, तो उसके आधार पर संबंधित भूमि को शीघ्र चिन्हित करने की कार्रवाई की जाएगी।












