
सत्यपाल नेगी/रुद्रप्रयाग
जिलाधिकरी मनुज गोयल ने ग्रामीण आजीविका मिशन से जुडे स्वयं सहायता समूहों को हस्तशिल्प की विधा से दक्ष करने की आवश्यकता बताते हुए सहायक परियोजना निदेशक को निर्देश दिए कि स्थानीय स्तर पर उत्पादित रिंगाल निर्मित सामग्री का बहुतायत उत्पाद तैयार करने हेतु प्रशिक्षण एवं आनलाइन मार्केटिंग की योजना तैयार करें।
जिलाधिकारी मनुज गोयल ने यह बात विकास खण्ड ऊखीमठ के आजीविका मिशन से जुड़े स्वयं सहायता समूह से जु़ड़ी महिलाओं से वार्ता करते हुए कही। उन्होने मौके पर मौजूद सहायक परियोजना निदेशक को निर्देश देते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के सपनों को साकार करने में महिलाओं की भागीदारी जरूरी है और जिस तरह से स्वयं सहायता समूह के जरिए महिलाएं जागरूक हो रही है वह आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जिलाधिकारी गोयल ने स्वयं सहायता समूह को हस्तशिल्प के क्षेत्र में दक्ष करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर एवं सहजता से प्राप्त होने वाले सामान का उपयोग कर हस्तशिल्प को बढावा दिया जाय। इसके लिए जिलाधिकारी ने रिंगाल से टोकरी एवं अन्य उपयोगी वस्तुओं को निर्मित करवाकर आजीविका को सुदृढ़ बनाने के लिए समूह की महिलाओं को प्रेरित किया।
जिलाधिकारी ने परियोजना निदेशक को यह भी निर्देश दिये कि हस्तशिल्प के जरिए सामग्री निर्माण हेतु प्रशिक्षण इंतजामात किये जाऐ व आनलाइन मार्केटिंग के माध्यम से विपणन के लिये कारगर कदम उठाये जायें।
परियोजना निदेशक रमेशचन्द्र ने स्वयं सहायता समूहों द्वारा आजीविका के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी जिलाधिकारी के सम्मुख रखी। दुर्गा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी श्रीमती सरिता देवी ने मुख्यमंत्री से हुई वर्च्युवल वार्ता की जानकारी समूह के सदस्यों एवं उपस्थित अधिकारियों के साथ साझा की।
इस दौरान प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी मनविन्दर कौर, क्षेत्र पंचायत प्रमुख श्वेता पाण्डेय, खण्ड विकास अधिकारी दिनेश प्रसाद नैथानी, तहसीलदार दीवान सिंह राणा, स्वयं सहायता समूह से जुड़ी श्रीमती राजकुमारी देवी, प्रियंका राणा, अमिता पंवार सहित चार दर्जन से अधिक महिलाएं मौजूद रही।











