प्रकाश कपरूवाण
जोशीमठ। सीमांत क्षेत्र के प्रमुख नगर जोशीमठ मे सात दिनों के बाद विद्युत आपूर्ति बहाल हो सकी। पूरे पैनखंडा मे विद्युत आपूर्ति वहाल करने मे और कितना समय लगेगा स्वत अंदाजा लगाया जा सकता है। सप्ताह भर तक विन विजली के लेागो का जीना मुहाल हो गया था। न मिटटी तेल ही उपलब्ध हो पाया और लकडी का कोयला पचास रूपया किलो जो आम गरीब आदमी की पंहुच से बाहर था।
एडवाॅस टैक्नोलाॅली के युग मे सीमांत पैनख्ंाडा को एक सप्ताह तक घुप अंधेरे मे रहने को विवश होना पडा। क्या आम व क्या खास विद्युत के विना पूरा क्षेत्र ही बदहाल रहा। लोग मोबाडल चार्ज करने के लिए भी तरसते रहे। एक सप्ताह पूर्व हिमपात के बाद 66केबी के लाइन व पोल क्षतिग्रस्त हो गए थे। हाॅलाकि बर्फबारी ने विद्युत पोलो व तारो को बेहद नुकसान पंहुचाया था। जिसके कारण पिटकुल के कर्मचारियों की भी तैनाती करनी पडी । और करीब 85 दक्ष कामगारो के लगने के बाद एक सप्ताह मे विद्युत आपूर्ति वहाल हो सकी। वो भी केवल जोशीमठ मुख्य नगर क्षेत्र मे।
सीमावर्ती क्षेत्र मे दिसंबर माह से मार्च महीने तक कभी भी बर्फबारी हो सकती हैं। क्या संबधित विभागो को बर्फबारी से पूर्व तैयारियाॅ नही करनी चाहिए। हिमक्रीडा केन्द औली जहाॅ पर्यटको का हुजुम उमडा है। वहाॅ 12दिसबर की रात्रि से ही विद्युत आपूर्ति ठप्प है। ऐसे मे औली आने वाले पर्यटक औली को लेकर क्या सदंेश लेकर लौट रहे होगे स्वत ही समझा जा सकता है। मौसम विभाग ने पुन 21व 22दिसबंर को बर्फबारी के संकेत दिए है। ऐसे मे औली की विद्युत ब्यवस्था आखिर कब तक बहाल हो सकेगी कहा नही जा सकता । नगर मे मिटटी तेल की ब्यवस्था तक सुलभ नही हैं। बीपीएल श्रेंणी को प्रतिकार्ड दो लीटर मिटटी तेल वितरित किए जाने की ब्यवस्था थी लेकिन जून महीने से मिटटी तेल की आपूर्ति गल्ली विक्रेताओ को ही नही हो सकी।
यहाॅ यह उल्लेखनीय है कि जोशीमठ नगर की तलहटी से ही जेपी कंपनी द्वारा उत्पादित 400मेगावाट विद्युत जोशीमठ से मुज्जफरनगर पंहुच रही है। और भारी से भारी बर्फबारी के बाद आज तक जेपी कंपनी द्वारा स्थापित ना विद्युत टावर क्षतिग्रस्त हुए और ना ही तारे टूटी। लेकिन आखिर क्या कारण है कि पावर कारपोरेशन द्वारा स्थापित विद्युत पोल व तारे हर वर्फबारी मे क्षतिग्रस्त हो जाती है! विद्युत आपूर्ति जैसी ब्यवस्था के लिए सरकारी महकमो को प्राइवेट कंपनियों की तर्ज पर कार्य करने की आवश्यता हैं अन्यथा आने वाले समय मे सीमावर्ती क्षेत्रो के गाॅवों व नगरो को इसी प्रकार की समस्या से दो-चार होना पडेगा।
बताते चले कि इस बर्फबारी मे पातालगंगा व लंगसी के बीच जो लंबे स्पान का तार क्षतिग्रस्त हुआ था वही तार वर्ष 2005 मे भी इसी स्थान पर टूटा था और तब तीन दिनो तक पूरा क्षेत्र अंधेरे मे था, लेकिन 2005 के बाद के 14 वर्षो मे राज्य का ऊर्जा महकमा इसका स्थाई समाधान नही कर सका।
जेपी कंपनी के टावर व तारो के सुरक्षित रहने का प्रमुख कारण यह भी है कि नियमित चैकिंग होती है, यदि टावर व तारो के नजदीक पेडो की टहनियाॅ आ रही है तो वन विभाग की परमीशन लेकर उन्है कटवाया जाता है। टावर के आस-पास के क्षेत्र मे भूस्खलन तो नही हो रहा है इसकी पर्याप्त मोनेटिंग की जाती है। पावर ग्रिड व जेपी कपंनी संयुक्त रूप से निरीक्षण करते है। उम्मीद की जानी चाहिए कि भविष्य मे उत्तराखंड ऊर्जा निगम विद्युत पोलो व तारो की सुरक्षा के प्रति जागरूक रहेगी। ताकि लोगो को सप्ताह भर तक अंधेरे मे ना रहना पडे।