ऋषिकेश। एम्स में 8 मई को भर्ती हुए पर्यावरणविद पद्म विभूषण चिपको आंदोनकारी सुरंदर लाल बहुगुणा की मौत का समाचार आया है। उनके स्वास्थ्य को लेकर खबरें आ रही थी कि कभी उनका स्वास्थ्य स्थिर हो रहा था, कभी सुधार की बात भी कही जा रही थी। अब दुखद खबर आई है कि सुंदरलाल बहुगुणा हमारे बीच नहीं रहे।
94 वर्षीय सुंदरलाल बहुगुणा का जीवन पर्यावरण संरक्षण के लिए संघर्ष करते हुए बीता। टिहरी बांध को लेकर उनका विरोध पर्यावरण को बचाने के लिए ही था। बहुगुणा देश दुनिया में पर्यावरण के लिए काम कर रहे लोगों के लिए एक प्रेरणास्रोत थे। उनके अवसान से पर्यावरण बचाने के लिए संघर्ष करने वालों की जमात में एक बड़ा नाम इस दुनिया से चला गया। लेकिन वह हमेशा पर्यावरण संरक्षण करने वालों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। हालांकि चिपको आंदोलन के बीज रैणी गांव की गौरा देवी और उनके साथियों ने बोये थे, लेकिन 1972 में चिपको आंदोलन को धार देकर देश.दुनिया को वनों के संरक्षण के लिए इस आंदोलन को पहुंचाने वालों में सुंदर लाल बहुगुणा सबसे अग्रणी रहे।
वह टिहरी जैसी विशाल परियोजनाओं को पर्यावरण का दुश्मन मानते थे विकास के लिए छोटी परियोजनाओं का समर्थन करते थे। प्रकृति का विनाश करके नहीं प्रकृति के साथ चलकर विकास करने के वे हमेशा पक्षधर रहे। पर्यावरण संरक्षण के लिए उनके किए गए संघर्ष को देश दुनिया हमेशा उन्हें याद करती रहेगी।











