कमल बिष्ट/उत्तराखण्ड समाचार।
गढ़वाल। उत्तराखण्ड के वरिष्ठ साहित्यकार एवं समाज सेवी सुन्दर लाल जोशी को दिल्ली के सौक्रेट्स यूनिवर्सिटी द्वारा ‘कर्म श्री’ अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया। साथ ही इनके साहित्यिक और उच्च स्तरीय सामाजिक योगदान हेतु इन्हें ऑनरेरी डॉक्टरेट 2026 भी प्रदान की गई। यह उपाधि इन्हें अपने जीवन में नैतिक उच्चादर्शों को प्राथमिकता देने, शैक्षिक क्षेत्र में किए गए नवाचारों, जनसमाज की निःशुल्क एवं निःस्वार्थभाव सेवा करने, दिव्यांगों की जीवनशैली के उन्नयन और विभिन्न विद्यालयों के लिए विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन करवाकर उन्हें निःशुल्क वितरण करने, पुस्तकों के प्रकाशन करने, गो संरक्षण, गो संवर्द्धन एवं गो विकास के लिए विगत 30 वर्षों से कार्य करने, अंगदान प्रेरक के रूप में कार्य करने, भ्रूण हत्या रोकने, सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार करने, गढ़वाली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान प्रदान करवाने के प्रयासों और विगत 50 वर्षों से पर्यावरण हित चिंतन की दिशा में सामाजिक सेवाएँ देने के लिए प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त इनके द्वारा दिव्यांगों के उत्थान की दिशा में भी निरंतर कार्य किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के एक सक्रिय सदस्य के रूप में भी श्री जोशी द्वारा निरंतर लोक कल्याण के कार्य किए जा रहे हैं। मातृभाषा के उत्थान, समर्थन, संवर्द्धन एवं विकास के लिए इनके द्वारा किए गए कार्यों की मंच से भी सराहना की गई। इसके अतिरिक्त इनके द्वारा समाज में फैली हुई विरूपताओं के खंडन, नशा निषेधी प्रवृत्ति के उच्चादर्शी समर्थन, शाकाहारी जीवन शैली के प्रोत्साहित करने और बाह्याडंबर सहित सामाजिक कुरीतियों पर नाट्य विधा से लगातार प्रहार करने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है।
श्री जोशी ने पत्रकारों के एक प्रश्न के जवाब में बताया कि इस प्रकार के सम्मान मानव मात्र को न सिर्फ सामाजिक उच्चादर्शों को उपादेयता का भान कराते हैं बल्कि अतिरिक्त सामाजिक उत्तरदायित्व भी उस व्यक्ति विशेष को सौंपते हैं जिसे इस प्रकार के कोई भी सम्मान मिला हो। साथ ही सच्चे अर्थों में वास्तविक सम्मान वह है जो बिना किसी आशा प्रत्याशा के किसी व्यक्ति को मिलता हो। इनके द्वारा मातृभाषा के उत्थान और विकास के साथ-साथ आंग्ल भाषा की उपादेयता पर भी चर्चा की गई। साथ ही इनके द्वारा नई शिक्षा नीति 2020 के कुछेक प्रावधानों पर सन् 2012 में ही अपने पूर्व प्रकाशित शोध लेख में सुझाव दे दिए गए थे। जिनमें प्राथमिक शिक्षा का स्तर प्रारंभिक शिक्षा का माध्यम आँचलिक / मातृ भाषा के माध्यम से किए जाने, प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या के उन्नयन के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन राजकीय प्राथमिक विद्यालय में करवाने, प्रारंभिक स्तर पर सभी छात्र-छात्राओं को लगातार कक्षोन्नति पर रोक लगाए जाने, आर टी ई के तहत 25 प्रतिशत विद्यार्थियों के राजकीय विद्यालयों से निजी विद्यालयों में होने वाले पलायन पर अंकुश लगाने, शिक्षक वर्ग को बहु उद्देशीय कर्मी के रूप में उपयोग न किए जाने और शिक्षा व्यवस्था को अनावश्यक राजनीति हस्तक्षेप से मुक्त करने की आवश्यकताओं पर बल दिया गया था। प्रसन्नता का विषय यह रहा कि इन सुझावों में से दो सुझावों को छोड़कर शेष सभी सुझावों पर नई शिक्षा नीति 2020 ने भी अपनी मोहर लगाई।
आयोजित समारोह वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रणजीत सिंह, दिल्ली विधानसमा के सचिव विकास सिंह, सुप्रीम कोर्ट के बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं लीगल एडवाइजर आर.आर. बाग, डॉ० अन्नपूर्णा मिश्रा, पूर्व महापौर पूर्वी दिल्ली नगर निगम, डॉ० मनन कौशल निदेशक भारतीय पर्यटन विकास परिषद तथा पद्म श्री से सम्मानित श्रीमती उर्मिला श्रीवास्तव, डॉ० आशीष हरि ओम धनौरी आदि सैकड़ों लोगों की देख रेख में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की संपन्नता से पूर्व कार्यक्रम के चेयरपर्सन और ऊर्जा उत्साह, सामाजिक समरसता के प्रतीक डॉ० योगेश एवं उनकी पूरी टीम ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी महानुभावों का आभार प्रकटीकरण करते हुए कहा है कि यह सम्मान कार्यक्रम इस शैक्षिक मंच पर न सिर्फ व्यक्ति विशेष का सम्मान है बल्कि इससे सम्पूर्ण मानवता भी सम्मानित होती है जो कि मानव जीवन के लक्ष्यों को पूर्ण करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। साथ ही उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में सभी महिला संगठनों सहित कार्यक्रम में उपस्थित महिला अवार्डीज को भी अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित की और अंगदान से दर्जनों लोगों को अपने हृदय दान, दो किडनी दान, दो नेत्र दान, अस्थि दान, रक्तदान आदि सभी कार्यकारी अंगों को दान करने वाले स्वर्गीय आकांक्षा जोशी का भी पुनीत स्मरण किया और उनकी दादी स्वर्गीय दर्शनी देवी जोशी के नाम का भी शुभ उच्चारण किया गया जिन्होंने जीवन में रक्तदान और जाते जाते नेत्र दान करके अपने वृहद समाज की अभूतपूर्व सेवाएँ की हैं। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में भी सौभाग्य का विषय यह रहा है कि डॉ० सुन्दर लाल जोशी एवं श्रीमती कमला जोशी को ऐसी दानी पुत्री स्व० आकांक्षा जोशी के पिता माता होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है जबकि आयुष जोशी, कमला जोशी एवं डॉ० सुन्दर लाल जोशी को अपनी माता जी के नेत्र दान करने का सौभाग्य तुल्य भी है जो कि अंगदान प्रेरक के रूप में भी लगातार कार्य कर रहे है। उन्होंने अंगदान का यह कार्य अपनी सामाजिक उत्कृष्टता का उदाहरण देकर प्रस्तुत किया। इसके साथ ही श्री जोशी ने अपने उन सभी शुभेच्छुओं का भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस अवसर पर उन्हें शुभकामनाएँ संप्रेषित करके उनका उत्साहवर्द्धन किया।
प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के अवसर पर डॉ० संजय वत्स ने अपने दूरभाषिक संदेश में बताया कि डॉ० सुन्दर लाल जोशी एक नेक इंसान ही नहीं बल्कि उनकी दृष्टि में भगवान के तुल्य भी हैं। जो अंगदान के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।












