फोटो- कपाटोदघाटन मौके पर फ्यूॅलानारायण धाम के मुख्य द्वार को भी पुष्पो से सजाया गया।
प्रकाश कपरूवाण जोशीमठ।
प्रसिद्ध हिमालयी धाम फ्यूॅलानारायण के कपाट श्रावण संक्राति को पूरे विधि-विधान के साथ खोले गए। इससे पूर्व पंचनाम चैक भर्की से इस वर्ष के बारीदारों को बाजे-गाजो के साथ फयॅूलानारायण धाम भेजा गया।
पंच बदरी एंव पंच केदारों की भूमि उर्गम घाटी मे विराजमान भगवान कल्पनाथ के शीर्ष पर करीब दस हजार फीट की ऊॅचाई पर हिमालयी वुग्याल के बीच है भगवान फयूॅलानाराण का मंदिर। जहाॅ प्रतिवर्ष श्रावण संक्राति के पर्व पर मंदिर के कपाट खोले जाते है, और नंदाष्टमी पर्व पर कपाट बंद किए जाते है। इस दौरान गाॅव के बारीदारों द्वारा अनवतर वहाॅ रहकर भगवान नारायण की पूजा/अर्चना की जाती है। भगवान नारायण को सत्तू, दूध व मक्कखन का ही भोग लगाया जाता है।
उच्च हिमालय मे फयॅूलानारायण ही एक ऐसा मंदिर है जहाॅ महिला पुजारिन भी होती है। मंदिर की पौराणिक पंरपरानुसार इस मंदिर मे भगवान के स्नान के लिए जल व पुष्प दस वर्ष की आयु से कम की कन्या अथवा साठ वर्ष से अधिक की महिला ही ला सकती है। इस वर्ष के बारीदार हरीश सिंह चैहान व महिला पुजारिन गोदावरी देवी है। श्रावण संक्राति के अवसर पर भर्की के पंचनाम चैक मे इस वर्ष के बारीदार को घंटी व चिमटा तथा गाॅव मे एकत्रित किये गये भोग प्रसाद की सामग्री दी गई। और वारीदारों ने अपनी गाय-बच्छियो के साथ उच्च हिमालयी धाम के लिए प्रस्थान किया। बारीदारों को धाम तक पंहुचाने के लिए भर्की, भेटा, पिलखी आदि गाॅवों से प्रति परिवार एक सदस्य भी जाता है,। कपाटोदघाटन के मौके पर , भूमियाल देवता के प्रतिनिधि लक्ष्मण सिंह नेगी, मेला समिति के अध्यक्ष हर्षबर्धन सिंह फरस्वांण,,उजागर सिंह फरस्वांण,, युवक मंगल दल अध्यक्ष देवेन्द्र सिह चैहान, कलगोठ के पूर्व प्रधान दलीप सिंह चैहान, के अलावा भर्की, भेटा, अरोसी, पिलखी गाॅवो के ग्रामीणो के साथ ही उर्गम घाटी के कई अन्य गाॅवों के ग्रामीण व श्रद्धालु मौजूद रहे।