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दारमा घाटी के ग्रामीण, एयरलिफ्ट करने का ही विकल्‍प

29/10/21
in उत्तराखंड
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला:

चीन सीमा से लगी उच्च हिमालयी दारमा घाटी के ग्रामीणों की दुश्वारियां बढ़ चुकी हैं। एक तरफ हिमपात होने लगा है दूसरी तरफ तवाघाट-सोबला-तिदांग मार्ग बंद है। इससे माइग्रेशन भी प्रभावित हो चुका है। सीपू से लेकर नागलिंग तक ग्रामीण फंसे हैं। घाटियों तक आने के लिए अब हेलीकाप्टर का ही विकल्प है। गुरुवार को ढाकर हेलीपैड में 40 से अधिक ग्रामीण दिन भर हेलीकाप्टर की प्रतीक्षा करते रहे। दुग्तु गांव में फंसे सीपू और मार्छा के तीस से अधिक ग्रामीण पैदल ही निचले स्थानों की की तरफ रवाना हो चुके हैं हैं। ये ग्रामीण एक-दो दिन में नागलिंग या फिर वुर्थिग पहुंचेंगे। उच्च हिमालय से निचली घाटियों की तरफ माइग्रेशन का समय हो चुका है।

इस वर्ष मार्ग बंद होने से माइग्रेशन में देरी हो चुकी है। उच्च हिमालय में अब हिमपात होने लगा है। दो दिन पूर्व हुए हिमपात से न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री से नीचे पहुंच गया है। ऐसे में ग्रामीणों का अब ऊपरी गांवों में रह पाना मुश्किल है।दिक्कत यह है कि घाटियों की तरफ आने के लिए मार्ग बंद है। सीपू और मार्छा के ग्रामीण दो दिन दुग्तू, दांतू में हेलीकाप्टर की आस रुके रहे। गुरुवार को ये लोग पैदल ही चल चुके हैं। बालिंग गांव में एक तीन वर्षीय बच्चे का स्वास्थ्य खराब है। गुरु वार को भी हेलीकाप्टर नहीं पहुंचा। बीते दिनों दारमा में चिकित्सा शिविर के लिए गई दो सदस्यीय टीम भी दारमा में फंसी है। जिलाधिकारी ने बताया कि शासन से बात हो चुकी है।

शुक्रवार से हेलीकाप्टर सेवा प्रारंभ होने के आसार हैं।दारमा घाटी के 14 गांवों के लोग माइग्रेशन की तैयारी कर रहे हैं। माइग्रेशन से पहले ही हिमपात हो गया है। गांव, घरों में छह इंच और पहाड़ों में एक फुट से अधिक बर्फबारी हुई है। इससे ठंड भी काफी बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि सड़क बंद होने से कुछ लोग अपने जानवरों के साथ आधे रास्ते में फंसे हैं। सड़क खराब होने से लोग तो दूर मवेशी तक आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

तीन दिन पहले चिकित्सा शिविर के लिए दुग्तू गए एक डॉक्टर और फार्मासिस्ट भी सड़क बंद होने से फंसे हैं। चाइना बॉर्डर से लगी दारमा घाटी आसमानी आफत में तबाह हो गई है. हालात ये है कि रोड तो छोड़िए पैदल रास्ते तक नहीं बचे हैं. ऐसे में माइग्रेशन के लिए ग्रामीण अब जान जोखिम में डाल रहे हैं.भारी बर्फबारी होने के कारण ऊंचे इलाकों से ग्रामीण निचले इलाकों को माइग्रेट हो रहे हैं. लेकिन रास्ता नहीं होने से खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

ग्रामीण सरकार से हेलीकॉप्टर की मदद से रेस्क्यू किए जाने की मांग कर रहे हैं.बीते दिनों हुई दारमा घाटी में हुई भारी बारिश और बर्फबारी के चलते सड़क और पैदल रास्ते जगह-जगह जमींदोज हैं. ऐसे में ग्रामीणों को अपनी जान हथेली पर रखकर मौत का खतरनाक सफर पार करना पड़ रहा है. हजारों की संख्या में ग्रामीण यहां अभी भी कैद हैं. बंद सड़कों के निरीक्षण के लिए दारमा गए तहसीलदार की भी ठंड से तबियत बिगड़ गई। ग्रामीणों ने काफी मुश्किलों के बीच उन्हें रातोंरात धारचूला पहुंचाया।

धारचूला अस्पताल में ने जांच की।जांच में साइनस के लक्षण मिलने पर उन्हें हल्द्वानी रेफर किया गया। बीआरओ ने तवाघाट-सोबला सड़क खोलने का कार्य शुरू कर दिया है लेकिन सड़क के चार-पांच दिन पहले खुलने की उम्मीद नहीं है।सीपीडब्ल्यूडी की सोबला-सड़क पर दर, बोगलिंग, सेला से नांगलिग के बीच कई जगहों पर बोल्डर, मलबा, पेड़ गिरने से सड़क का नामोनिशान नहीं है।

दिनेश चलाल और नरेंद्र सेलाल ने बताया कि सेला से नांगलिग के बीच सड़क बदहाल हो गई है।कई जगहों पर लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर हाथों से भी चलना पड़ रहा है। थोड़ी सी असावधानी होने पर नीचे बह रही धौली नदी में गिरने का खतरा है। चल ग्राम से लौटने पर दिनेश चलाल ने बताया कि सड़क की हालत देखने पर 20 दिनों तक यातायात सुचारु होने की संभावना नहीं है।

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