• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

किसी चमत्कारी औषधि से कम नहीं हैत्रिफला

17/12/20
in उत्तराखंड, हेल्थ
Reading Time: 1min read
112
SHARES
140
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखण्ड राज्य जो कि हिमालय की गोद में बसा है जिसकी वजह से यह एक खास भौगोलिक परिस्थिति रखता है, जिसमें ना जाने कितने बहुमूल्य उत्पाद पैदा होते होंगे। त्रिफला आज भी भारत में सबसे अधिक खरीदी जाने वाली आयुर्वेदिक औषधियों में गिना जाता है। अनुभवजन्य ज्ञान यह भी बताता है कि जाति, धर्म, निवास स्थान, जलवायु एवं भौगोलिक परिस्थितियों से ऊपर उठ कर प्रत्येक घर में त्रिफला की कुछ न कुछ मात्रा अवश्य पाई जाती है। आयुर्वेद का ऐसा कोई ग्रन्थ नहीं जिसमे त्रिफला को एक उच्चकोटि का रसायन न माना गया हो। भारत के चार लाख आयुर्वेदाचार्यों में ऐसा कोई वैद्य नहीं जिसने त्रिफला को अपनी चिकित्सा में प्रशस्त न किया हो।
चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदय सहित अन्य ग्रन्थों के निचोड़ स्वरूप यह कहा जाता है कि त्रिफला न केवल सभी तरह की बीमारियों की औषधि है, बल्कि यह सभी प्रकार की बीमारियों को रोकने के लिये एक विशिष्ट और प्रभावी रसायन भी है। निष्कर्षों को अब तक प्रकाशित या संदर्भित 1400 से अधिक शोधपत्रों के प्रकाश में देखने पर प्रमाणित होता है कि ऐसे लोगों का प्रतिशत सांख्यिकीय रूप से नगण्य ही है, जो स्वस्थ होने के बावजूद कुछ वर्षों से त्रिफला का सेवन करते रहे हों और फिर भी गैर संचारी रोग जैसे हृदय रोग, मधुमेह, कैन्सर, मानसिक रोग आदि से पीडि़त हो गये हों। त्रिफला के शास्त्र.वर्णित एवं शोध.समर्थित गुणों का तुलनात्मक अध्ययन बताता है कि त्रिफला विविध प्रकार के रोगों से बचाव कर सकता है। बशर्ते खान.पान एवं जीवन.शैली संयमित व संतुलित हो और त्रिफला की गुणवत्ता से समझौता न किया गया हो।
आँवला के समिश्रितस्वरूप को आयुर्वेदशास्त्रा में त्रिफला के नाम से जाना जाता है जो सर्व रोगनाशक, रोग प्रतिरोधक और आरोग्य प्रदान करने वाली औषधि है। यह एक उच्च कोटि का रसायन भी है। इसे आयुर्वेद का पेन्सिलिन कहा जाय तो कोई अतिश्योक्ति न होगी। गरीब अमीर दोनों ही श्रेणी के व्यक्ति इसका सेवन आसानी से कर सकते है। यह एक इतनी सरल, सुलभ तथा चिकित्सा जगत में व्यापक रूप से प्रचलित औषधि है कि आयुर्वेदाचार्य इसका प्रयोग तत्काल करने लगते है। यह त्रिदोषनाशक है और इसमें दवाओं के भरपूर गुण पाये जाते है। स्वास्थ्य रक्षक, रोग निवारक तथा दीर्घायु प्रदान करने वाली अद्भुत सम्पदा है। इसमें शरीर से विजातीय तत्वों को निष्कासित करने की शक्ति है। रोगों से लडने की सामर्थ्य रखता है।
त्रिफला का निरंतर सेवन करने से कई तरह के रोगों से बचा जा सकता है। सिर के रोग, नेत्रा रोग, चर्म रोग, रक्त दोष, मूत्र रोग तथा पाचन संस्थान में तो यह रामबाण की भाँति कामकरता है। कब्ज को दूर करने में तो इसके मुकाबले कोई भी दवा कामयाब नहीं हो सकती।यह दुर्बलता को मिटाता और स्मृति को बढाता है। कई ग्रंथों में तो इसे कुष्ठनाशक भी सिद्ध किया है। त्रिफला का चूर्ण ओरल हेल्थ से संबंधित हर तरह की समस्या के लिए प्रयोग किया जा सकता है। यहां तक कि वैज्ञानिक भी इस पर अध्ययन कर चुके हैं। साथ ही इस बात की पुष्टि भी की जा चुकी है कि इसका सेवन करने से ओरल हेल्थ में सुधार हो सकता है। बता दें कि इस चूर्ण में एंटीकैरीज एक्टिविटी मौजूद होती है, जिसके जरिए दांतों को खराब होने से बचाया जा सकता है। इतना ही नहीं ब्रश करने के दौरान अगर मसूड़ों से खून निकलता है तो त्रिफला के चूर्ण का इस्तेमाल करने से इस समस्या से निजात पाई जा सकती है।आंखों के स्वास्थ्य के लिए भी त्रिफला चूर्ण का सेवन करना बेहद फायदेमंद साबित होता है। बता दें कि इसमें पौष्टिक तत्व मिनरल्स पाया जाता है। ऐसे में अगर आप रोजाना पानी के साथ इस चूर्ण का सेवन करेंगे तो ये टॉनिक के तौर पर आंखों में एक तरह का एंटीऑक्सीडेंट बढ़ाता है, जिसकी मदद से आंखों की रोशनी सही होने के साथ ही अन्य नेत्र रोगों से भी बचाव किया जा सकता है। त्रिफला का ये चूर्ण काफी लाभदायक साबित हो सकता है, क्योंकि इसका नियमित सेवन करने पर रक्त में मौजूद ब्लड ग्लूकोज का स्तर बेहद कम हो जाता है। जिसके चलते ये डायबिटीज जैसी खतरनाक बीमारी से आपको बचाता है।
आधुनिक विज्ञान में त्रिफला पर हुये शोध का निष्कर्ष भी यही है कि यह अनेक गैर.संचारी रोगों जैसे हृदय रोग, कैन्सर, मधुमेह, मनोरोग, श्वसन.तंत्र के रोगों आदि की रोकथाम में रसायन और औषधि के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। त्रिफला शरीर के ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हुये फ्री.रेडीकल स्केवेंजिंग तथा पीड़ा या प्रदाह कम करते हुये हमारे स्वास्थ्य की रक्षा करता है। वैज्ञानिक शोध के बाद लिखे गये कम से कम 250 शोधपत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि त्रिफला में अभी तक 174 बायोएक्टिव द्रव्य पाये गये हैं, हालांकि कुलद्रव्यों की संख्या 3500 से अधिक हो सकती है। डॉण् भूषन पटवर्धन और उनके साथी वैज्ञानिकों द्वारा त्रिफला नेटवर्क फार्माकोलॉजी का अध्ययन बताता है कि 31 प्रोटीन.लक्ष्यों के मॉडुलेशन के माध्यम से त्रिफला कम से कम 15 रोग प्रकारों और 74 रुग्णता.संकेतकों के विरुद्ध प्रभावी है। इनमे मुख्य रूप से एडॉप्टोजेनिक, इम्यूनोमोड्यूलेटर, एंटी ऑक्सिडेंट, ज्वरनाशक, एनाल्जेसिक, जीवाणुरोधी, अनेक प्रकार के कैंसर रोकने वाला, ट्यूमर.विकास.रोधी, एंटीम्यूटाजेनिक, घाव भरने, दन्तक्षयरोधी, तनावरोधी, अनुकूलक, हाइपोग्लिसीमिक, डायबिटीज रोधी, कीमोप्रोटेक्टिव, रेडियोप्रोटेक्टिव, कीमोप्रिवेंटिव, रेचक, भूखवर्धक, गैस्ट्रिक एसिडिटीरोधी जैसे कार्य.प्रभाव शामिल हैं।
त्रिफला का रसायन के रूप में प्रभाव डालने की प्रक्रिया मुख्य रूप से फ्री.रेडीकल स्केवेंजिंग तो है ही, साथ ही एंटी.ऑक्सीडेंट एंजाजाइम्स को बढ़ावा देना, लिपिडपेरोक्सीडेशन को रोकना, पीड़ाशामक, स्नायु.तंत्र का कायाकल्प आदि भी होते हैं। त्रिफला में हाल के आंकड़े बताते हैं कि त्रिफला और इसकी घटक प्रजातियों को आज तक प्रकाशित जिन 12,256 शोधपत्रों में संदर्भित किया गया है, उनमें से 6030 शोधपत्र ऐसे हैं जिनमें कोई भारतवासी शोधकर्ता नहीं है। यही हाल त्रिकटु का है। त्रिकटु और इसकी घटक प्रजातियों और द्रव्यों को आज तक प्रकाशित जिन 15,594 शोधपत्रों में संदर्भित किया गया है, उनमें से 11,104 शोधपत्र ऐसे हैं जिनमें कोई भारतवासी शोधकर्ता नहीं है। परंतु इस सबके बावजूद यह भी एक सत्य है कि छक्के छूट जाते हैं आतुर को भरोसा दिलाने में कि त्रिफला कब्ज की दवा का चूरन नहीं, एक श्रेष्ठतम रसायन है।
जीवन भर स्वस्थ रहना चाहतेहैं तो प्रमाण.आधारित बात यह है कि ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इनफ्लेमेशन के निरापद प्रबंध के लिये आयुर्वेद की रसायन चिकित्सा से बेहतर कोई और चिकित्सा पद्धति विश्व में ज्ञात नहीं है। आज के समय में आयुर्वेदाचार्यो की सेवा बाज़ार में गौण हो जाती है। स्वाइन फ्लूए चिकनगुनियाए डेंगू आदि रोगों से बाज़ार और एलोपैथिक प्रतिष्ठानों ने चांदी कूट ली। जबकि वास्तव में काढ़े में उलझे आयुर्वेदाचार्यों की मेहनत ने बहुतों को इस बीमारी से मुक्त किया। कुल मिलाकर जनमानस में त्रिफला के बारे में जो धारणा बनी हुई है कि यह केवल पाचन.तंत्र के रोगों को ठीक करता हैए सही नहीं है। वस्तुतः आयुर्वेद में औषधि या रसायन सर्वप्रथम अग्नि को सम करता है जिसे हम सब प्रायः शीघ्रता से अनुभव कर लेते हैं। त्रिफला की उपयोगिता आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययनों में भी प्रमाणित हो जाने के बावज़ूद आयुर्वेदाचार्य त्रिफला के प्रयोग में प्रायः नेत्र, खालित्य, पालित्य व कब्ज से आगे नहीं बढ़ते। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि आयुर्वेद की संहिताओं एवं आधुनिक विज्ञान के इन.वाइवो, इन.वाइट्रो एवं कई क्लीनिकल ट्रायल्स में त्रिफला को अनेक रोगों से बचाव एवं उपचार में लाभकारी पाया गया है। हालांकि त्रिफला पर आगे अध्ययन की आवश्यकता तो है, किंतु 250 से अधिक उच्चकोटि के वैज्ञानिक शोधपत्रों का निष्कर्ष यही सिद्ध करता है कि त्रिफला भोजन, रसायन एवं औषधि तीनों ही रूपों में महत्वपूर्ण द्रव्य है भारत में एक लोकप्रिय कहावत है, माँ नहीं है। यदि आपके पास त्रिफला है, तो आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं हैष् इसका सार यह है कि जिस तरह माँ अपने बच्चों की देखभाल करती हैए उसी तरह त्रिफला शरीर के आंतरिक अंगों की देखभाल कर सकता है। त्रिफला की तीनों जड़ीबूटियाँ आंतरिक सफाई को बढ़ावा देती हैं, जमाव और अधिकता की स्थिति को कम करती हैं तथा पाचन एवं पोषक तत्वों के सम्मिलन को बेहतर बनाती हैं। उत्तराखंड में आंवला बहेड़ा त्रिफला हरड़ त्रिफला काफी में मिलते हैं पर दिशा में अभी तक कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।

Share45SendTweet28
Previous Post

पेड़ के पीछे छिपा था तस्कर पुलिस ने दबोचा

Next Post

डीएफओ ने दो वन कर्मियों को निलंबित किया, अवैध पातन के खिलाफ एक्शन लेने के निर्देश

Related Posts

उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं के लिए प्रदान की ₹ 44.64 करोड की वित्तीय स्वीकृति

March 12, 2026
4
उत्तराखंड

सरकारी योजनाओं को पलीता, बड़ी समस्या

March 12, 2026
7
उत्तराखंड

उत्तराखंड में पलायन बनी समस्या

March 12, 2026
4
उत्तराखंड

दून पुस्तकालय में मराठी नाट्य परंपरा पर व्याख्यान

March 12, 2026
9
उत्तराखंड

बोर्ड परीक्षा केंद्रों का अधिकारियों ने किया निरीक्षण धारचूला में अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई

March 12, 2026
8
उत्तराखंड

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हजारों महिलाओं ने उमंग व हर्षोल्ला के साथ संस्कृति कार्यक्रम में किया प्रतिभाग

March 12, 2026
30

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67662 shares
    Share 27065 Tweet 16916
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45773 shares
    Share 18309 Tweet 11443
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38047 shares
    Share 15219 Tweet 9512
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37436 shares
    Share 14974 Tweet 9359
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37324 shares
    Share 14930 Tweet 9331

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं के लिए प्रदान की ₹ 44.64 करोड की वित्तीय स्वीकृति

March 12, 2026

सरकारी योजनाओं को पलीता, बड़ी समस्या

March 12, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.