गैरसैंण। गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान के युवा संयोजक और प्रमुख रणनीतिकार सैनिक शिरोमणी मनोज ध्यानी सप्ताह भर से लगातार गैरसैंण क्षेत्र के गांवों का गहन क्षेत्र भ्रमण कर क्षेत्र में डगमगाती लचर चिकित्सा व्यवस्था जैसे जन पक्षीय मुद्दों को लेकर आम जन मानस से विचार विमर्श कर अभियान को गति दे रहे हैं।
इस दौरान उन्होंने कहा कि उनका संगठन उत्तराखंड की स्थाई एवं पूर्णकालिक राजधानी गैरसैंण को बनाने के लिए क्रियाशील एवं प्रयासरत है और जन संगठन गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान आवश्यक जन पक्षीय मुद्दों को आम जनमानस के संज्ञान में लाकर शासन प्रशासन से अविलंब कार्यवाही करने के लिए अपेक्षित है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से 18 अगस्त 2020 को खनसर घाटी के कंडारीखोड़ गांव की हीरा देवी की सीएचसी गैरसैंण में अस्पताल की लचर व्यवस्था के चलते मृत्यु होना, 23 सितंबर 2020 को प्रसूता गणेशी देवी को रैफर करने के बाद एक किलोमीटर दूरी पर 108 में प्रसव हो जाना, गैरसैंण में ही ट्रक की टक्कर से घायल को इलाज में विलंब होने पर भाजपा मंडल अध्यक्ष द्वारा समय से समुचित इलाज मुहैया कराने की पुकार लगाने पर उन्हें जेल भेज दिया जाना आदि अनेकों घटनायें उत्तराखंड में चिकित्सा व्यवस्था उत्तराखंड को शर्मसार कर रही है। कहा कि टैली मेडीसीन, मेडीकल एअरलिफ्ट की कोरी घोषणाऐं बन कर रह गई है।
पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पतालों में आईसीयू, अल्ट्रासाउंड, सिटीस्कैन, एक्सरे, वेन्टीलेटर एवं ऑक्सीजन उपकरण आदि की पूर्णतया अभाव है। उनका संगठन का कहना है कि सरकार शब्दों की बाजीगरी से बाहर निकल कर उत्तराखंड के आम जनमानस और सामाजिक और राजनैतिक कार्यकर्ता जो भी जन हित में स्वास्थ्य सुविधाओं की सुधार की बात करें तो उसे गंभीरता पूर्वक सुनते हुए निवारण करें। कहा कि राज्य निर्माण के 20 साल बीत जाने पर भी सरकारें गढ़.कुमाओं की जनता को सुलभ चिकित्सा मुहैया
कराने में सरकारें पूरी तरी विफल रही हैं। वर्तमान में बदत्तर होती चिकित्सा हालात पर उपज रहा असंतोष भविष्य में किसी बड़े जनाक्रोस में परिवर्तित न हो जाय इसके लिए वह सरकार व शासन को चेता रहे हैं। इस दौरान पदाधिकारियों ने मठकोट, पज्याणा, ढांगा, डुंग्री, कोठार, गांवली, धुनारघाट, गडोली आदि दर्जनों गांवों का भ्रमण किया।











