• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

बबूल की छाल एक्जिमा के उपचार के लिए कारगर

25/07/20
in उत्तराखंड, हेल्थ
Reading Time: 1min read
651
SHARES
814
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
बबूल या कीकर वानस्पतिक नामः आकास्या नीलोतिका, अकैसिया प्रजाति का एक वृक्ष है। यह अफ्रीका महाद्वीप एवं भारतीय उपमहाद्वीप का मूल वृक्ष है।बबुल का पेड़ जिसे स्थानीय भाषा में देशी कीकर कहा जाता है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार इस पेड़ में भगवान विष्णु का निवास माना जाता है। प्राचीन समय में इस पेड की पूजा की जाती थी । इस पेड़ को काटना महापाप माना जाता है। जिस जगह यह पेड होता है वह जगह अत्यंत शुभ मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में यह पेड़ पाया जाता है कि वह घर हमेशा धन धान्य से परिपूर्ण रहता है।
यह पेड़ एक मात्र पश्चिमी राजस्थान में पाया जाता है इस पेड़ की गिनती दुर्लभ क्षेणी में होती है। बबूल का गोद औषधीय गुणों से भरपूर होता है तथा अनेक रोगों के उपचार में काम आता है बबूल की हरी पतली टहनियां दातून के काम आती हैं। बबूल का गोद उतम कोटि का होता है जो औषधीय गुणों से भरपूर होता है तथा सेकडो रोगों के उपचार में काम आता है। बबूल की दातुन दांतों को स्वच्छ और स्वस्थ रखती है। बबूल नाम से एक टूथ पेस्ट भी आता है और यह एक पेड़ का नाम भी है जिसे कीकर के नाम से भी जाना जाता है। आपको शायद पता होगा कि बबूल का पेड़ एक औषधि के रूप में काम करता है जो हमारी कई शारीरिक परेशानी व हमें कई बिमारी से बचाता है, जैसे आयरन कि कमी न होने देना, दांतों के लिए लाभदायक, सूजन व दर्द को भी ठीक कर देता है बबूल की लकड़ी का कोयला भी अच्छा होता है।
हमारे यहां दो तरह के बबूल अधिकतर पाए और उगाये जाते हैं। एक देशी बबूल जो देर से होता है और दूसरा मासकीट नामक बबूल। बबूल लगा कर पानी के कटाव को रोका जा सकता है। जब रेगिस्तान अच्छी भूमि की ओर फैलने लगता है, तब बबूल के जगंल लगा कर रेगिस्तान के इस आक्रमण को रोका जा सकता है। हमारे भारत में कई एेसे औषधिय पेड़.पौधें है जिनका प्रयोग औषधिय दवाईयों में किया जाता है। उन्ही में एक है बबूल का पेड़।
बबूल जिसे कीकर के नाम से भी जाना जाता है। यह एक कांटेदार पेड़ है जिसकी पत्ती, टहनी, गोंद और छाल सभी औषधीय रूप में उपयोग किया जाता है। हमारे भारत में दो तरह के बबूल पाए जाते हैं। एक देशी बबूल दूसरा मासकीट बबूल है। बबूल की लकड़ी बहुत मजबूत होती है। सम्पुरण भारत में पाया जाने वाला एक कांटेदार वृक्ष होता है कीकर के पेड़ से हम सभी परिचित है क्योकि आज भी भारत के गाँवो में यह दन्त मंजन का एक बेहतरीन विकल्प है और शहरों में भी इससे मंजन करने वालो की कमी नहीं, जो इसके फायदे जानते है। बबूल कीकर की दो प्रजातीय है एक देसी बबूल और दूसरी मासकित बबूल भारत के रेगिस्तान राजस्थान में यह बहुतायत से पाया जाता है।
भारत सरकार ने रेगिस्तान को बढ़ने से रोकने के लिए राजस्थान में इसके जंगल लगाये थे जो आज भी रेगिस्तान को बढ़ने से रोकते हैं। पर्यावरण को सुधरने में बबूल कीकर का अच्छा सहयोग है। एक कहावत बबूल के बारे में और प्रचलित है कहते हैं कि ष्बबूल.बबूल पैसे वसूलष् अर्थात् खाकर भी और बाह्य उपयोगों से भी यह लाभदायक हैद्य इसकी छाल का काढ़ाए पत्तियों की लुगदीए फली का चूर्णए कोमल हरी शाखाएँ और गोंद सभी का वैज्ञानिक एवं चिकित्सा दृष्टि से महत्व है। रासायनिक संगठन की दृष्टि से फली में 12 से लेकर 20 प्रतिशत टेनिन पाया जाता हैद्य छाल में 7 से 12 प्रतिशत कषाय रस कड़वा प्रधान रसायन होते हैं। सामान्य तौर पर व्यवसायिक दृष्टि से बबूल का गोंद मार्च से मई माह के मध्य इकट्ठा किया जाता है। यह गोंद पानी में घुलनशील होता है। इसमें गेलेक्टो अरेबन होता है। इसे जलाने पर 1.8: राख प्राप्त होती हैद्यबबूल के पत्तो के अलावा इसकी गोंद और छाल भी बहुत फायदेमंद होती है। बबूल कफ और पित्त का नाश करने वाला होता है और इसकी गोंद में भी कैल्शियमए मैग्नीशियम और पोटेशियम के अलावा अरबिक एसिड होता है। बाबुल के पेड़ की छाल और पत्तियों में टैनिन और गैलिक नामक एसिड होता है जिसके कारण इसका स्वाद कड़वा हो जाता है। यह जलन को दूर करने वाला, घाव को भरने वाला और रक्तशोधक होता है बाबुल के पेड़ के विभिन्न भागों का उपयोग डायरिया के लिए भी किया जाता है।

Share260SendTweet163
Previous Post

बच्चों को स्वर्णप्राशन कराने से बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

Next Post

अमर शहीद श्रीदेवसुमन की पुण्यतिथि पर पौधरोपण

Related Posts

उत्तराखंड

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बोले, केदारनाथ से कन्याकुमारी तक बाहर होंगे घुसपैठिया

March 7, 2026
7
उत्तराखंड

गार्गी उनियाल ने भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग अफसर बनकर प्रदेश व क्षेत्र का नाम का रोशन किया

March 7, 2026
7
उत्तराखंड

एसिड अटैक ने आंखें छीनीं हौसला नहीं आज सैकड़ों महिलाओं की ‘रोशनी’ बनीं कविता बिष्ट

March 7, 2026
7
उत्तराखंड

गंगा-यमुना का यह पहला संगम लोगों की नजरों से ओझल है

March 7, 2026
6
उत्तराखंड

पहाड़ की प्रतिभा किसी से कम नहीं

March 7, 2026
7
उत्तराखंड

पिरूल हस्तशिल्प’ की शुरुआत उत्तरखंड

March 7, 2026
6

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67662 shares
    Share 27065 Tweet 16916
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45773 shares
    Share 18309 Tweet 11443
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38046 shares
    Share 15218 Tweet 9512
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37436 shares
    Share 14974 Tweet 9359
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37324 shares
    Share 14930 Tweet 9331

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बोले, केदारनाथ से कन्याकुमारी तक बाहर होंगे घुसपैठिया

March 7, 2026

गार्गी उनियाल ने भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग अफसर बनकर प्रदेश व क्षेत्र का नाम का रोशन किया

March 7, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.