निजी लैब की धांधली का मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान
देहरादून। उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग ने कोरोना जांच में जनता के साथ धोखा करने वाली निजी लैब की मनमानी का संज्ञान लिया है। अखबारों में छपी खबरों का संज्ञान लेते हुए आयोग ने निजी लैब की इस कार्यप्रणाली को जनता के साथ बहुत बड़ा धोखा करार दिया है। आयोग ने कहा है कि यह पैसा कमाने का धंधा है। आयोग ने प्रमुख सचिव स्वास्थ एवं जिलाधिकारी देहरादून को नोटिस भेजकर पंद्रह दिन में जांच करने के आदेश दिए हैं। इस मामले की सुनवाई अब 14 अक्टूबर को तय की गई है।
20 सितंबर 2020 को अखबारों में छपी खबरों का मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। जिसमें निजी लैब में 55 प्रतिशत जांच रिपोर्ट पाजिटिव पाई गई हैं। दैनिक समाचार पत्रों में 20 सितंबर 2020 को प्रकाशित खबरों में निजी लैब की लूट और झूठ का चिट्ठा खोला गया है। जिसमें यह बात भी सामने आई है कि निजी लैब में जिन लोगों की रिपोर्ट पाजिटिव आई है, सरकारी एजेंसी से उन्हीं लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। रिपोर्ट पाजिटिव आने पर अधिक फीस मिलने के प्रावधान की वजह से निजी लैब इसका लाभ उठा रहे थे।
आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए निजी लैब के इस अमानवीय धंधों पर रोक लगाने की पहल की है। आयोग का कहना है कि यह बहुत बड़ी अनियमितता है। जो लोग वास्तव में निगेटिव हैं, उनकी रिपोर्ट पाजिटिव दिखाकर एक साथ कई लोगों को परेशान किया जा रहा है। पाजिटिव पाए गए व्यक्ति के परिजन तथा संपर्क में आए लोगों को आइसोलेट करना, उनका इलाज समेत तमाम तरह की अनियमिताएं हुई हैं। यह बहुत गंभीर मामला है, इसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। इसलिए आयोग ने शासन तथा जिला प्रशासन को पंद्रह दिनों में जांच कर रिपोर्ट सौंपने का कहा गया है।









