देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पता चला है कि उनके कार्यालय के किसी अधिकारी के दबाव में पत्रकार शिव प्रसाद सेमवाल के खिलाफ पुलिस कार्यवाही की गई है। मुख्यमंत्री के निजी सचिव हेमचंद्र भट्ट ने एसएसपी देहरादून को पत्र लिखकर इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय को तत्काल अवगत कराने को कहा है कि किन परिस्थितियों में ऐसा हुआ है। मुख्यमंत्री कार्यालय के किसी अधिकारी या अन्य किसी के दबाव में की गई कार्यवाही के संबंध में अलग से गोपनीय रूप से आख्या प्रस्तुत करने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री ने पत्रकार शिव प्रसाद सेमवाल के खिलाफ की गई इस कार्यवाही को दुर्भाग्यपूर्ण कहा है। उनके निजी सचिव हेम चंद्र भट्ट द्वारा एसएसपी देहरादून को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री को पत्रकार की गिरफ्तारी की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण कहते हुए उद्धृत किया गया है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री के संज्ञान में आया है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के किसी अधिकारी के दबाव में पत्रकार पर यह कठोर कार्यवाही की गई है। इसीलिए एसएसपी देहरादून को उस अधिकारी के बारे में जानकारी जुटाकर गोपनीय आख्या तुरंत देने को कहा गया है।
दरअसल पत्रकार की कड़ी धाराओं में गिरफ्तारी को उत्पीड़न बताते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय तक इसकी शिकायत पहुंचाई गई है। संभवतः दिल्ली से पूछे गए सवाल के जबाव में मुख्यमंत्री कार्यालय इस प्रकरण में सक्रिय हुआ है। इस मामले में खास बात यह है कि जिस व्यक्ति द्वारा दर्ज की गई रिपोर्ट पर पत्रकार के खिलाफ रंगदारी की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है, वह एक विवादित व्यक्ति बताया गया है। उसके कई आडियो इस दौरान सामने आए हैं, जिनसे उस व्यक्ति का चरित्र उजागर होता है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत यह बात कह चुके हैं कि नीरज राजपूत नाम का कोई व्यक्ति उनके कार्यकाल में दर्जाधारी राज्यमंत्री के पद पर आसीन नहीं था। यह बात भी सामने आ रही है कि एक साजिश के तरह पत्रकार को फंसाया गया है। सहसपुर थाने में भी उस व्यक्ति का प्रभाव बताया जाता है।
एक ऐसे विवादित व्यक्ति की शिकायत पर पत्रकार के खिलाफ कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज करने और फिर गिरफ्तार करने की शिकायत जब दिल्ली प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंची तो इस बारे में राज्य सरकार से पूछा गया है। इस व्यक्ति की शिकायत एसएसपी तक पहुंची थी, लेकिन एसएसपी से मिलने गए कुछ पत्रकारों को एसएसपी ने बताया था कि शिकायत मिलने के बावजूद उसके खिलाफ कार्यवाही इसलिए नहीं की गई, क्योंकि शिकायत डाक से पहुंची थी। एसएसपी का यह तर्क भी समझ से परे था। ऐसा लग रहा था कि वह भी कहीं न कहीं से दबाव में थे।
मुख्यमंत्री ने शिव प्रसाद सेमवाल के विरूद्ध पंजीकृत मुकदमे की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश भी दिए हैं। एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने डिप्टी एसपी लोकजीत के नेतृत्व में मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है।












