• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

अलसी के तेल में ब्लड प्रेशर और कलेस्ट्रॉल का तोड़

21/07/20
in उत्तराखंड, हेल्थ
Reading Time: 1min read
215
SHARES
269
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
अलसी या तीसी समशीतोष्ण प्रदेशों का पौधा है। रेशेदार फसलों में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। इसके रेशे से मोटे कपड़े, डोरी, रस्सी और टाट बनाए जाते हैं। इसके बीज से तेल निकाला जाता है और तेल का प्रयोग वार्निश, रंग, साबुन, रोगन, पेन्ट तैयार करने में किया जाता है। चीन सन का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। रेशे के लिए सन को उपजाने वाले देशों में रूस, पोलैण्ड, नीदरलैण्ड, फ्रांस, चीन तथा बेल्जियम प्रमुख हैं और बीज निकालने वाले देशों में भारत, संयुक्त राज्य अमरीका तथा अर्जेण्टाइना के नाम उल्लेखनीय हैं। सन के प्रमुख निर्यातक रूस, बेल्जियम तथा अर्जेण्टाइना हैं। तीसी भारतवर्ष में भी पैदा होती है।
लाल, श्वेत तथा धूसर रंग के भेद से इसकी तीन उपजातियाँ हैं। इसके पौधे दो या ढाई फुट ऊँचे, डालियां बंधती हैं, जिनमें बीज रहता है। इन बीजों से तेल निकलता है, जिसमें यह गुण होता है कि वायु के संपर्क में रहने के कुछ समय में यह ठोस अवस्था में परिवर्तित हो जाता है। विशेषकर जब इसे विशेष रासायनिक पदार्थो के साथ उबला दिया जाता है। तब यह क्रिया बहुत शीघ्र पूरी होती है। इसी कारण अलसी का तेल रंगए वारनिश और छापने की स्याही बनाने के काम आता है। इस पौधे के एँठलों से एक प्रकार का रेशा प्राप्त होता है जिसको निरंगकर लिनेन एक प्रकार का कपड़ा बनाया जाता है। तेल निकालने के बाद बची हुई सीठी को खली कहते हैं, जो गाय तथा भैंस को बड़ी प्रिय होती है। इससे बहुधा पुल्टिस बनाई जाती है। आयुर्वेद में अलसी को मंदगंधयुक्त, मधुर, बलकारक, किंचित कफवात.कारक, पित्तनाशक, स्निग्ध, पचने में भारी, गरम, पौष्टिक, कामोद्दीपक, पीठ के दर्द ओर सूजन को मिटानेवाली कहा गया है।
गरम पानी में डालकर केवल बीजों का या इसके साथ एक तिहाई भाग मुलेठी का चूर्ण मिलाकर, क्वाथ काढ़ा बनाया जाता है, जो रक्तातिसार और मूत्र संबंधी रोगों में उपयोगी कहा गया है। युनानी में वैद्य अंतर्गत जखमो पर बीजों का सेवन करने के लिए कहा जाता है। तो इन बीजों का गजकर्णादी उपयोग त्वचारोगो पर बाह्योपचार से करते हैं। चूना में मिलाकर तेल लगाने से त्वचा जली तो यह फायदेमंद उपाय है। अलसी में ओमेगा.३ इस मेदाम्ल का अनुपात लगभग ५८ प्रतिशत है। इस कारण हृदय को रक्त पहुंचाने वाली वाहिन्या अकु़चित होती नहीं अलसी यह रक्त के कॉलेस्टेरॉल का प्रमाण ९ से १८ प्रतिशत कम करती है। औषधि के तौर पर प्रयोग में आने वाले अलसी के तेल का अब सेवन भी किया जा सकता है। चमत्कारी गुणों से भरपूर यह तेल हृदय और मस्तिष्क से जुड़े रोगों के लिए अमृत जैसा काम करता है। कई वर्षों के जटिल शोध के बाद देश के प्रतिष्ठित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने अलसी के तेल को खाने लायक बनाया है। कृषि और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों की इस खोज को एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सेहतमंद रहने और याद्दाश्त बढ़ाने के लिए अलसी के बीज का सेवन करने की सलाह डॉक्टर भी देते हैं। मगर अलसी का तेल खाने के तमाम तेलों से कहीं ज्यादा गुणकारी है।
स्वास्थ्यवर्धक खाद्य तेल के रूप में जैतून के तेल के गुणों से तुलना करें तो उसमें भी अलसी किसी मायने में कम नहीं हैण् देश के वैज्ञानिकों ने अलसी के तेल के इसी गुण को पहचानकर एक ऐसी प्रजाति विकसित की है, जिसका उपयोग खाने का तेल के रूप में बड़े पैमाने पर किया जा सकता है। अलसी की नई प्रजाति टीएल-99 देश के अग्रणी शोध संस्थान भाभा परमाण अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने विकसित की है और इसके गुणों का परीक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद आईसीएआर के विशेषज्ञों ने किया है। आईसीएआर के कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि अलसी के तेल में लिनोलेनिक एसिड ज्यादा 35 फीसदी से अधिक होने कारण यह खुले में ऑक्सीकृत हो जाता है। जिससे इस तेल को ज्यादा दिनों तक रखना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि खाने के तेल के रूप इसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो पाया। अलसी में ओमेगा-3 वसा अम्ल, मैग्नीशियम और विटामिन.बी पाया जाता है, इसीलिए डॉक्टर याददाश्त बढ़ाने के लिए इसका सेवन करने की सलाह देते हैं।
देश में पिछले फसल वर्ष में अलसी का उत्पादन 1.59 लाख टन था, जबकि आगामी रबी सीजन में सरकार ने इसका उत्पादन बढ़ाकर 2.03 लाख टन करने का लक्ष्य रखा है। आने वाले वर्षो में टीएल-99 प्रजाति का उत्पादन शुरू होने के बाद देश में खाने के तेल के तौर पर अलसी के तेल का उपयोग बढ़ेगा तो किसान इसकी खेती में और ज्यादा दिलचस्पी लेंगे, जिससे इसका उत्पादन भी बढ़ेगा। उत्तराखंड सरकार ने भी राज्यभर में लौटे राज्य के मजदूरों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने की मुहिम में जुट चुकी है। इसका मकसद उत्तराखंड के उद्यमशील युवाओं और कोरोना की वजह से राज्य में लौटे प्रवासी कामगारों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है। पर अभी भी काश्तकारों के मन में डर है कि जब तक हमें बाजार उपलब्ध नहीं होता तब तक हम ये काम शुरू भी कर लें तो कोई लाभ हमें दिखाई नहीं देता।
देश.दुनिया में आज बहुउपयोगी तिलहन पर पूरा जोर है। यही कारण भी है कि दुनिया में बहुउपयोगी तिलहन सेक्टर एक बड़े उद्योग के रूप में उभरा है। इस लिहाज से देखें तो उत्तराखंड में अलसी खेती की अपार संभावनाएं हैं साथ ही बच्चों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया जाएगा। उत्तराखण्ड में ही सौ से भी अधिक ऐसी इकाइयाँ हैं, जो आयुर्वेदिक दवाइयाँ औषधीय पौधों से ही तैयार करती हैं। प्रोत्साहित के प्रयास से किसानों, उत्पादकों और व्यापारियों निर्यातकों को बेहतरीन अवसर मुहिम में जुट चुकी है पारंपरिक खेती की बजाय बहुउपयोगी तिलहन पौधों की खेती करने में कम खर्च में अधिक आमदनी तो होती है। देसी घी, कच्ची मूंगफली, सूरजमुखी, सरसों के तेल, राजमा और समुद्री मछली में ओमेगा-3 काफी मात्रा में होता है। नदियों में प्रदूषण बढ़ने के कारण स्थानीय मछलियों में अब उतना ओमेगा-3 नहीं रहा लेकिन समुद्री मछलियों में अब भी ओमेगा-3 की मात्रा ज्यादा होती है। अगर सब ठीक.ठाक रहा तो इस योजना के तहत उत्तराखंड को देश में बहुउपयोगी तिलहन राज्य की पहचान मिलने की प्रबल संभावना है।

Share86SendTweet54
Previous Post

मिनी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने दी आंदोलन की चेतावनी

Next Post

टांगा गांव में पांच शव मिले, छह अभी भी लापता

Related Posts

उत्तराखंड

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने परमार्थ निकेतन में 38वें अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में किया प्रतिभाग

March 13, 2026
5
उत्तराखंड

करोड़ों खर्च, फिर भी क्यों प्रदूषित हो रहा है जल

March 13, 2026
5
उत्तराखंड

डोईवाला डिग्री कॉलेज में 16 मार्च को लगेगा रोजगार मेला

March 13, 2026
8
अल्मोड़ा

150 टेट्रा पैक अवैध देसी शराब के साथ महिला तस्कर गिरफ्तार

March 13, 2026
5
उत्तराखंड

डोईवाल: तस्कर के कब्जे से 06.10 ग्राम अवैध स्मैक बरामद

March 13, 2026
10
उत्तराखंड

महंत इन्दिरेश अस्पताल में विश्व किडनी दिवस पर किडनी बचाने का लिया गया संकल्प

March 13, 2026
15

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67662 shares
    Share 27065 Tweet 16916
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45773 shares
    Share 18309 Tweet 11443
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38047 shares
    Share 15219 Tweet 9512
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37436 shares
    Share 14974 Tweet 9359
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37324 shares
    Share 14930 Tweet 9331

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने परमार्थ निकेतन में 38वें अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में किया प्रतिभाग

March 13, 2026

करोड़ों खर्च, फिर भी क्यों प्रदूषित हो रहा है जल

March 13, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.