देहरादून। मौका था मसूरीगोलीकांड के शहीदों को शहीद स्थल झूलाघर पर श्रद्धांजलि देने का। इस दौरान उत्तराखंड आंदोलन के एक बड़े नेता पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा के जौलग्रांट अस्पताल में निधन की सूचना भी आ गई। मंच पर मौजूद सत्ताधारी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और मसूरी विधायक गणेश जोशी समेत तमाम नेता जब इस अवसर पर बोले तो उत्तराखंड राज्य प्राप्ति के लिए लड़े गए आंदोलन के अग्रिम पंक्ति के नेता रणजीत सिंह वर्मा को श्रद्धांजलि देने तक की उन्हें फुर्सत तक नहीं मिली। उनका मत था कि अब सत्ता मिली है तो शोक मनाने की जरूरत नहीं है, उसका लुत्फ उठाने की जरूरत है। शायद राज्य आंदोलन में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले रणजीत सिंह वर्मा को वे जानते भी नहीं थे। यही उत्तराखंड की विडंबना है, राज्य की लड़ाई लड़ने वाले दरकिनार होते चले गए, सत्ता की मलाई खाले वाले उत्तराखंड के सर्वेसर्वा हो गए।
शहीद स्थल पर मसूरीगोलीकांड की बरसी पर मेला और नाच गाने का इप्टा ने विरोध किया। इस संबंध में पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता त्रिलोचन भट्ट की वाह्टएप पोस्ट यह टिप्पणी सटीक जान पड़ती है। त्रिलोचन भट्ट के ही शब्दों में-
रणजीत सिंह वर्मा को नहीं जानते सांसद अजय भट्ट और विधायक गणेश जोशी
पहले एक दुखद समाचार
उत्तराखंड आंदोलन में स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी के बाद दूसरा बड़ा व सर्वमान्य चेहरा रहे श्री रणजीत सिंह वर्मा का आज सुबह जौलीग्रांट अस्पताल में निधन हो गया है। उनकी पार्थिव देह को उनके निवास स्थान पर पहुंचा दिया गया है। कल सुबह 10रू00 बजे लक्खीबाग श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार होगा। उससे पहले संभवतरू अंतिम दर्शन के लिए उन्हें कुछ देर के लिए कचहरी स्थित शहीद स्थल पर रखा जाएगा।
वर्मा जी के निधन की सूचना भाई जयदीप सकलानी के मोबाइल पर उस समय आईए जब हम मसूरी गोली कांड की 25वीं बरसी मनाने के लिए मसूरी स्थित शहीद स्थल पर इकट्ठा थे। जब हम लोग जनगीत गाते हुए शहीद स्थल पहुंचेए तो सांसद अजय भट्ट और मसूरी विधायक गणेश जोशी सहित बीजेपी और कांग्रेस के कई नेता वहां मौजूद थे। भाषणबाजी चल रही थी और नाच गाने का कार्यक्रम भी तय था। शहीदों के नाम पर इस तरह की अशोभनीय हरकतों का हमें विरोध करना थाए और हमने किया।
वर्मा जी के निधन का समाचार मिला तो भाई जयदीप सकलानी ने माइक से यह सूचना दी। इसके तुरंत बाद गणेश जोशी बोलने के लिए आये। लेकिनए विधायक साहब के मुंह से यूपी के जमाने में इसी मसूरी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके अपने पूर्ववर्ती विधायक के सम्मान में एक बोल तक नहीं निकला।
इसके बाद सांसद अजय भट्ट जी बोले। पर उत्तराखंड के नाम पर राजसत्ता भोग रहे सांसद महोदय ने भी शायद रणजीत सिंह वर्मा का नाम कभी सुना नहीं था। शहीद स्थल पर नाच गाने और कुर्सियां हथियाने के इनके लालच की हमने जिस तरह धज्जियां उड़ाई थीए उससे शायद उन्हें मिर्ची जरूर लगी। इसीलिए तो उन्होंने हमारे विरोध को यह कहकर खारिज किया कि जिन्हें शहीद होना थाए वे हो गए अब तो यह अवसर मेलों का है।
श्रीमान अजय भट्ट जी आपको इतना जरूर बताना चाहूंगा कि शहीदों की चिताओं पर जो मेले लगते हैंए वे ऐसे नहीं होते जैसे आप सजा के बैठे हैं। वे दूसरी तरह के मेले होते हैं। और साहब वर्मा जी के निधन की सूचना मिलने के बाद आप एक शब्द उनके सम्मान में कह देते तो वह सम्मान वर्मा जी का नहींए आपका खुद का होता।
वर्मा जी ने उत्तराखंड आंदोलन पूरी संजीदगी के साथ लड़ा। संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष रहे। लेकिनए राज्य मिलने के बाद उन्होंने तय किया कि अब राजनीति नहीं करेंगे। शायद उन्हें पता था कि आने वाला दौर राजनीतिज्ञों का नहीं लंपटों का है।









