फोटो- ओलाबृष्टि ने दागदार किया सेब की फसल को ।
प्रकाश कपरूवाण
जोशीमठ। कोरोना काल की जर्जर आर्थिकी से उबरने का एक मात्र सहारा बागवानी से जुडे काश्तकारों की उम्मीदों पर ओलाबृष्टि ने पानी फेरा। लहलहाती सेब की फसल को ओलों ने दागदार कर दिया है। जिसके कारण इस वर्ष सेब की फसल के मंडी तक पंहुचने के आसार भी नहीं रह गए हैं।
सीमांत विकास ख्ंाड जोशीमठ नगदी फसलों की बेहतरीन पैदावार के लिए जाना जाता रहा हैं, लेकिन विगत वर्षो में जंगली जानवरों व मौसम की मार के कारण सीमांत कृषकों ने नगदी फसलों राजमा, चैलाई, आलू आदि की फसलों से हाथ पीछे खींचना शुरू कर दिया लेकिन बागवानी के क्षेत्र से लोगांे की उम्मीदें अभी भी लगी है। हाॅलाकि लंगूर सेब के पेडों की छाल तक निकाल कर चट कर जा रहे हैं। लेकिन सेब के बगीचांे की देखभाल करने वाले जागरूक बागवान लंगूरो से बगीचों को भी बचा रहे है।
इन सबके बावजूद मौसम की मार के आगे बागवानी में लगे काश्तकार भी लाचार ही नजर आ रहे हैं।
गत वर्ष नवंबर-दिसबंर महीने से लेकर इस वर्ष के मार्च तक हुई जोरदार बर्फबारी के बाद सेब की फसल बहुत ही सुदर हो रखी थी। और पूरे क्षेत्र में सेब के बाग लहलहा रहे थे कि अचानक हुई भीषण ओलाबृष्टि ने सेब की फसल को बर्बाद करके रख दिया। ओला बृष्टि का आलम यह था कि बगीचो मे फलो का दागदार तो किया है। खेतो मे अन्य सब्जियों की फसल को भी चैपट कर दिया। सेबो मे लगे ओलों के बडे-बडे दागों ने इस वर्ष सेब के काश्तकारों को झकझोर कर रख दिया । कोरोना महामारी के कारण विगत तीन महीनों से विना किसी अन्य रोजगार के इन काश्तकारेां को उम्मीद थी कि अच्छी सेब की फसल से उनके कोरोना काल के नुकसान की भरपाई के साथ ही वर्षभर के गुजर-बसर का जुगाड तो हो ही जाऐगा, लेकिन ओलों ने इनकी उम्मीदों पर ही पानी फेर दिया है।
अब सेब उत्पादक किसानों के पास सरकारी मुवावजा तथा जिन लोगो ने फसल बीमा कराया हैं सर्वेक्षण के उपरंात वीमा की रकम का इंतजार करने के अलावा कोई और चारा भी नही बचा है। सेब उत्पादक काश्तकार प्रेम सिंह विष्ट के अनुसार इस वर्ष सेब की बहुत ही अच्छी फसल थी। लेकिन ओलों ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है। वे कहते है कि ओला बृष्टि के तुरंत बाद कुछ दवाओं के छिडकाव से कुछ हद तक दाग मिटते हैं, लेकिन उद्यान विभाग के पास ये दवाईयाॅ भी उपलब्ध नही थी। उन्होने स्वय विभाग से बोरेक्स, वेवस्टीक व एम-45 नामक दवाईयों की मांग की थी जो उन्है उपलब्ध नही हो सकी।
सीमांत विकास खंड जोशीमठ के सेब उत्पादक व अन्य नगदी फसलों के उत्पादक किसानो को उचित मुवावजा जल्द से जल्द मिल सके इसके लिए क्षेत्र प्रमुख हरीश परमार ने मुख्य मंत्री को पत्र भेजकर पूरे पैनखंडा जोशीमठ का सर्वेक्षण कर काश्तकारों को हुए नुकसान का मुवावजा दिलाए जाने की मांग की है। बडागाॅव के काश्ताकर व बरिष्ठ भाजपा नेता राकेश भंडारी ने भी ओलाबृष्टि से हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी से शासन को अवगत कराते हुए सर्वेक्षण कराने का आग्रह किया है।
बहरहाल कोरोना काल मे आर्थिक मंदी से जूझ रहे काश्तकारो के पास एक मात्र उम्मीद नगदी फसलों से ही थी वो भी अब क्षीण हो चुकी है। ऐसे मे इन सीमांत काश्तकारो का कब तक सुध ली जा सकेगी इस पर ओलाबृष्टि से दागदार हुए फलों को निहार कर मायूस हो रहे काश्तकारों की निगाहे रहेगी ।











