• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड में सेब की लाली पर सिस्टम का पीलापन भारी

24/03/20
in उत्तराखंड, हेल्थ
Reading Time: 1min read
177
SHARES
221
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
चौबटिया क्षेत्र के सेब बागानों का जिक्र होते ही हमारी आंखों के सामने कश्मीर और हिमाचल की तस्वीर उभर आती है, पर क्या आप जानते हैं एशिया का सबसे बड़ा सेब बागान कहां है? चौबटिया में एशिया का सबसे बड़ा सेब बागान अल्मोड़ा जिले में स्थित है। ये सेब बगान करीब 235 हेक्टेयर क्षेत्रफल मे फैला है। एक वक्त था जब इस सेब बागान के चर्चे पूरी दुनिया में होते थे। यहां फिल्मों की शूटिंग होती थी, लोग इस सेब बागान की खूबसूरती को निहारने के लिए आते थे, लेकिन वक्त के थपेड़ों और प्रशासन की अनदेखी ने बाग की रौनक छीन ली। देखभाल के अभाव में ये बागान सिमटता चला गया। विभागीय अधिकारी भी इसकी तरफ ध्यान नहीं दे रहे, जिस वजह से बागान का उत्पादन लगातार कम होता जा रहा है। आज ये बागान अपना अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रहा है। कभी यह बागान 235 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला था, जहां सीजन में 500 कुंतल से ज्यादा सेब की पैदावार होती थी। आज सेब का उत्पादन क्षेत्र घटकर 106.91 हेक्टेयर रह गया है। यहां 17 हजार फल वृक्ष हैं, लेकिन उत्पादन सिर्फ 20 से 30 कुंतल तक सिमट कर रह गया है।
चौबटिया में सेब बागान 1955-56 मे अस्तित्व में आया। यहां हिमालयी रेड डिलिसियस एप्पल के पेड़ हुआ करते थे, पर बाद में यहां अमेरिकन सेबों की पौध लगा दी गई। इसके साथ ही बागान के बुरे दिन शुरू हो गए, फलों का उत्पादन घट गया। विधायक करन माहरा कहते हैं कि राज्य गठन के बाद चौबटिया गार्डन पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब यहां रिसर्च सेंटर बनाने की तैयारी चल रही है। सरकार अगर एप्पल गार्डन के उद्धार पर ध्यान दे तो ये आजीविका, पर्यटन और आर्थिकी का मजबूत साधन बन सकता है। स्थानीय लोग भी चौबटिया गार्डन को दोबारा स्थापित होते देखना चाहते हैं। लोग चौबटिया गार्डन को नए सिरे से विकसित करने की मांग कर रहे हैं, ताकि इसका वजूद बचाया जा सके। अल्मोड़ा के चौबटिया में एशिया का सबसे बड़ा सेब बागान है, कभी ये बागान पूरी दुनिया में मशहूर हुआ करता था, लेकिन आज यह अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए जूझ रहा है। उत्तराखंड में सेब की लाली पर सिस्टम का पीलापन भारी पड़ रहा है। सेब की तुड़ाई शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक सेब उत्पादकों को न तो खाली पेटियां मिलीं और न सेब का न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी ही घोषित हुआ है। नतीजतन, उत्तराखंड का सेब आज भी हिमाचल एप्पल की पेटियों में हिमाचल के नाम से बिक रहा है। यही नहीं मंडियों में भी किसानों को औने.पौने दामों पर सेब बेचने को विवश होना पड़ रहा है।
प्रमुख नकदी फसलों में शुमार होने के बावजूद उत्तराखंड में सेब पिछले 19 साल से सिस्टम की उपेक्षा का दंश झेल रहा है। प्रदेश के 11 जिलों के पर्वतीय इलाकों में 25318 हेक्टेयर क्षेत्र में सेब का उत्पादन होता है, मगर आज तक ब्रांडिंग को गंभीरता से पहल नहीं हो पाई है। हर बार ही सेब उत्पादकों को समय से उत्तराखंड एप्पल के नाम की खाली पेटियां मुहैया कराने की बात होती है, मगर ये शायद ही कभी वक्त पर मिल पाती हों। इस मर्तबा भी सूरतेहाल कुछ ऐसा ही है। मौसम के साथ देने से इस बार सेब की अच्छी पैदावार है। तुड़ाई भी शुरू हो चुकी है, मगर सेब उत्पादकों को खाली पेटियां उपलब्ध कराने को अभी टेंडर ही हो पाए हैं। हालांकि, सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया था कि सेब उत्पादकों को एक लाख पेटियां मुहैया कराई जाएंगी, मगर ये कब तक मिलेंगी, यह भविष्य के गर्त में छिपा है। सेब के प्रमुख नकदी फसलों में शुमार होने के बावजूद अब जाकर उत्तराखंड में एप्पल पॉलिसी बनाने पर विचार हो रहा है। हालांकि, इससे पहले सरकार ने राज्य में चल रहे मिशन एप्पल को सशक्त और किसानोपयोगी बनाने की दिशा में पहल की है। इसके तहत नियमों में बदलाव किया गया है। अब एक हेक्टेयर से कम क्षेत्र में सेब के बागान स्थापित किए जा सकेंगे। साथ ही विभाग की जवाबदेही भी तय की गई है।
कृषि और उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार इस पहल से राज्य में सेब उत्पादकों को राहत मिलेगी। साथ ही सेब उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। उत्तराखंड के 11 जिलों के पर्वतीय इलाकों में वर्तमान में 25318 हेक्टेयर क्षेत्र में सेब का उत्पादन होता है। बावजूद इसके सेब को उस तरह की तवज्जो अब तक नहीं मिल पाई, जिस तरह से पड़ोसी राज्य हिमाचल में मिली। हिमाचल प्रदेश में तो सेब आर्थिकी का मुख्य जरिया है। हालांकि, 2015-16 में मिशन एप्पल शुरू होने पर उत्तराखंड में सेब उत्पादन को पंख लगने की उम्मीद जगी, मगर गंभीरता से पहल नहीं हो पाई। ऐसे में मिशन एप्पल को लेकर सवाल उठे।
लंबे इंतजार के बाद अब सरकार राज्य में एप्पल पॉलिसी बनाने को कसरत कर रही है। फिलवक्त, मिशन एप्पल को सशक्त और सेब उत्पादकों के हित में बनाया गया है। कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार मिशन एप्पल में पहले दो हेक्टेयर तक के क्षेत्र लंबे इंतजार के बाद अब सरकार राज्य में एप्पल पॉलिसी बनाने को कसरत कर रही है। फिलवक्त, मिशन एप्पल को सशक्त और सेब उत्पादकों के हित में बनाया गया है। कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार मिशन एप्पल में पहले दो हेक्टेयर तक के क्षेत्र में ही सेब बागान की मंजूरी दी जाती थी। अब यह व्यवस्था बदली गई है, जिसके तहत एक हेक्टेयर से कम क्षेत्र में भी सेब के बागान स्थापित किए जा सकेंगे। लंबे इंतजार के बाद अब सरकार राज्य में एप्पल पॉलिसी बनाने को कसरत कर रही है। फिलवक्त, मिशन एप्पल को सशक्त और सेब उत्पादकों के हित में बनाया गया है। कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार मिशन एप्पल में पहले दो हेक्टेयर तक के क्षेत्र में ही सेब बागान की मंजूरी दी जाती थी। अब यह व्यवस्था बदली गई है, जिसके तहत एक हेक्टेयर से कम क्षेत्र में भी सेब के बागान स्थापित किए जा सकेंगे।
पूर्व में एक फर्म को पौध खरीद का जिम्मा सौंपा गया था, मगर पौध की क्वालिटी को लेकर शिकायतें आ रही थीं। इसे देखते हुए अब विभाग को जवाबदेह बनाया गया है। विभाग न सिर्फ पौध खरीदकर देगा, बल्कि बागान स्थापित होने तक उसकी निरंतर मॉनीटङ्क्षरग करेगा। उन्होंने कहा कि पौध की क्वालिटी अथवा बागान स्थापना में कहीं कोई कमी होगी तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी। उन्होंने बताया कि सेब पॉलिसी पर भी मंथन चल रहा है। मिशन एप्पल के परवान चढऩे पर इस दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे विश्व भर में यह बहुत ज्यादा मात्रा में उगाया जाता है। इसको काफी मात्रा में संग्रह करके भी रखा जा सकता है। इसमें पौष्टिक तत्व बहुत अधिक मात्रा में होने के कारण यह हमारे शरीर को बहुत ऊर्जा देता है। सेब खाने से हमारे शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
एक मध्यम आकार के सेब में केवल 95 कैलोरी होती है और ज्यादातर इसमें ऊर्जा कार्बोहाइड्रेट्स से आती है। सेब फाइबर वाला फल है इसमें प्रोटीन, और विटामिन की संतुलित मात्रा होती है, लेकिन कैलोरी कम होती है। सेब का फल, रस, छिलका, मुरब्बा, आइसक्रीम, जैम, जैली आदि रूपों में सेवन करना स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए लाभकारी माना जाता है। सेब रोज खाओ और डॉक्टर को दूर भगाओ। सेब पौष्टिक तत्वों से भरा है। ये न केवल बीमारियों से लडने में मदद करता है बल्कि आपके शरीर को भी हैल्दी रखता है। सेब के जूस में कई फायदे होते हैं। इनमें से एक यह भी है कि यह शरीर में कोलेस्टोल के स्तर को सामान्य बनाये रखने में मदद करता है। अगर शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ जाए तो इससे हृदय संबंधी कई रोग हो सकते हैं, इसलिए आप सेब अथवा इसके जूस के नियमित सेवन से स्वंय को इस बीमारी से दूर रख सकते हैं। सेब में फाइबर, जो शरीर में पानी बनाए रखने की बहुत अधिक क्षमता रखता है। अतः सेब खाने से पेट भरा सा लगता है और अनावश्यक भोजन की इच्छा नहीं होती है। डाइटिंग करने वालों के लिए सेब एक उपयोगी फल है। सेब का जूस कैंसर और ट्यूमर से बचाने में बेहद उपायोगी होता है। खासतौर पर फेफडों के कैंसर से बचाने में सेब के जूस का कोई तोड नहीं। ट्यूमर कोशिकाओं को रोकने में फ्लेवोनॉयड और फेनॉलिक एसिड को बेहद कारगर माना गया है। यह दोनों ही सेब में काफी प्रचुर मात्रा में मिल जाते हैं। सेब के जूस में विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में होता है। यह विटामिन आंखों की रोशनी बढाने में उपयोगी होता है। इसके साथ ही यह आंखों को कई संभावित बीमारियों से बचाता है। सेब स्मरण शक्ति की दुर्बलताए बेहोशी तथा चिडचिडापन अर्थात् मस्तिष्क के रोगों को दूर करने की अचूक औषधि माना गया है। मस्तिष्क व दिल की कमजोरी और घबराहट दूर करने में सेब अचूक इलाज है। दुनियाभर में सेब के गुणों में बारे में जानकारी देने के लिए यूरोप के कई देशों में एक दिसंबर को ईट ए रेड एप्पल डे बडे जोरों और शोरों से मनाया जाता है। इसमें समारोह में आपको कई अलग अलग के सेब प्रदर्शित किए जाते हैं। उत्तराखण्ड हिमालय राज्य होने के कारण बहुत सारे बहुमूल्य फसल उत्पाद जिनकी अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक मांग रहती हैण्संकटपूर्ण स्थिति के लिए उपयोगी का साधन बनाया जा सकता है।

Share71SendTweet44
Previous Post

कोरोना संक्रमण रोकने को लाॅकडाउन का सख्ती से अनुपालन करायें अधिकारी

Next Post

जोशीमठ में कार्यरत इटली के इंजीनियरों का दल हेलीकाप्टर से रवाना

Related Posts

उत्तराखंड

उत्तराखण्ड खटीमा थारू जनजाति की प्रसिद्ध गायिका रिकु राणा का सड़क हादसे में निधन

March 6, 2026
3
उत्तराखंड

लॉ यूनिवर्सिटी की मांग को लेकर 18वें दिन भी धरना जारी

March 6, 2026
24
उत्तराखंड

भाजपा एवं कांग्रेस एक सिक्के के दो पहलू : भूपाल सिंह गुसांईं

March 6, 2026
10
उत्तराखंड

भारत संचार निगम लिमिटेड ने इन क्षेत्रों में पांच मोबाइल टावर स्थापित

March 6, 2026
10
उत्तराखंड

राउप्रावि उमरैला की छात्रा कु० दिव्यांशी रावत का इन्स्पायर अवार्ड के लिए हुआ चयन

March 5, 2026
76
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं के लिए प्रदान की ₹ 171 करोड की वित्तीय स्वीकृति

March 5, 2026
6

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67662 shares
    Share 27065 Tweet 16916
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45773 shares
    Share 18309 Tweet 11443
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38046 shares
    Share 15218 Tweet 9512
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37435 shares
    Share 14974 Tweet 9359
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37324 shares
    Share 14930 Tweet 9331

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

उत्तराखण्ड खटीमा थारू जनजाति की प्रसिद्ध गायिका रिकु राणा का सड़क हादसे में निधन

March 6, 2026

लॉ यूनिवर्सिटी की मांग को लेकर 18वें दिन भी धरना जारी

March 6, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.