• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

आशाओं पर काम का बोझ, वेतन के नाम पर मामूली प्रोत्साहन राशि

14/07/20
in उत्तराखंड, रुद्रप्रयाग
Reading Time: 1min read
143
SHARES
179
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

प्रदेश में आशा कार्यकत्रियां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत गांवों में सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकत्री के रूप में सेवाएं दे रही हैं। उन्हें कार्य के बदले प्रोत्साहन राशि के पर तैनाती दी गई है। उन्हें वेतन नहीं दिया जाता, न ही वह सरकारी कर्मचारी हैं। इकसे बावजूद आशाओं पर एक के बाद एक कार्यों का बोझ लादा जा रहा है, लेकिन काम के अनुपात में उनकी सुविधाओं तथा मानदेय में कोई बढ़़ौतरी नहीं की जा रही है। यह गांव-गांव में जमीनी हकीकत के साथ काम कर रही आशाओं का शोषण है। यह माननीय न्यायालय के उस निर्णय का भी मजाक है, जिसमें समान काम के लिए समान वेतन का निर्णय दिया गया है। आशाओं के विभिन्न संगठनों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है और सरकार से उन पर लादे जा रहे बोझ के साथ सुविधाओं में बढ़ौतरी का सवाल रखा है।
गाँवों में एनएचएम के इन प्रेरको को स्वास्थ्य विभाग ने तीमारदार, नौकरानी एक साथ बना दिया है। पंचायतों से चयनित इन महिलाओं के पास नियुक्ति पत्र तक नहीं। यह बिल्कुल निजी संस्थाओं की तरह सरकार द्वारा किया जा रहा शोषण है। कक्षा 8 शैक्षिक योग्यता की इन आशाओं को प्रशिक्षण दिया गया था। अब इन पर अति संवेदनशील कोरोना संक्रमण से लड़ने का बोझ डाला जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी ए एन एम के मातहत इनसे काम लिया जा रहा है। यह एक तरह से इन पर इंस्पेक्टर राज करने जैसा है।
सन 2005 में एन आर एच एम में लगभग एक हजार की जनसख्या पर गाँवों में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटाने के लिए प्रेरक के रूप मे प्रोत्साहन राशि पर आशा को तैनात किया गया परन्तु स्वास्थ्य विभाग ने मदर एनजीओ के साथ मिलकर इन्हें इतना प्रशिक्षण दिया कि यह प्रशिक्षित डाक्टर से कोर्स के बराबर था। प्रसव पूर्व जाँच, अस्पतालों में प्रसव कराने के लिए प्रेरित करने के बजाय इन्हें 108 बाहनों, अस्पतालों में 2-3 दिनों तक डेरा डालने के लिए मजबूर किया जाता है। रैफर में भी साथ जा कर गर्भवती की तीमारदार की भूमिका में इन्हें रखा जाता है। यह काम ये अपना घरबार छोड़कर करती हैं, जिसके लिए इन्हें बहुत मामूली भुगतान किया जाता है।
पहले इनके कार्यो पर स्वा0 के0 प्रभारी, एएन एम निगरानी रखती थी, अब एक और आशा सुविधादाता का पद बढाकर इन्स्पैक्टरी राज बना दिया। इनको बेतन, मानदेय नहीं बल्कि धरातल पर काम करने वाली आशा को नाममात्र की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
अब एनएचएम में इनका कार्य इतना बढा दिया कि ये स्वास्थ्य कार्यकर्ता बन गये, परन्तु सुविधाएं नहीं बढ़ाई गईं। जब गाँव का सब कार्य इनको ही करना है फिर एएनएम आशा सुविधादाता के वेतन, मानदेय के नाम पर धन की बर्बादी क्यो? इन्हें सर्वे के बोझ तले भी इतना दबा दिया गया कि कम पढी लिखी होने के कारण सर्वे कर नही पा रही है तो इनके पति, लडके.लड़कियाँ आशा का कार्य कर रहे हैं।
कोरोना में भी इन्हें बिना किसी सामाजिक सुरक्षा के लगाया गया है। रूद्रप्रयाग जनपद के वि0ख0 जखोली, ऊखीमठ की आशाओं ने जब स्वयं और परिवार की सुरक्षा के मध्यनजर कोरोना में काम नहीं करने के निर्णय से ब्लाक प्रभारी को लिखित में अवगत कराया तो ऊखीमठ प्रभारी ने आशाओं को खूब बरगलाया, जखोली की डा0 याशमिन, आशा सुविधादाता सन्तोषी, बिमला देवी द्वारा आशाओं पर फोन काँनफ्रेन्स से बात करके दबाव बनाया जा रहा है, जिससे कई आशा मानसिक तनाव में हैं।
समाज सेविका आशा के हितैषी मजदूर संगठन सीटू, ऐक्टू, बीएमएस अलग-अलग जनपदों में अलग-अलग माँग लेकर इनको पीस रहे है। दो आशा उधमसिंह नगर तथा दो टिहरी से कोरोना संक्रमण से मर चुकी है, परन्तु कोई भी संगठन इन चारों का नाम न लेकर सिर्फ अपने से जुडे़ का ही नाम ले रहे है। इन कोरोना योद्धाओं को मुआवज दिलाना तो दूर की बात है। राज्य सरकार ने अब जाकर इन्हें हजार रुपये का मानदेय एक बार देने की निर्णय लिया है, जो उंट के मुंह में जीरा है।
कोरोना में शिक्षा विभाग जैसे सरकारी विभागों के लोग घर बैठे है और आशा जोखिम उठा रही है पन्द्रह साल बीतने पर भी सरकारी कर्मचारी नहीं बनी, कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है। परन्तु ये संगठन इन जायज माँगों के लिए एक होने को तैयार नही दिखाई देते। अब आशा संगठन जखोली एवं उखीमठ ब्लाक की आशाओं ने इसके खिलाफ आवाज बुलंद की है।

Share57SendTweet36
Previous Post

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 3608 पहुंचा

Next Post

रूरल ग्रोथ सेंटर बनेंगे विकास की सीढ़ी: मुख्यमंत्री

Related Posts

उत्तराखंड

भुवनेश्वर में उत्तराखंड के धावकों का जलवा: अंकिता ध्यानी ने जीता स्वर्ण, एशियन गेम्स के लिए किया क्वालीफाई

June 30, 2026
5
उत्तराखंड

शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग’

June 30, 2026
17
उत्तराखंड

डोईवाला: वैश्विक रैंकिंग में स्थान मिलने पर विवि अध्यक्ष को दी शुभकामनाएं

June 30, 2026
15
उत्तराखंड

एसडीपी रक्तदान कर चार दिन के नवजात की बचाई जान

June 30, 2026
21
उत्तराखंड

पिछले साल के जख्म अब भी हरे, फिर हर्षिल पर खतरा

June 30, 2026
7
उत्तराखंड

मंदिर समिति के दो कार्मिकों के सेवानिवृत्ति पर दी भावभीनी बिदाई

June 30, 2026
6

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67707 shares
    Share 27083 Tweet 16927
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45784 shares
    Share 18314 Tweet 11446
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38063 shares
    Share 15225 Tweet 9516
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37450 shares
    Share 14980 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

भुवनेश्वर में उत्तराखंड के धावकों का जलवा: अंकिता ध्यानी ने जीता स्वर्ण, एशियन गेम्स के लिए किया क्वालीफाई

June 30, 2026

शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग’

June 30, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.