• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

बच्चों को सोशल मीडिया चलाने की छूट होनी चाहिए!

18/02/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
4
SHARES
5
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
दुनिया भर में पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया का दायरा तेजी से बढ़ा है। कुछ देशों ने कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े प्रतिबंध भी लगाए हैं।द चिल्ड्रन्स ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट जिसे 1998 में लागू किया गया था, उसके तहत 13 साल से कम उम्र के बच्चों का निजी डाटा जुटाने के लिए वेबसाइट्स को अभिभावकों की सहमति की जरूरत होती है। कई कंपनियां नियमों के तहत 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अपने पेज पर एक्सेस प्रतिबंधित कर देती हैं। हालांकि, अमेरिका में इसके चलते कई बच्चों ने इंटरनेट पर गलत उम्र बताने का चलन शुरू कर दिया। इसके बाद चिल्ड्रन्स इंटरनेट प्रोटेक्शन एक्ट (सीआईपीए) ने स्कूलों और लाइब्रेरीज में गलत कंटेंट को प्रतिबंधित कर दिया। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि इस कदम का सिर्फ सीमित असर है, क्योंकि बच्चे अभी भी दूसरे तरीकों से सारा ऑनलाइन कंटेंट पा सकते हैं।ऑस्ट्रेलिया ने बीते साल ही बड़ी टेक कंपनियों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए एक कानून पास किया है, जिसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस कानून के तहत अगर सोशल मीडिया कंपनियां 16 साल से कम उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने से रोकने में असफल रहती हैं तो उन पर 5 करोड़ डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, ऐसी मैसेजिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को इस प्रतिबंध से दूर रखा गया है, जो कि स्वास्थ्य, शिक्षा के मकसद से काम कर रही हैं।ब्रिटेन में फिलहाल बच्चों की ऑनलाइन पहुंच पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध या रोकटोक नहीं है। हालांकि, यहां भी सरकार कुछ मौकों पर कह चुकी है कि वह लोगों को इंटरनेट पर सुरक्षित रखने के लिए तैयार रहेगी। सरकार ने लोगों पर और खासकर बच्चों पर स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के पड़ने वाले असर को लेकर स्टडीज कराना भी शुरू कर दिया है। इसी के मद्देनजर ब्रिटेन की नियामक संस्था ऑफकॉम ऑनलाइन स्तर पर पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने के लिए इसी साल के अंत तक ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट ला सकती है। इस कानून के आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स- फेसबुक, यूट्यूब और टिकटॉक के लिए कुछ मानक सख्त कर दिए जाएंगे। इसके तहत चुनिंदा ऑनलाइन सामग्री के लिए उम्र के सत्यापन को अनिवार्य कर दिया जाएगा। इस कानून को 2023 में कंजर्वेटिव सरकार ने पासकरायाथा। यूरोपीय संघ में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के डाटा को जुटाने के लिए इंटरनेट से जुड़ी कंपनियों को उनके अभिभावकों की सहमति जुटानी पड़ती है। हालांकि, ईयू के 27 सदस्य देश उम्र की इस सीमा को घटाकर 13 तक कर सकते हैं। दूसरी तरफ यूरोप के ही कुछ और देश इस नियम के अलावा अपने नियम भी लागू कर सकते हैं। र्वे सरकार ने भी 2024 में ही एक प्रस्ताव रखा, जिसके तहत बच्चों को अब 13 की जगह 15 साल की उम्र तक सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए अभिभावकों की मंजूरी की जरूरत होगी। इसके बाद ही बच्चे खुद से सोशल मीडिया के इस्तेमाल की मंजूरी दे सकते हैं। यहां की सरकार ने कहा है कि वह ऐसा कानून लाने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए एक न्यूनतम उम्र की सीमा तय हो जाएगी। बताया जता हा कै कि नॉर्वे में नौ साल के करीब 50 फीसदी बच्चे अभी से सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं।फ्रांस में 2023 में एक कानून पारित हुआ, जिसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 15 साल तक के बच्चों के अकाउंट बनाने के लिए भी उनके माता-पिता या अभिभावकों से मंजूरी लेनी होगी। हालांकि, कुछ तकनीकी वजहों से इस कानून के लागू होने में अड़चन आई हैं। अप्रैल में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस कानून के तहत सख्त नियमों को लागू करने का प्रस्ताव दिया था। इसके तहत 11 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सेलफोन प्रतिबंधित करने और 13 से कम उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट वाले फोन प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव दिया गया। हालांकि, यह साफ नहीं है कि नया प्रस्ताव कब तक पेश होगा और इसके कानून बनने के क्या आसार हैं।जर्मनी में 13 साल से ऊपर और 16 साल के कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की इजाजत है, हालांकि इसके लिए उन्हें अभिभावकों की सहमति लेनी होती है। जर्मनी में फिलहाल इस कानून को और सख्त करने पर चर्चा नहीं है, दूसरी तरफ बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अभी जो नियम लागू हैं, उनका ठीक ढंग से पालन कराने में ही कई कमियां हैं।नीदरलैंड में सोशल मीडिया चलाने की कोई न्यूनतम उम्र निर्धारित नहीं की गई है। हालांकि, सरकार ने स्कूल में क्लास के दौरान मोबाइल रखने पर प्रतिबंध लागू किए हैं। सिर्फ डिजिटल क्लास, चिकित्सा जरूरत और दिव्यांगता की स्थिति में ही इन प्रतिबंधों से छूट मिलती है।बेल्जियम में 2018 से ही कानून लागू है, जिसके तहत 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चे बिना माता-पिता या अभिभावक की मंजूरी के सोशल मीडिया अकाउं नहीं बना सकते हैं। इटली में 14 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए माता-पिता की मंजूरी की जरूरत है। इससे ज्यादा उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल की पूरी आजादी है।चीन में 2023 में ही नियामक संस्थाओं ने एक नियम लागू किया है, जिसके तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चे दिन में अधिकतम सिर्फ दो घंटे ही स्मार्टफोन्स के साथ बिता सकते हैं। चीन के साइबरस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (सीएसी) के मुताबिक, उसने स्मार्ट डिवाइस बनाने वाली कंपनियों से अवयस्कों के लिए ऐसे प्रोग्राम बनाने पर बात की है, जिससे 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक के लिए मोबाइल पर इंटरनेट की सुविधा नहीं पा सकेंगे भारत में केंद्र सरकार करोड़ों अव्यस्कों के लिए सोशल मीडिया का एक्सेस सीमित करने पर विचार कर रही है। इससे Facebook और Instagram को ऑपरेट करने वाली Meta और बिलिनेयर Elon Musk की X को झटका लग सकता है। Bloomberg की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सोशल मीडिया पर आयु से जुड़ी लिमिट्स लगाने को लेकर सरकार विचार कर रही है। टेक्नोलॉजी मिनिस्टर Ashwini Vaishnaw ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ डीपफेक जैसी समस्याओं पर बातचीत की जा रही है। उनका कहना था, “बहुत से देशों ने इसे स्वीकार किया है कि आयु से जुड़े रेगुलेशंस मौजूद होने चाहिए।” पिछले महीने जारी किए गए वार्षिक इकोनॉमिक सर्वे में सरकार ने इस मुद्दे को एक चिंता बताया था। हाल ही में आंध्र प्रदेश के एक मंत्री ने Bloomberg को बताया था कि 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े बैन लगाने के तरीकों पर सरकार विचार कर रही है। सोशल मीडियो को बच्चों के लिए बैन करने वाला ऑस्ट्रेलिया पहला देश है। ऑस्ट्रेलिया ने इस बैन में इंस्टाग्राम, फेसबुक, YouTube और X को शामिल किया है। स्पेन के प्रधानमंत्री Pedro Sanchez ने सोशल मीडिया को बड़ी चिंता बताया था। यूरोप के लगभग 10 देश इस तरह के प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहे हैं। भारत में इंस्टाग्राम और फेसबुक प्रत्येक के 40 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं। इन दोनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए यह सबसे बड़ा मार्केट है। देश में Snapchat के पास भी 20 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं। भारत में मस्क के माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X के यूजर्स की संख्या दो करोड़ से अधिक की है। ऑस्ट्रेलिया में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगाए गए नए प्रतिबंध से सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर एक स्पष्ट चेतावनी मिलती है: बचपन से ही सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों के दिमाग को नुकसान पहुंचाता है। तकनीक अपने आप में खलनायक नहीं है। सिलिकॉन वैली के कई नवप्रवर्तक डिजिटल वातावरण में प्रयोग करने को अपनी प्रणालीगत सोच और लचीलेपन का श्रेय देते हैं। टेलीविजन या गेमिंग की तुलना में सोशल मीडिया और लघु वीडियो किशोरों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बिग… सोशल मीडिया एक ऐसा जाल जिसमें बच्चों के लिए फसना आसान हो गया है. नापाक इरादे वाले लोग यहां बच्चों को बरगलाने के लिए बैठे होते हैं. पूरी दुनिया में इसके खतरे महसूस किए जा रहे हैं. कई देशों ने तो बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगा दिया है. भारत में भी आए दिन ये मांगे उठती रहती हैं. अब देश में सोशल मीडिया को लेकर बड़ा बदलाव आने की आहट सुनाई दे रही है. केंद्र सरकार अब बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर नजर आ रही है. हाल ही में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने संकेत दिया है कि सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उम्र आधारित प्रतिबंध लागू करने पर विचार कर रही है. अगर ऐसा फैसला लिया जाता है तो इसका असर करोड़ों भारतीय यूजर्स पर पड़ सकता है. खासतौर पर बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर नई गाइडलाइन बन सकती है.देश की राजधानी दिल्ली में आयोजिच AI इम्पैक्ट समिट के दौरान मंत्री ने कहा कि दुनियाभर में कई देश अब सोशल मीडिया पर उम्र आधारित नियंत्रण को जरूरी मान रहे हैं. उन्होंने बताया कि सरकार अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के साथ बातचीत कर रही है ताकि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए सही नियम बनाए जा सकें. हालांकि उन्होंने किसी खास कंपनी का नाम नहीं लिया. लेकिन माना जा रहा है कि इस फैसले का असर मेटा और गूगल जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पड़ सकता है. जब बच्चों को सीखने और समग्र विकास पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन डिजिटल लत, उम्र के हिसाब से अनुपयुक्त सामग्री के संपर्क में आना, चिंता, अवसाद और व्यक्तिगत डाटा के दुरुपयोग के बढ़ते मामलों ने खतरे की घंटी बजा दी है। देश में करोड़ों युवाओं के लिए सोशल मीडिया का एक्सेस सीमित करने के फैसले से फेसबुक, इंस्टाग्राम और X को बड़ा नुकसान हो सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडलिंग के लिए भी भारत डेटा का एक महत्वपूर्ण सोर्स है। टेक और सोशल मीडिया कंपनियों ने इस तरह के प्रतिबंधों का विरोध किया है। इन कंपनियों का मानना है कि इस प्रकार के प्रतिबंधों को लागू करना मुश्किल होता है और इससे अन्य समस्याएं हो सकती हैं। ब्रिटेन में बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने की योजना का प्रमुख कारण इसके हानिकारक प्रभाव हैं. कई रिसर्च रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों में मानसिक समस्याओं को जन्म दे रहा है, जैसे कि एंग्जायटी, डिप्रेशन, नींद न आना, साइबर बुलिंग और एकाग्रता में कमी. इसके अलावा, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों की शारीरिक सेहत पर भी असर डाल रहा है, जिससे उनका वजन बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं. इन सबके मद्देनजर, दुनिया के कई देश सोशल मीडिया पर बच्चों की पहुंच को नियंत्रित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं. भारत में डिजिटल एडिक्शन से निपटने के लिए अब सोशल मीडिया के लिए नियम बनाने की बात हो रही है, जबकि  चीन, मिस्र, ईरान, उत्तर कोरिया, सऊदी अरब और सीरिया जैसे कई देशों में इंटरनेट मीडिया को लेकर पहले से ही कड़ी पाबंदियां हैं। इनमें से कई देशों में रोक अस्थायी होती है, जैसे- चुनाव या विरोध प्रदर्शन के दौरान आदि।कुछ देशों में पाबंदी स्‍थायी है और उसके लिए कड़े कानून भी बनाए गए हैं। भारत ने 2020 में टिकटॉक समेत कई एप को बैन किया था, लेकिन चीनी एप के तौर पर, न कि बच्‍चों की सुरक्षा के लिए।भारत में फिलहाल बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कोई राष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं है, विशेषज्ञों का मानना है कि वीपीएन जैसी तकनीकों के कारण इस कानून को पूरी तरह लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं, अभिभावकों के एक बड़े वर्ग ने इस संभावित कदम का स्वागत किया है और बच्चों के सुरक्षित डिजिटल भविष्य के लिए इसे जरूरी बताया है।सरकार इस मुद्दे पर कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है। यदि सहमति बनती है, तो जल्द ही इस पर नीतिगत घोषणा की जा सकती है।
यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि सार्वजनिक अनुसंधान का उपयोग आम जनता की भलाई के लिए किया जाए। लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share2SendTweet1
Previous Post

2013 आपदा में बहा पुल अब तक नहीं बना, ट्रॉली के सहारे ‘मौत’ का सफर

Next Post

रामकृष्ण परमहंस जयंती रामकृष्ण परमहंस मानवता के एक सच्चे पुजारी थे

Related Posts

उत्तराखंड

रामकृष्ण परमहंस जयंती रामकृष्ण परमहंस मानवता के एक सच्चे पुजारी थे

February 18, 2026
3
उत्तराखंड

2013 आपदा में बहा पुल अब तक नहीं बना, ट्रॉली के सहारे ‘मौत’ का सफर

February 18, 2026
5
उत्तराखंड

सीएम धामी ने किया ‘चंपावत सरस कॉर्बेट महोत्सव–2026’ का शुभारम्भ

February 18, 2026
4
उत्तराखंड

उत्तराखंड ने सौर ऊर्जा स्थापना में 01 गीगावाट का ऐतिहासिक आंकड़ा पार किया

February 18, 2026
8
उत्तराखंड

अंतर्राष्ट्रीय महिला बॉडीबिल्डर प्रतिभा थपलियाल ने विधानसभा अध्यक्ष से की शिष्टाचार भेंट

February 18, 2026
6
उत्तराखंड

पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने स्टेट व नेशनल लेवल खिलाड़ियों को किया सम्मानित

February 18, 2026
4

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67650 shares
    Share 27060 Tweet 16913
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45773 shares
    Share 18309 Tweet 11443
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38046 shares
    Share 15218 Tweet 9512
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37434 shares
    Share 14974 Tweet 9359
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37318 shares
    Share 14927 Tweet 9330

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

रामकृष्ण परमहंस जयंती रामकृष्ण परमहंस मानवता के एक सच्चे पुजारी थे

February 18, 2026

बच्चों को सोशल मीडिया चलाने की छूट होनी चाहिए!

February 18, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.