• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

हिमालय में गुम हुआ सीआईए का परमाणु जनरेटर का खतरा!

15/12/25
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
8
SHARES
10
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
प्लूटोनियम से भरा एक परमाणु उपकरण आज से 60 साल पहले हिमालय की सबसे ऊंची और दुर्गम चोटियों में से एक नंदा देवी पर एक सीक्रेट मिशन के दौरान गायब हो गया था, जिसके बारे में अमेरिका आज भी बात करने से कतराता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी) के इस रहस्यमयी मिशन का मकसद चीन की जासूसी करना था, जिसने उसी समय परमाणु परीक्षण किया था। प्लूटोनियम से भरा एक परमाणु उपकरण आज से 60 साल पहले हिमालय की सबसे ऊंची और दुर्गम चोटियों में से एक नंदा देवी पर एक सीक्रेट मिशन के दौरान गायब हो गया था, जिसके बारे में अमेरिका आज भी बात करने से कतराता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी) के इस रहस्यमयी मिशन का मकसद चीन की जासूसी करना था, जिसने उसी समय परमाणु परीक्षण किया था। हालांकि, अमेरिकी जासूसों का यह मिशन नाकाम हो गया। दुनियाभर में चल रहे कोल्ड वार के बीच एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के परमाणु परीक्षण ने अमेरिका की चिंताएं बढ़ा दीं। इसके बाद उसने भारत के साथ मिलकर एक सीक्रेट मिशन की योजना बनाई। इसका मकसद हिमायल में न्यूक्लियर पावर्ड निगरानी उपकरण लगाकर चीन की परमाणु गतिविधियों पर नजर रखना था। इसके लिए नंदा देवी को चुना गया, जो भारत की चीन सीमा के पास स्थित 25,645 फीट ऊंची चोटी है।रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिशन में खास उपकरण लगाया जाना था, जिसमें प्लूटोनियम से चलने वाले पोर्टेबल परमाणु जेनरेटर एसएनएपी-19सी (सिस्टम्स फॉर न्यूक्लियर ऑक्सिलरी पावर) शामिल था। इसे टॉप-सीक्रेट लैब में डिजाइन किया गया था। बीच-बॉल के आकार वाला यह जेनरेटर 50 पाउंड वजनी थी, जिसे चीनी मिशन कंट्रोल की बातें सुनने के लिए नंदा देवी की चोटी पर लगाना था। इसमें प्लूटोनियम की बड़ी मात्रा का इस्तेमाल किया गया था। यह नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम में इस्तेमाल प्लूटोनियम के एक तिहाई के बराबर था। यह उपकरण वर्षों तक बिना देखरेख के काम करने के लिए बनाया गया था, जो अचानक गायब हो गया और 60 साल बाद भी स्थानीय लोगों के लिए खतरा बना हुआ है।यह रिपोर्ट मोंटाना के एक गैरेज में हाल में मिले फाइलों के ढेर से मिली जानकारियों पर आधारित है। इसके मुताबिक, इस सीक्रेट मिशन को एक वैज्ञानिक अभियान का रूप दिया गया। इसके लिए सीआईए ने अमेरिकी पर्वतारोहियों की एक टीम का चयन किया था, जो पहाड़ पर चढ़ने में माहिर थी। उन्हें इस सीक्रेट मिशन पर किसी से कोई बातचीत नहीं करने की हिदायत थी। इसमें भारतीय खुफिया एजेंसियों से जुड़े पर्वतारोहियों को भी शामिल किया गया, ताकि किसी को असली मकसद पर शक न हो।यह बेहद खतरनाक मिशन था, क्योंकि पर्वतारोहियों के लिए भी हिमालय पर चढ़ना आसान काम नहीं था। भारतीय मिशन के प्रमुख कैप्टन एमएस कोहली (2025 में 93 साल की उम्र में निधन) ने मिशन को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कोहली ने बताया था, मैंने स्पष्ट कहा था कि यह काम पूरी तरह असंभव नहीं हो, तो भी बेहद खतरनाक और मुश्किल है। इन चेतावनियों के बावजूद सितंबर, 1965 में मिशन शुरू कर दिया गया। उस समय सर्दियों के तूफान आने वाले थे, इसलिए टीम को समय के खिलाफ दौड़ लगानी पड़ी।अक्तूबर, 1965 में पर्वतारोहियों ने मिशन के लिए चढ़ाई शुरू की। दक्षिण-पश्चिमी रास्ते से नंदा देवी के शिखर की ओर बढ़ते समय टीम भयानक बर्फीले तूफान में फंस गई। एक भी गलत कदम, छोटी सी लापरवाही और 2,000 फीट नीचेसीधीखाईथी।चोटी पर मौजूद भारतीय खुफिया अधिकारी ने बाद में इस घटना को याद करते हुए कहा, हम 99 फीसदी मर चुके थे। न खाना था, न पानी। हम पूरी तरह थक चुके थे। तूफान इतना तेज था कि कुछ भी साफ नहीं दिख रहा था। खतरनाक हालात देख बेस कैंप से कोहली ने टीम को तुरंत पीछे लौटने का आदेश दिया। उन्होंने कहा, उपकरण नीचे नहीं लाया जाए। उसे वहीं सुरक्षित छोड़ दिया जाए। इसके बाद पर्वतारोहियों ने उस परमाणु जेनरेटर को बर्फ की एक चट्टान से बांध दिया और नीचे उतर आए।1966 में टीम जब दोबारा उस जेनरेटर को ढूंढने गई, तो वहां बर्फ की वह परत गायब थी, जिसमें उसे बांधा गया था। माना गया कि यह हिस्सा किसी हिमस्खलन में बह गया होगा। रेडिएशन डिटेक्टर, इन्फ्रारेड सेंसेर व मेटल स्कैनर से कई बार खोज के बावजूदउपकरण का आज तक पता नहीं चला। जेनरेटर गुम होने से खौफ में थी टीम.जो लोग दशकों पहले उस जेनरेटर को चोटी पर ले गए थे, उन्होंने चुप रहने की कसम खाई थी। उसके गायब होने के बाद से वे लगातार खौफ में जी रहे थे। न्यूयॉर्क टाइम्स ने जब उन्हें ढूंढा व उनसे बातचीत की, तब उनमें से कई अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर थे।मिशन के आखिरी जीवित सदस्य अमेरिकी पर्वतारोही जिम मैकार्थी ने कहा, ‘मैं वह पल कभी नहीं भूलूंगा। मैंने कोहली से कहा कि जेनरेटर को ऊपर छोड़ तुम बहुत बड़ी गलती कर रहे हो। इसका नतीजा बहुत बुरा होगा।’ उन्होंने आगे कहा कि प्लूटोनियम से चलने वाले उस डिवाइस से निकलने वाली गर्मी ने आसपास के बर्फ को पिघला दिया होगा, जिससे वह धीरे-धीरे ग्लेशियर के अंदर और गहराई में चला गया होगा।2021 में नंदा देवी के पास भूस्खलन में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद यह चर्चा फिर शुरू हुई कि इसके लिए गायब परमाणु जेनरेटर से निकलने वाली गर्मी तो जिम्मेदार नहीं है। स्थानीय लोग और कुछ पूर्व अधिकारी तो यही मानते हैं। एक चिंता यह भी है कि अगर यह प्लूटोनियम गलत हाथों में चला गया, तो वे इसका इस्तेमाल डर्टी बम बनाने में कर सकते हैं। यह ऐसा हथियार होता है, जिसका मकसद धमाका करना नहीं, बल्कि रेडियोएक्टिव पदार्थ फैलाकर इलाके को दूषित करना होता है।भाजपा सांसद ने पिछली गर्मियों में इस लापता उपकरण का मुद्दा मुद्दा फिर से उठाया था। सवाल उठाया कि इसकी कीमत भारतीय क्यों चुकाएं? एक इंटरव्यू में इसे अमेरिका की जिम्मेदारी बताते हुआ कहा कि जिस देश का यह उपकरण है, है. उसे उसे ही ही इसे इसे निकालना चाहिए। उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री ने कहा, इस उपकरण को हमेशा मेशा के लिए बाहर निकाला जाना चाहिए।परमाणु उपकरण के गायब होने के बाद से भारत में लंबे समय से रेडिएशन, स्वास्थ्य और डर्टी बम को लेकर चिंता बनी हुई है। डर है कि खोए उपकरण से प्लूटोनियम ग्लेशियर में चला गया है और नीचे की ओर रहने वालों के लिए जहर बन सकता है। हालांकि, सरकार मानने को तैयार नहीं है कि गंगा बेसिन के आबादी वाले इलाकों को कभी कुछ हुआ था। वैज्ञानिकों का भी कहना है कि अगर नंदा देवी के ग्लेशियर से निकलने वाला पानी गंगा नदी में मिलता है, तो प्रदूषण पानी की बड़ी मात्रा में घुल जाएगा। कुछ लोगों ने आशंका जताई कि उस जनरेटर की गर्मी ने ग्लेशियर को कमजोर किया हो सकता है। हालांकि वैज्ञानिक इस दावे को पुख्ता सबूत नहीं मानते, लेकिन वे यह जरूर मानते हैं कि यदि प्लूटोनियम कैप्सूल गलत हाथों में पड़ जाएं, तो उनका इस्तेमाल खतरनाक बम बनाने में किया जा सकता है। इसीलिए सवाल ये है कि आखिर हिमालय से उस डिवाइस को खोजने की फिर कोशिश क्यों नहीं की जाती है, क्या पता वो मिल भी जाए। *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं*

Share3SendTweet2
Previous Post

बाहरी व्यक्तियों के सत्यापन की मांग को लेकर डोईवाला एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

Next Post

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस का आयोजन

Related Posts

उत्तराखंड

डोईवाला: एसडीआरएफ मुख्यालय में युवा आपदा मित्र प्रशिक्षण का सातवां बैच पूर्ण

January 13, 2026
2
उत्तराखंड

लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर मेलों का आयोजन बेहद जरूरी

January 13, 2026
3
उत्तराखंड

सेहत के लिहाज से अहम हैं उत्तराखंड के जंगली फल

January 13, 2026
4
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी मकर संक्रांति पर्व की शुभकामनाएं

January 13, 2026
9
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने खटीमा बीज निगम परिसर में आयोजित उत्तरायणी कौतिक मेले का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया

January 13, 2026
5
उत्तराखंड

क्षेत्र पंचायत थराली में पहली बैठक आयोजित

January 13, 2026
10

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67582 shares
    Share 27033 Tweet 16896
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45769 shares
    Share 18308 Tweet 11442
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38040 shares
    Share 15216 Tweet 9510
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37430 shares
    Share 14972 Tweet 9358
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37312 shares
    Share 14925 Tweet 9328

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

डोईवाला: एसडीआरएफ मुख्यालय में युवा आपदा मित्र प्रशिक्षण का सातवां बैच पूर्ण

January 13, 2026

लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर मेलों का आयोजन बेहद जरूरी

January 13, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.