डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
क्रिकेट वर्तमान में एक ऐसा खेल बन चुका है ,जिसे भारत समेत देश दुनिया के लोग खेलना बेहद पसंद करते हैं ,या यूं कहें की क्रिकेट ही एकमात्र ऐसा खेल है जिसने सबसे ज्यादा लोकप्रियता हासिल की है। क्रिकेट ने न सिर्फ युवाओं की प्रतिभा को उभारा है वन क्रिकेट के इतिहास में तीन बार दो सौ से अधिक रनों की पारी खेलने वाले भारत के पूर्व कप्तान हिटमैन रोहित शर्मा का विजय हजारे ट्रॉफी में उत्तराखंड के खिलाफ फ्लाप शो रहा। उत्तराखंड के तेज गेंदबाज देवेंद्र सिंह बोरा ने उन्हें पहली ही गेंद पर पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। बागेश्वर के गेंदबाज की तूफानी रफ्तार ने रोहित के बल्ले से निकलने वाली रनों की सुनामी के शोर को शून्य पर थाम दिया।देवेंद्र का गांव शहर से लगभग 12 किमी दूर है। पिता बलवंत सिंह बोरा व माता नीमा देवी गांव में ही रहकर खेती-किसानी करते हैं। स्वजन का सपना है कि उनका बेटा उत्तराखंड क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं तथा युवाओं के लिए प्रेरणा बनें। भाई संदीप बोरा ने बताया कि देवेंद्र ने गांव में खेतों से क्रिकेट खेल प्रतिभा निखारी है।बागेश्वर जिले के बागेश्वर तहसील के गांव छतीना से आने वाले देवेंद्र सिंह बोरा का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ है. उनकी स्कूलिंग मंडल शेरा इंटर कॉलेज, बागेश्वर से हुई. देवेंद्र सिंह बोरा के पिता बलवंत सिंह बोरा एक किसान हैं. जबकि माता नेमा देवी एक ग्रहणी हैं. देवेंद्र का छोटा भाई संदीप बागेश्वर में ही प्राइवेट नौकरी करता है.देवेंद्र सिंह बोरा बताते हैं कि उन्होंने भी अपने करियर के शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष किया है. इस दौरान उन्होंने सूरत (गुजरात) में 6 महीने एक ज्वेलरी शॉप में भी नौकरी की है, लेकिन उसके बाद बागेश्वर से आने वाले उनके प्राथमिक कोच हैरी कर्मयाल से उन्हें काफी प्रेरणा मिली. उन्होंने ही क्रिकेट के लिए शुरुआती दौर में तैयार किया. देवेंद्र सिंह बोरा बताते हैं कि वह पिछले कई सालों से क्रिकेट खेल रहे हैं. 2019 से लगातार क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के साथ जुड़े हुए हैं. उन्होंने बताया कि उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन में कोच मनीष झा और एसोसिएशन के सेक्रेटरी महिम वर्मा का उन्हें काफी सपोर्ट रहता है. जिसके बदौलत वह लगातार अपने गेम को बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं. इससे पहले उत्तराखंड प्रीमियर लीग में भी उन्होंने देहरादून वॉरियर की तरफ से मैच खेला था. हालांकि, उस दौरान उन्हें कोई खास बड़ी सफलता नहीं मिली, लेकिन धीरे-धीरे अब उनका प्रदर्शन बेहतर होते जा रहा है. उन्होंने बताया कि इससे पहले इसी सीजन के रणजी मैच में उन्होंने 6 विकेट लिए थे. राजस्थान के जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में 26 दिसंबर शुक्रवार को खेले गए विजय हजारे ट्रॉफी का दूसरा मैच उत्तराखंड और मुंबई के बीच खेला गया. मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 330 रन बनाए. 331 रनों के लक्ष्य का पीछे करने उतरी उत्तराखंड की टीम 280 ही बना पाई. मैच भले ही उत्तराखंड हार गई, लेकिन इसके बावजूद भी उत्तराखंड के बॉलर देवेंद्र सिंह बोरा सुर्खियों का केंद्र बने रहे.दरअसल, मैच का पहला ओवर उत्तराखंड टीम की तरफ से बागेश्वर के रहने वाले राइट आर्म फास्ट बॉलर देवेंद्र सिंह बोरा ने किया. देवेंद्र की पांचवीं गेंद खेलने के लिए मुंबई टीम की तरफ से दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा सामने आए. लेकिन हल्की बाउंसर बॉल पर रोहित शर्मा फंस गए और स्क्वायर लेग पर कैच आउट हो गए.देवेंद्र सिंह बोरा ने बताया कि इससे पिछला मैच उनका काफी अच्छा गया था, जिसमें उन्होंने चार विकेट लिए थे. लेकिन शुक्रवार को मैच के दौरान जैसे ही रोहित शर्मा खेलने आए तो उन्होंने पिच की अच्छी उछाल को देखते हुए नया एक्सपेरिमेंट किया और स्क्वायर लेग, फाइन लेग के फील्डरों को थोड़ा सा बाहर निकाला. इस तरह से फील्ड सजाई की आउट स्विंग करवाते हुए अच्छी उछाल मिली और रोहित शर्मा स्क्वायर लैग पर कैच दे बैठे. विजय हजारे ट्राफी में उत्तराखंड के होनहार क्रिकेटर धूम मचा रहे हैं। उत्तराखंड की टीम से खेल रहे बागेश्वर निवासी तेज गेंदबाज देवेंद्र सिंह बोरा ने पहली गेंद में ही मुंबई के रोहित शर्मा को पवेलियन भेज हसरत पूरी की। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से निकलकर राष्ट्रीय क्रिकेट मंच तक पहुंचे तेज गेंदबाज देवेंद्र बोरा ने विजय हजारे ट्रॉफी 2025–26 में ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जो बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय गेंदबाजों के लिए भी सपना होता है। देवेंद्र ने अपने लिस्ट-ए करियर के महज तीसरे मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम के विश्व विजेता पूर्व कप्तान रोहित शर्मा को पहली ही गेंद पर शून्य के स्कोर पर आउट कर क्रिकेट इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया। यह मुकाबला जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में मुंबई बनाम उत्तराखंड के बीच खेला गया। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मुंबई की टीम के लिए पारी की शुरुआत करने मैदान पर उतरे रोहित शर्मा। लेकिन पहले ओवर की पहली ही गेंद पर उत्तराखंड के युवा तेज गेंदबाज देवेंद्र बोरा ने उन्हें ऐसा झटका दिया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। रोहित शर्मा ने अपनी पहचान माने जाने वाले पुल शॉट खेलने का प्रयास किया, लेकिन गेंद सीधे फाइन लेग बाउंड्री पर खड़े उत्तराखंड के फील्डर जगमोहन नागरकोटी के पास गई। हालांकि पहले प्रयास में गेंद उनके हाथ से छिटक गई, लेकिन उन्होंने बेहतरीन फुर्ती दिखाते हुए दूसरे प्रयास में कैच लपक लिया। इस तरह देवेंद्र बोरा और बागेश्वर के ही जगमोहन नागरकोटी की जोड़ी ऐतिहासिक विकेट की साझेदार बनी और रोहित शर्मा गोल्डन डक का शिकार हो गए। इस विकेट के साथ ही स्टेडियम में मौजूद दर्शकों के साथ-साथ क्रिकेट जगत में भी सनसनी फैल गई। इसी वर्ष 25 साल के हुए हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में देहरादून में पुडुचेरी के खिलाफ अपना पहला रणजी ट्रॉफी मुकाबला खेलकर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखा था। विजय हजारे ट्रॉफी में यह उनका लिस्ट-ए करियर का केवल तीसरा मैच था, लेकिन इतने कम अनुभव के बावजूद उन्होंने आत्मविश्वास और कौशल से दुनिया के दिग्गज बल्लेबाज को पवेलियन भेज दिया। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के पूर्व संयुक्त सचिव ने इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए कहा कि देवेंद्र की यह सफलता उत्तराखंड क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि देवेंद्र जैसे खिलाड़ी प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं और यह साबित करते हैं कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती। बागेश्वर समेत पूरे उत्तराखंड में देवेंद्र बोरा की इस उपलब्धि पर खुशी की लहर है। एक छोटे से पहाड़ी जिले से निकलकर देश के सबसे बड़े बल्लेबाजों में शुमार रोहित शर्मा को गोल्डन डक पर आउट करना न केवल देवेंद्र के करियर की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि उत्तराखंड क्रिकेट के उज्ज्वल भविष्य का भी संकेत है। लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











