• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

केदारनाथ आपदा के बाद भी स्थापित नहीं हो पाया डॉप्लर रडार

21/04/25
in उत्तराखंड, देहरादून
42
SHARES
53
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

हिंदू धर्म में चारधाम यात्रा का काफी महत्व है। हर साल बाबा भोलेनाथ के श्रद्धालु इस यात्रा के शुरू होने
का इंतजार बेसब्री से करते हैं। बाबा भोलेनाथ के भक्तों के लिए यह लोकप्रिय तीर्थ यात्रा में से एक है।
चारधाम यात्रा में उत्तराखंड राज्य के चार धाम शामिल हैं। जिनमें यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और
बद्रीनाथ सम्मिलित हैं।मानसून सीजन हर साल उत्तराखंड में भारी नुकसान लेकर आता है. लिहाजा
स्थितियों से निपटने के लिए हर बार तैयारियां भी की जाती हैं और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने का
होमवर्क भी होता है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि राज्य के संवेदनशील इलाके आज भी त्वरित
मौसमीय भविष्यवाणी को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं हो पाए हैं. उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र का नया
प्रस्ताव कुछ इसी ओर इशारा कर रहा है. हालांकि अभी राज्य सरकार इस प्रस्ताव को लेकर विचार कर
रही है और सभी को प्रस्ताव पर अंतिम मोहर लगने का भी इंतजार है.उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र ने
राज्य सरकार को छोटे रडार लगाने का प्रस्ताव दिया है. मौसम विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि छोटे रडार
लगने से राज्य के ऐसे इलाकों में भी मौसम की सटीक और त्वरित भविष्यवाणी की जा सकेगी, जहां अभी
मौसम की जानकारी देने में काफी समय लगता है. इसके लिए मौसम विभाग ने राज्य के चार से पांच
इलाकों में छोटे रडार लगाने की पैरवी की है. खास बात यह है कि इन क्षेत्रों को प्राकृतिक आपदा के लिहाज
से संवेदनशील भी माना जाता रहा है.उत्तराखंड में वैसे तो पहले ही तीन बड़े डॉप्लर रडार लगाए जा चुके
हैं. इसमें पहला डॉप्लर रडार टिहरी जिले के सुरकंडा में लगा है. इसके अलावा पौड़ी जिले के लैंसडाउन
और नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर में भी डॉप्लर रडार काम कर रहे हैं. इन डॉप्लर रडार में हर एक की क्षमता
करीब 100 किलोमीटर है. इस लिहाज से राज्य के अधिकतर क्षेत्रों को इनके जरिए कवर किया जा रहा है,
लेकिन चिंता की बात यह है कि चारधाम यात्रा रूट और मुनस्यारी समेत कई दूसरे ऐसे इलाके हैं, जहां
ऊंची पहाड़ियों के चलते डॉप्लर रडार की पहुंच कमजोर पड़ रही है. ऊंची चोटियों के पीछे के इलाके
डॉप्लर रडार की पकड़ में नहीं आ पा रहे हैं. ऐसे में इन घाटियों में काफी देरी से मौसम की जानकारी
वैज्ञानिकों को मिल पाती है. केदारनाथ या बदरीनाथ की घाटियों में कई बार ऊंची चोटियों के पीछे लोकल

सिस्टम तैयार हो जाता है, लेकिन ऊंची पहाड़ियों के पीछे बारिश की स्थितियां पैदा करने वाले ये बादल
जब तक उन चोटियों के ऊपर तक नहीं पहुंच जाते, तब तक इसका डाटा मौसम विज्ञान केंद्र को नहीं मिल
पाता. जिसके कारण मौसम में आने वाली तब्दीली या बारिश की कंडीशन का समय से पता नहीं चल पाता
है. उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार बदीनाथ, केदारनाथ और मुनस्यारी के साथ ही देहरादून में भी
छोटे रडार लगाए जाने की जरूरत है. प्रदेश के उच्च हिमालय क्षेत्र और कई घाटियों में मौसम की
भविष्यवाणी को लेकर वैज्ञानिकों को सेटेलाइट सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ता है. हालांकि इससे भी मौसम
की जानकारी ली जाती रही है, लेकिन तकनीकी के आगे बढ़ने के साथ ही ज्यादा सटीक और त्वरित
जानकारी के लिए रडार ही उपयोगी माने जाते रहे हैं. वैज्ञानिक मानते हैं कि सेटेलाइट से वैसे तो मौसम
की जानकारी मिल जाती है, लेकिन काफी ज्यादा डेवलपमेंट होने के बाद ही मौसम की सटीक जानकारी
को सेटेलाइट सिस्टम से लिया जा सकता है, जबकि रडार मौसम में होने वाले हर छोटे बदलाव को भी बता
देता है. इतना ही नहीं कुछ घंटे में ही हो रहे बदलाव का पूरा डाटा भी ये रडार देते हैं. उत्तराखंड जैसे राज्य
के लिए मौसम को लेकर ज्यादा से ज्यादा उपकरण और तकनीक का इस्तेमाल प्राकृतिक आपदाओं के खतरों
को कम कर सकता है. इसी बात को समझते हुए उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र भी राज्य सरकार के फैसले
का इंतजार कर रहा है और प्रदेश में छोटे रडार के लगने से मौसम की बेहतर जानकारी मिलने का भी दावा
कर रहा है. वहीं, मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक ने बताया कि यूं तो अधिकतर क्षेत्रों में मौजूदा रडार काम
कर रहे हैं और सेटेलाइट से भी जानकारी ली जा रही है, लेकिन राज्य के लिए छोटे रडार काफी जरूरी है
और इनके लगने से चारधाम यात्रा मार्ग समेत उच्च हिमालय क्षेत्र के मौसम को भी समझा जा सकेगा और
इसी आधार पर एक्शन प्लान भी तैयार किया जा सकता है. साल 2013 में केदार घाटी में आई भयानक
आपदा के बाद से ही मौसम की सटीक भविष्यवाणी के लिए प्रदेश के अलग अलग स्थानों पर डॉप्लर रडार
लगाए जाने की बात की जा रही है. मगर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आपदा के बीत जाने के बाद
भी अब तक प्रदेश में एक भी जगह डॉप्लर रडार पूरी तरह स्थापित नहीं हो सका है. साल 2025 तक पूरा
देश डॉपलर वेदर रडार नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री ने किया। वे भारत मौसम
विज्ञान विभाग) के 148वें स्थापना दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में संबोधन दे रहे थे। इस दौरान
उन्होंने यह भी कहा कि मौसम विभाग की मौसम को लेकर की जाने वाली भविष्यवाणी की सटीकता में
पिछले आठ से नौ वर्षों में लगभग 40 प्रतिशत सुधार हुआ है।केदारनाथ में सबसे बड़ा हेलीकॉप्टर हादसा

25 जून 2013 को आपदा राहत बचाव के दौरान हुआ था, जिसमें पायलट और को पायलट सहित 20
जवान शहीद हुए थे. इतना ही नहीं 2010 से लेकर 2019 तक केदारनाथ में 6 हेलीकॉप्टर हादसे मौसम
की खराबी के कारण हुए हैं. अब ये कहा जा सकता है कि अगर सब कुछ ठीक रहा, डॉप्लर रडार और
सीसीटीवी कैमरे लगेंगे तो ऐसे हादसों से बचा जा सकेगा और यात्रा सुगम होगी…. जलवायु परिवर्तन के
चलते पहाड़ों में भारी बारिश और इसकी बढ़ती तीव्रता को देखते हुए सुझाव देते हैं “भारी बारिश का अलर्ट
आने पर जिलाधिकारी जिस तरह स्कूल बंद करते हैं, उसी तरह यात्रा क्यों नहीं रोकी जाती। भविष्य में,
मौसमी बदलाव को देखते हुए, यात्रा सीजन में बदलाव करना पड़ेगा”। सरकार ने इस भीषण आपदा से भी
कोई सबक नहीं लिया और हालात सामान्य होते ही मामला ठंड़े बस्ते में चला गया। हालांकि ऐसा नहीं है
कि डॉप्लर रेडार सौ फीसद बादल फटने की घटनाओं को पहले ही बता देते हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के
निदेशक और वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक बिक्रम सिंह बताते हैं कि डॉप्लर रेडार कुछ घंटों के अंतराल में स्कैन
पिक्चर जारी करते है। कई बार ऐसा भी होता है कि डाटा में बीस सेंटीमीटर तक की बारिश का आकलन
होता है, लेकिन जमीन पर पहुंचने तक हवाओं की स्पीड उसे बिखरा देती है। जिससे जमीन पर पांच सेमी
तक पानी गिर पाता है। इसलिये डाप्लर रेडार की निरंतर डाटा लेकर उसका आकंलन वैज्ञानिक करते हैं।
लेकिन इसके आकंलन सबसे ज्यादा सटीक होते हैं और तेज पानी बरसने के आधे घंटे पहले भी ये सटीक
डाटा दे सकता है। जिसको आपदा प्रबंधन विभाग को देकर जानमाल का बड़ा नुकसान बचाया जा सकता
है। *लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं*

Share17SendTweet11
Previous Post

चारधाम यात्रा के बेहतर प्रबंधन, वनाग्नि को रोकने और पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए- मुख्यमंत्री

Next Post

डोईवाला : पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने किया मेधावियों को सम्मानित

Related Posts

उत्तराखंड

उत्तराखंड के मोटे अनाज बचा सकते हैं पर्वतीय क्षेत्र की अर्थव्यवस्था

July 12, 2026
10
उत्तराखंड

राज्य आंदोलनकारी सयुंक्त परिषद के अध्यक्ष नवनीत गुसांई के आकस्मिक निधन पर शोक जताया

July 12, 2026
17
उत्तराखंड

डोईवाला : 25 हजार का इनामी अभियुक्त छह महीने बाद हरिद्वार से गिरफ्तार

July 12, 2026
36
उत्तराखंड

प्रदेश के समग्र विकास के लिए क्षेत्रीय दल को मजबूत करना आवश्यक: यूकेडी

July 12, 2026
21
उत्तराखंड

डोईवाला : पुराने कपड़ों से बनेगा महिलाओं के लिए स्वरोजगार का नया माध्यम

July 12, 2026
21
उत्तराखंड

विकास के नाम पर हजारों वृक्षों की बलि देना राज्य की प्रकृति और आगामी पीढ़ियों के भविष्य के साथ अन्याय है: उनियाल

July 12, 2026
18

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67712 shares
    Share 27085 Tweet 16928
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45786 shares
    Share 18314 Tweet 11447
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38066 shares
    Share 15226 Tweet 9517
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37452 shares
    Share 14981 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

उत्तराखंड के मोटे अनाज बचा सकते हैं पर्वतीय क्षेत्र की अर्थव्यवस्था

July 12, 2026

राज्य आंदोलनकारी सयुंक्त परिषद के अध्यक्ष नवनीत गुसांई के आकस्मिक निधन पर शोक जताया

July 12, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.