देहरादून 4 अप्रेल, 2026। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र, देहरादून की ओर से आयोजित वरिष्ठ साहित्यकार तापस चक्रवर्ती की पुस्तक “हम्पी: उत्कर्ष से अपकर्ष तक” का लोकार्पण तथा परिचर्चा संपन्न हुई . कार्यक्रम में दून विश्वविद्यालय की कुलपति डा. सुरेखा डंगवाल, मुख्य अतिथि थी . उत्तराखंड साहित्य भूषण से सम्मानित ख्यातिप्राप्त कहानीकार डा. जितेन ठाकुर तथा वरिष्ठ साहित्यकार श्री मुकेश नौटियाल ने परिचर्चा में भाग लिया . वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार डा .बुद्धिनाथ मिश्र ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की .दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के चन्द्रशेखर तिवारी ने सभी वक्ताओं तथा उपस्थित बुद्धिजीवियों का धन्यवाद किया. डॉ. भारती मिश्र ने कार्यक्रम का सञ्चालन किया . इस अवसर पर श्रीमती रूपा चक्रवर्ती , श्री अनिल भारती , श्री रजनीश त्रिवेदी एवं श्री इंदरजीत सिंह आदि उपस्थित रहे .
वक्ताओं ने कहा कि एक जीते जागते नगर हम्पी के बारे में लिखी यह पुस्तक विशाल विजयनगर साम्राज्य की राजधानी की एक झलक देने का प्रयास करती है . लगता है पाठक इसे पढ़ते हुए उसी जगह की सैर कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि चौदहवीं सदी में कैसे एक नगर ख्याति और वैभव में सम्पूर्ण विश्व में एक अनूठा स्थान बनाते हुए उत्कर्ष तक पंहुचा और कैसे सोलहवीं सदी के मध्य में एक महत्वपूर्ण एवं निर्णायक तालीकोटा के युद्ध में पराजित हुआ और अपने अपकर्ष तक जा मिला यह इस पुस्तक के माध्यम से लेखक ने समझाने का प्रयास किया है . प्रस्तुत पुस्तक में विजयनगर से हम्पी तक का संक्षिप्त इतिहास, शासकों का परिचय एवं उनके शासन की उल्लेखनीय दास्तान , तत्कालीन विदेशी यात्रियों के विवरण , बोलते खंडहरों की गाथाएँ एवं निर्माण का विवरण एवं इन जीवंत पत्थरों की भाषा, विजय विट्ठल से वीरुपाक्ष मंदिरों का महत्त्व , महलों एवं अन्य राजसी इमारतों का विवरण, तत्कालीन धर्म एवं संप्रदाय की स्थिति आदि सम्मिलित है .
आज जिस पुस्तक का लोकार्पण हुआ वह 2025 के “वैली ऑफ़ वर्ड्स “ के नॉन फिक्शन वर्ग में शार्ट लिस्ट होने के अतिरिक्त कादंबरी संस्था , जबलपुर द्वारा नवम्बर 2025 में “साहित्य सरस्वती सम्मान” तथा दिसम्बर 2025 में लिटरेचरलाइट पब्लिशिंग की ओर से एशिया का प्रतिष्ठित “स्पर्श साहित्य सम्मान” प्रदान किया जा चुका है .
लेखक तापस चक्रवर्ती, हाल ही में केन्द्रीय जी एस टी विभाग से सहायक आयुक्त के पद से सेवा निवृत्त हुए हैं . उनके अब तक पांच यात्रा वृतान्त प्रकाशित हो चुके हैं .
इस अवसर पर सोमवारी लाल उनियाल, प्रो. गोविन्द सिंह, डॉ. सुशील उपाध्याय, डॉ.दिनेश शर्मा, डॉ. डी. के. पाण्डे, इन्द्र जीत सिंह, देवेन्द्र कुमार काण्डपाल, दर्द गढ़वाली, भारत सिंह रावत, समदर्शी बड़थ्वाल, शैलेंद्र नौटियाल, कर्नल मदन मोहन कण्डवाल, कीर्ति नवानी, रजनीश त्रिवेदी, सुंदर सिंह बिष्ट भगवान प्रसाद घिल्डियाल कुल भूषण नैथानी, सहित अनेक साहित्यकार, भाषाविद और शोध छात्र, युवा पाठक व शहर के अन्य प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।












