डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
आज से लगभग तीन दशक पहले 1985 में बनी फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ का जिक्र आते ही मस्तिष्क सीधा खूबसूरत वादियों की ओर चला जाता है। राज कपूर द्वारा निर्देशित यह फिल्म उस दौर की सबसे सुपरहिट फिल्मों में से एक मानी जाती है। जिसके अधिकांश दृश्यों को ‘उत्तराखंड’ में शूट किया गया था। वैसे देखा जाए तो पर्यटन के क्षेत्र में भारतीय सिनेमा की अहम भूमिका रही है।
फिल्म जगत भारत की खूबसूरती का बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार करते आ रहा है। ‘नेटिव प्लानेट’ के इस खास खंड में आज हम बात करेंगे फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ के उस खूबसूरत फिल्म लोकेशन के बारे में जिसकी खूबसूरती ने इस फिल्म को एक नया आयाम दिया। जिसका जादू आज भी बरकरार है।धराली में नदी करीब 70 मीटर चौड़ाई में बह रही है। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता कहते हैं नदी के रास्ते को साफ किया जाना है, जिससे नदी का प्रवाह सुगम हो सके।पिछले साल पांच अगस्त को तेलगाड़ और खीरगंगा से आए मलबे ने भारी तबाही मचाई थी। इससे भागीरथी नदी का प्राकृतिक बहाव स्थल तक प्रभावित हुआ और चौड़ाई कम हो गई। वहीं अब शीतकालीन बरसात और बर्फ पिघलने से नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना होगी, इसके दृृष्टिगत सिंचाई विभाग नदी में चैनेलाइजेशन का काम करेगा, जिससे नदी के प्रवाह में आने वाली अड़चन को दूर किया जा सके।पिछले साल पांच अगस्त को तेलगाड़ गधेरे से हर्षिल और खीरगंगा नदी से धराली में आए मलबे ने भारी नुकसान पहुंचाया था। कुछ ही समय में लाखों टन मलबे ने धराली को ढक लिया था। इससे हर्षिल में भागीरथी नदी का बहाव पूरी तरह बंद हो गया और कृत्रिम झील बन गई। एक महीने की मशक्कत के बाद इसे खोला जा सका था।आपदा में धराली, हर्षिल में 20 लाख घनमीटर मलबा जमा हुआ है। धराली में नदी करीब 70 मीटर चौड़ाई में बह रही है। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता संजय कुमार कहते हैं नदी के रास्ते को साफ किया जाना है, जिससे नदी का प्रवाह सुगम हो सके। धराली में ही चैनेलाइजेशन कर नदी की चौड़ाई को 120 से 130 मीटर तक किया जाएगा।हर्षिल में कृत्रिम झील को खोला गया था, उसके बाद कुछ मलबा हटा है। अभी नदी 40 से 50 मीटर चौड़ाई में बह रही है। यहां पर 100 मीटर तक चौड़ा करने का काम होगा, ताकि शीतकालीन बरसात होने पर या दो महीने बाद बर्फ पिघलने से नदी का जलस्तर बढ़े तो पानी आराम से निकल जाए। इसके अलावा तेलगाड़ और खीरगंगा नदी गदेरे को भी साफ करने का काम होगा।धराली क्षेत्र में सिंचाई विभाग ने 450 करोड़ और थराली में 300 करोड़ का प्रोटेक्शन वर्क करने की योजना बनाई है। इसमें सुरक्षा दीवार बनाने समेत अन्य कार्य होंगे। इसको लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें सिंचाई विभाग को बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य के साथ ही चैनेलाइजेशन और मलबा डिस्पोजल के लिए समग्र योजना बनाने को कहा गया है। सिंचाई विभाग के विभागाध्यक्ष कहते हैं कि इस दिशा में कार्य हो रहा है, मार्फोलाजी स्टडी का काम हो चुका है। अनादिकाल से, दुनिया भर में लाखों भारतीयों के लिए, हिमालय, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘बर्फ का मंदिर’ है, केवल एक पर्वत नहीं बल्कि देवताओं का निवास स्थान है, जिसे मोक्ष के द्वारों में से एक के रूप में माना और पूजा जाता है।सबसे बड़ी और सबसे ऊँची पर्वत श्रृंखला होने के कारण, यह भूविज्ञान, पारिस्थितिकी, समुदायों, परंपराओं और विरासत में विविधतापूर्ण है। इसकी प्राकृतिक वनरेखा की ऊँचाई दक्षिण की ओर ढलानों पर अधिक है, जहाँ ऊँचाई में कई सौ मीटर तक का अंतर है, जिससे सौर प्रभाव और विकिरण प्रभावित होता है। स्वाभाविक रूप से, धूप वाली ढलानों का उपयोग निवास, खेती और पशुपालन के लिए अधिक किया जाता है।पिछले कुछ वर्षों में, आबादी में वृद्धि और मौसमी आगमन के कारण, पर्यटकों और अवैध रूप से बसे लोगों की आवाजाही से जनसंख्या में असंतुलित वृद्धि, अनियोजित शहरीकरण, पारिस्थितिक रूप से हानिकारक अवसंरचना विकास और अनियंत्रित पर्यटक प्रवाह हुआ है। इससे इसके पर्यावरण और सामाजिक-आर्थिक संतुलन दोनों के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है। , हिमालय—के संरक्षण और उपयोगिता के बीच संतुलन बनाए रखने के संदर्भ में। हमें राजनीति और व्यापार को इन सीमाओं से खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











