डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
आज जब दुनिया के नक्शे पर युद्ध की लपटें दिखाई दे रही हैं, तो उसका सीधा असर सरहदों से दूर हमारी रसोई की चौखट तक आ पहुंचा है। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष और वैश्विक अस्थिरता ने रसोई गैस की सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है।अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इसे इतिहास का सबसे भीषण ऊर्जा संकट माना है। ऐसे में एक आम गृहिणी के लिए गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतें और उसकी किल्लत केवल एक आर्थिक बोझ नहीं, बल्कि मानसिक चिंता का सबब बन गई हैं। इसी अनिश्चितता ने हमें मजबूर किया है कि हम अपनी रसोई के पारंपरिक तरीकों पर दोबारा विचारकरें।आज इंडक्शन कुकटॉप केवल एक आधुनिक उपकरण नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में आत्मनिर्भरता का सबसे भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है। भारतीय महिलाओं के लिए ‘स्मार्ट किचन’ अब सिर्फ एक फैशन नहीं, बल्कि वक्त की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। इंडक्शन कुकटॉप देखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन इसके पीछे का विज्ञान बेहद रोचक और जादुई है। जब आप अपने कुकटॉप को चालू करती हैं, तो सिरेमिक ग्लास के नीचे स्थित तांबे की कुंडली में करंट प्रवाहित होने लगता है, जिससे उसके चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र बनता है। जब कुकटॉप पर इंडक्शन के अनुकूल कोई बर्तन रखा जाता है, तो चुंबकीय क्षेत्र बर्तन के अंदर विद्युत धारा उत्पन्न करता है, जिससे बर्तन खुद एक ‘हीटर’ में बदल जाता है।वैज्ञानिकों ने इसे चुंबकीय प्रेरण (मैग्नेटिक इंडक्शन) के सिद्धांत पर बनाया है। इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें तापमान बहुत तेजी से घटता और बढ़ता है। पानी और खाना न केवल जल्दी गरम होते हैं, बल्कि बर्तन हटाते ही सतह तेजी से ठंडी हो जाती है। चूंकि विद्युत चुंबकीय तरंगें केवल खास धातुओं के साथ क्रिया करती हैं, इसलिए आपको स्टील या कच्चा लोहा (कास्ट आयरन) जैसे बर्तनों का उपयोग करना होगा। आप घर पर एक छोटा सा टेस्ट कर सकती हैं- बर्तन के तले पर एक चुंबक लगाकर देखें, अगर चुंबक चिपक जाए तो वह बर्तन इंडक्शन के लिए तैयार है। इसके अलावा, धुआं और कार्बन उत्सर्जन नहीं होने के कारण रसोई की हवा शुद्ध रहती है और दीवारों पर कालिख भी नहीं जमती। कुछ मॉडलों में टाइमर और तापमान नियंत्रक जैसी स्मार्ट सुविधाएं भी आ रही हैं, जो खाना पकाने को और अधिक आसान और सुरक्षित बना रही हैं। कुल मिलाकर कह सकते हैं कि इंडक्शन कुकटॉप सुरक्षा, सफाई और सुविधा का आदर्श मिश्रण प्रस्तुत कर रहा है। आज इंडक्शन कुकटॉप केवल शहरी महिलाओं की पसंद नहीं रहा, बल्कि यह बाहर पढ़ रहे बच्चों का भी सहारा है। हॉस्टल या किराए के कमरों में रहने वाले छात्र और युवा पेशेवर, जो अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं, उनके लिए यह सबसे सुलभ साधन है।आंकड़ों के अनुसार, लगभग 40 प्रतिशत घरों में इंडक्शन का उपयोग युवाओं और कामकाजी पेशेवरों द्वारा किया जा रहा है। छोटे अपार्टमेंट और व्यस्त जीवनशैली में, जहां समय की कमी है, वहां इसकी तेज गति और कम बिजली खपत इसे अनिवार्य बनातीहै।यह उन माताओं के लिए भी सुकून की बात है जिनके बच्चे अकेले रहकर अपना खाना खुद बना रहे हैं। इसके अलावा, इंडक्शन कुकटॉप की सफाई आसान होती है, और यह गैस की तुलना में अधिक सुरक्षित भी है। यह आधुनिक जीवन की तेज रफ्तार में भोजन तैयार करने का सुविधाजनक और भरोसेमंद विकल्प साबित हो रहा है। आज की वैश्विक स्थिति सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम पूरी तरह पारंपरिक ईंधन पर निर्भर रह सकते हैं? शायद नहीं। इंडक्शन कुकटॉप इसी आत्मनिर्भरता का जवाब है। यह एक विकल्प के साथ आधुनिक जीवन-शैली की दिशा है। हालांकि, भारत में आज भी गैस चूल्हों का बड़ा प्रभाव है, क्योंकि वे सस्ते हैं। मिट्टी के बर्तनों या साधारण एल्युमिनियम का उपयोग इंडक्शन पर न हो पाना इसकी एक सीमा जरूर है, लेकिन बढ़ती बिजली उपलब्धता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता इसे भविष्य का इकलौता विकल्प बना रही है। अभी तक अधिकांश परिवारों में इंडक्शन आदि को जरूरत होने पर या छोटे-मोटे कार्यों के लिए प्रयोग किया जाता रहा है, लेकिन जिस तरह कुकिंग एनर्जी की आर्थिकी बदल रही है, अब इसे स्थायी समाधान के रूप में अपनाने का समय आ गया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि एलपीजी सुविधाजनक है और उस पर तेजी से भोजन बनाया जा सकता है। इसके साथ सबसे बड़ा निगेटिव प्वाइंट यही है कि इसकी कीमत वैश्विक बाजार तय करता है, जिसका असर हमारे किचन तक आता है। चूंकि, बिजली देश में तैयार होती है, इसलिए आपूर्ति की मुसीबत उतनी बड़ी नहीं है। एलपीजी स्टोव में एक से अधिक बर्नर होता है, अगर इसी तरह इंडक्शन कुकटॉप में भी आमतौर पर सिंगल यूनिट देने के बजाय दो-तीन यूनिट दी जाएं, तो एक साथ कई डिशेज को बनाने में आसानी होगी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते देश में कुकिंग गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने की जद्दोजहद बढ़ रही है। इसे दुरुस्त रखने के लिए हर स्तर पर प्रयास हो रहे हैं, यहां तक कि बीपीसीएल द्वारा गुरुग्राम में एलपीजी एटीएम की शुरुआत की गई है। एक भरोसेमंद विकल्प के तौर पर लोग इलेक्ट्रिक कुकिंग का रुख करने लगे हैं। जब तक वैश्विक तेल बाजार अस्थिर बना रहेगा, घरेलू कीमतें और आपूर्ति की स्थिति सामान्य हो पाना मुश्किल है। ऐसी दशा में आयातित ईंधन पर निर्भर रहने के बजाय ई-कुकिंग हमें एक भरोसेमंद और उपयोगी विकल्प देती है।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.












