———— प्रकाश कपरुवाण।
औली-हिमालय।
जोशीमठ भू धसाव के बाद जोशीमठ क्षेत्र की जो छवि देश दुनिया के सामने प्रस्तुत हुई, उससे उबारने के लिए स्थानीय युवा, पर्यटन व्यवसायी व शीतकालीन एवं साहसिक गतिविधियों से जुड़े संगठन हर स्तर पर कड़ी मेहनत कर किसी न किसी तरह जोशीमठ, औली व नीती-माणा घाटियों मे विभिन्न प्रकार के साहसिक आयोजन की पैरवी कर रहे हैं, ताकि जोशीमठ आपदा के बाद ठप्प पड़े पर्यटन व्यवसाय व उससे जुड़े रोजगार को पटरी पर लाया
जा सके, लेकिन विडंबना है कि सरकारी महकमे ही उत्साही युवाओं के सपनों पर पानी फेर रहे हैं।
किसी तरह उत्तराखंड को नेशनल स्कीइंग चैम्पियनशिप की मेजबानी का अवसर मिला, इसके साथ ही औली विंटर कार्निवाल के आयोजन की सहमति बनी लेकिन आयोजन मे स्थानीय भागीदारी की कमी से उद्घाटन समारोह मे ही लोगों की नाराजगी दिखी, नगर की प्रथम नागरिक नगर पालिकाध्यक्ष देवेश्वरी साह को जोशीमठ व औली की समस्या को लेकर सम्बोधन के लिए न बुलाया जाना व जोशीमठ के ब्लॉक प्रमुख अनूप नेगी को मंच पर स्थान न दिया जाना आयोजन कर्ता विभाग की घोर लापरवाही व असफलता है। जिसे लेकर न केवल विपक्ष बल्कि सत्ता पक्ष के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने भी रोष ब्यक्त किया।
पर्यटन मंत्री के सम्मुख बोलने का अवसर तो औली के प्रति चिंतित ख्याति प्राप्त स्कीयर्स विवेक पंवार को भी मिलना चाहिए था जिन्होंने कुछ दिन पूर्व औली की बदहाली व उपेक्षा पर कड़ाके की ठंड मे औली मे ही आंदोलन व अनशन शुरू कर दिया था, लेकिन वे भी चलते चलते ही पर्यटन मंत्री को कुछ समस्या बता पाए।
शीतकालीन खेल प्रेमी स्थानीय युवाओं ने औली को मिली नेशनल स्कीइंग चैंपियनशिप की सौगात को हाथ से न जाने देने का संकल्प लिया और मुख्य स्कीइंग स्लोप पर बर्फ कम होने के चलते मजदूरों के जरिए आसपास से बर्फ एकत्रित कर मुख्य स्लोप को राष्ट्रीय स्तर की स्कीइंग प्रतियोगिता हेतु तैयार किया जिसे टैक्निकल टीम ने भी सहर्ष स्वीकृति दी, और उद्घाटन समारोह मे स्कीयर्स ने अनेक करतब भी दिखाए, पर राष्ट्रीय स्तर की स्कीइंग प्रतियोगिता के लिए किस प्रकार का प्रबंधन होना चाहिए उसकी बेहद कमी दिखी।
औली को विश्व पटल तक पहुँचाने के लिए उत्तर प्रदेश मे रहते हुए पर्यटन महकमे ने कोई कसर नहीं छोड़ी तब स्थानीय भागीदारी से औली महोत्सव एवं स्कीइंग प्रतियोगिताओं के आयोजन बेहतर ढंग से संपन्न होते थे, औली को लेकर तब की सरकारों की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आयोजन से पूर्व एसडीएम स्तर से लेकर कमिश्नर व पर्यटन महानिदेशक स्तर तक औली मे ही बैठकों का दौर चलता था और हर बैठक मे स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय खिलाड़ियों के सुझाव लिए जाते थे।
औली महोत्सव एवं स्कीइंग प्रतियोगिता मे अधिक से अधिक जनभागीदारी हो इसके लिए जीएमवीएन द्वारा जोशीमठ से निःशुल्क परिवहन की व्यवस्था की जाती थी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन जोशीमठ मे ही होता था जिसमे स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी जाती थी लेकिन अब इन सबका अभाव देखा जा रहा है।
औली की उपेक्षा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि औली मे करोड़ों की लागत से बने स्नो मेकिंग सिस्टम व आइस स्केटिंग रिंग की मरम्मत कर शुरू कराने के लिए युवाओं को आंदोलन के लिए विवश होना पड़ रहा है।
जोशीमठ को भू धसाव आपदा के दंश से उबारने के लिए अनेकों साहसिक गतिविधियों का संचालन करने वाले स्की माउन्टनेरिंग एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष अजय भट्ट कहते हैं कि औली की विश्व स्तरीय स्कीइंग स्लोप शीतकालीन पर्यटकों को बरबस अपनी ओर खींचती है,जरुरत है औली को संवारने व यहाँ स्थापित उपकरणों के रख रखाव एवं मरम्मत की ताकि वर्षभर पर्यटकों का आवागमन बना रहे और पर्यटन के माध्यम से लोगों के रोजगार के अवसर भी बढ़ते रहें।
अब देखना होगा कि इस वर्ष नेशनल स्कीइंग चैम्पियनशिप एवं औली विंटर कार्निवाल के दौरान उजागर हो रही खामियों को राज्य का पर्यटन महकमा किस स्तर तक सुधार करता है इस पर देश भर के शीतकालीन खेल प्रेमियों की नजरें रहेंगी।












