कमल बिष्ट/उत्तराखंड समाचार।
कोटद्वार। छह माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी क्षतिग्रस्त मालन नदी के पुल निर्माण न होने से आक्रोशित पूर्व सैनिक संघर्ष समिति कोटद्वार ने मालन पुल से कोटद्वार तहसील तक महा रैली निकाली। सैकड़ों की संख्या में पूर्व सैनिकों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की तथा उप जिलाधिकारी कोटद्वार के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में मालन पुल निर्माण, मेडिकल कालेज निर्माण, लालढ़ांग-चिलरखाल मोटर मार्ग निर्माण तथा कण्वाश्रम के विकास कार्य में लेटलतीफी होने पर कोटद्वार की जनता का आक्रोश जताते हुए शीघ्र कार्यवाही की मांग की।
आक्रोशित जनसंगठन ने पूर्व सैनिक संघर्ष समिति के बैनर तले मालन पुल से तहसील तक रैली निकाली और शासन को ज्ञापन प्रेषित किया। रविवार को पूर्व संघर्ष समिति के बैनर तले कोटद्वार के पूर्व सैनिक ने एकत्रित होकर प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, सैकड़ों की संख्या में अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करते हुए मालन पुल से रैली आरंभ हुई और तहसील परिसर में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया। वहीं रैली में आई महिलाओं ने गीत गाकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन कर क्षेत्रीय अपेक्षा का आरोप लगाया।
कहा मालन पुल टूटने के कारण जनता की आवाजाही के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, आज छह माह बीतने के बाद भी लोगों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिसके चलते सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि सहित पूर्व सैनिक संघर्ष समिति के बैनर तले मालन पुल पर एकत्रित होकर नारेबाजी की। इस दौरान पूर्व सैनिक संघर्ष समिति के अध्यक्ष महेन्द्र पाल सिंह रावत सहित वक्ताओं ने कहा कि मालन पुल को टूटे लगभग छह माह से अधिक का समय बीत चुका है, परन्तु क्षेत्रीय जनता के आवागमन हेतु अभी तक पुल निर्माण की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। जिससे जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कहा ऐसे में बरसात में भाबर वासियों को वैकल्पिक मार्ग का ही उपयोग करना पड़ेगा। कहा कि कोटद्वार विधान सभा विकास कार्यों में पहले ही पीछे छूट चुकी है। यहां के लिए हुई घोषणाएं धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। इसलिए बार-बार आक्रोश रैली निकालकर सड़क पर उतरकर आंदोलन करना पड़ रहा है। प्रशासन को ज्ञापन प्रेषित किया। रैली में समिति अध्यक्ष सूबे. सेनि. महेंद्र पाल सिंह रावत, प्रमोद रावत, आर पी पंत, प्रमोद रावत, देवेन्द्र सिंह बिष्ट, राजेश बिष्ट, देवेंद्र सिंह रावत, राजेन्द्र सिंह, सुभाष कुकरेती, ताजवर सिंह, ठाकुर सिंह, मेहरबान सिंह चौहान, प्रेम सिंह नेगी, अनुसूया प्रसाद सेमवाल, सुरेश नेगी, कुलवंत पुंडीर,सचिव हवलदार सेनि. मदन सिंह नेगी, संयुक्त सचिव शूरवीर खेतवाल, अनुसूया प्रसाद गोस्वामी, सुरेशपाल गुसाईं, गोपाल सिंह, रणजीत सिंह, प्रेम सिंह, प्रकाश सिंह, मदन मोहन, भरत नेगी आदि शामिल रहे।











