
फोटो
01-लामबगड स्लाइड जोन में टूटी हुई चटटान
02-मार्ग बंद होने के बाद वाहनों की लंबी कतार
प्रकाश कपरूवाण
जोशीमठ। लामबगड स्लाइड जोन की पूरी चटटान टूट कर गिरी। सडक का नामोनिशाॅ मिटा। सडक खोलने में दो से तीन तक का समय लग सकता है। पैदल आवागमन के लिए मार्ग तैयार किया किया जा रहा है। पत्थरो के गिरने का क्रम लगातार जारी।
बदरीनाथ राष्ट्रीय राज मार्ग के नासूर लामबगड स्लाइड ने आज विन वर्षात ही अपना रौद्र रूप दिखा दिया। सुबह-सुबह ही स्लाइड वाली पूरी चटटान टूट कर सडक पर आ गिरी जिसके कारण सडक व नीचे की ओर बने पैदल पथ को भी भारी क्षति हुई है। लामबगड स्लाइड से पूरा पहाड ही गिर चुका है। जिसका मलबा हटाने व मार्ग को आवाजाही हेतु तैयार करने के लिए कम से कम दो से तीन दिनो का समय लग सकता है। यदि मौसम ने साथ दिया तब। हाॅलाकि उस स्थान पर अभी भी बोल्डर व पत्थरो का के गिरने का क्रम निंरतर जारी है जिसके चलते मलबा हटाने मे भी दिक्कतो का सामना करना पड रहा है।
लामबगड चटटान से गिरे मलबे ने न केवल मुख्य सडक को ही ध्वस्त कर दिया है ब्लकि सडके के नीचे की आरे अलकंनदा के समीप से बनाए गए पैदल पथ को भी क्षतिग्रस्त कर दिया है। फिलहाल पहली प्राथमिकता पैदल पथ को तैयार करने की है जिसके बदरीनाथ की ओर फॅसे यात्रियों को निकाला जा सके।
जोशीमठ के एसडीएम अनिल चन्याल के अनुसार चटटान से मलबा और बोल्डर लगातार गिर रहे है। जिसके कारण मार्ग खेालने का कार्य बाधित हो रहा है। कहा कि प्रशासन पैदल मार्ग तैयार करवा रहा है ताकि उस ओर फॅसे तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला जा सके। एसडीएम ने कहा कि लामबगड मार्ग से वाहनो की आवाजाही शुरू करने मे कम से कम दो से तीन दिन लग सकते है। जोशीमठ से बदरीनाथ जाने वाले सभी यात्रियों को पांडुकेश्वर व गोविंदघाट मे रोका गया है। बदरीनाथ की ओर करीब साढे तीन सौ से चार सौ के करीब यात्री है जिन्है पैदल मार्ग से निकाला जाऐगा।
लामबगड स्लाइड– बदरीनाथ यात्रा मार्ग पर करीब तीन दशक से नासूर बना हुआ है। पहले इस पर बीआरओ काम कर रहा था अब एनएच द्वारा कार्य किया जा रहा है। दरशअल लामबगड स्लाइड जोन के स्थाई ट्रीटमेंट के लिए चटटानी मार्ग पर बैंच कटिंग का सुझाव सामने आया था। जिसे लेकर बदरीनाथ के विधायक महेन्द्र भटट व भाजपा मंडल अध्यक्ष किशारे पवंार ने मुख्य मंत्री से भेंट कर बैचं कटिंग से संबधित पूरा प्रस्ताव सामने रखते हुए अवगत कराया था कि यदि स्लाइड के ऊपरी हिस्से मे बैंचं कटिंग की जाय तो जो मलबा व बोल्डर सीधे सडक पर आ गिरते थे उनकी रोकथाम हो सकेगी और मार्ग तैयार करने मे भी सहूलियत होगी। लेकिन अब बैंच कटिंग का मामला स्वयं ही समाप्त हो गया । पूरा पहाड ही सडक पर आ जाने के बाद अब बैंच कटिंग की गुजाइंश नही रह गई है।