उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में रेल लाइन व आल वेदर सड़क से क्या दूरस्थ गाँवों को मिलेगी जमीनी सुविधाए?
सत्यपाल नेगी/रुद्रप्रयाग
रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग का दूरस्थ गांव लिस्वालटा आज भी आधारभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। यहां संचार और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतें तक ग्रामीणों को नसीब में नहीं है। स्थानीय ग्रामीण शासन.प्रशासन के चक्कर काटते.काटते थक चुके हैं।

मयाली.रणधार मोटरमार्ग के खलियाण और रणधार के बीच से एक सड़क लिस्वालटा के लिए काटती है। करीब दो किमी लंबी इस सड़क पर सिर्फ सौ मीटर ही डामर बिछाया गया है।वह भी गांव के निकट।दो सौ मीटर के अलावा पूरी सड़क कच्ची है। सड़क पर चलना किसी जोखिम से कम नहीं है।
वहीं संचार क्रांति और डिजिटल भारत के इस युग में ग्रामीण संचार सेवाओं से वंचित हैं। संचार सेवा न होने से स्कूली बच्चे ऑनलाइन क्लास से वंचित हैं। अपने सगे.संबंधियों से संपर्क करने के लिए ग्रामीणों को गांव से दूर किसी छोर पर जाना पड़ता है। तब जाकर किसी से बात हो पाती है।
लिस्वालटा गांव के किनगोडिया तोक में आज तक बिजली का करंट नहीं दौड़ पाया है। लिस्वालटा से करीब दो किमी दूरी पर स्थित इस तोक में करीब 15 परिवार रहते हैं। लेकिन आज तक इनके लिए बिजली की लाइन नहीं खिंच पाई है।
लिस्वालटा में एक खेल मैदान का निर्माण होना था।लेकिन उस पर भी आज तक काम नहीं हुआ।ऐसे में ग्रामीण खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
वही दूरस्थ गाँवो का जमीनी भ्रमण करते हुए यूकेडी के नेता मोहित डिमरी व अन्य का कहना है कि 21 सालो मे हम केवल भाषणों, कागजो मे ही दूर.दराज के ग्रामीणों को सपने दिखाते आये हैएमगर जमीन पर आज भी लोग मूल भूत जरूरी सुविधायों को लेकर परेशानी झेल रहे है।हमने 21 सालो मे जनता का कम ओर मुख्यमंत्रीयो व दलो का विकास ज्यादा किया हैएजहाँ मात्र 4 मुख्यमंत्री होने थे आज हम 11 मुख्यमंत्रीयो का आर्थिक बोझ भी झेल रहे है।









