
थराली से हरेंद्र बिष्ट।
सन् 1965 के भातर-पाक युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त एक वीर सैनिक के बलिदान को स्थानीय लोगों के साथ ही शहीदों का सम्मान करने का दंभ भरने वाली सरकारें तक पूरी तरह से भूल गई हैं। शहीद के त्याग एवं बलिदान को चिरस्मरणीय बनाए रखने के लिए शहीद सैनिक के परिजन पिछले कई वर्षों से सरकारों से गुहार लगाते आ रहे हैं, किन्तु आज तक भी उन्हें शहीद के सम्मान में एक पत्थर तक लगाने में सफलता हासिल नहीं हो सकी है।
दरअसल इस विकासखंड के अंतर्गत सुनाऊं गांव निवासी युवक केशर सिंह भंडारी 13 दिसम्बर 1963 में भारतीय सेना में भर्ती हुए। भर्ती होने के महज दो साल बाद ही 15 सितंबर 1965 को भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान देश के लिए लड़ते हुए वीर गति को प्राप्त हो गए। इस महान वीर सैनिक की शहादत से तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने बकायदा अपने हस्तलेखन से वीर सैनिक की शहादत को नमन करते हुए शहीद के परिजनों को एक श्रद्वांजलि पत्र लिख कर भेजा। जोकि आज भी परिजनों के पास मौजूद है। शहीद केशर सिंह भंडारी अविवाहित थे ।और महज दो वर्ष की सेवा के दौरान ही वीरगति को प्राप्त हो गए थे। इसलिए उनके परिजनों को पेंशन सहित अन्य सरकारी सुविधाएं नहीं मिल पाईं।
समय के बीतने के साथ ही देश के लिए अपनी शहादत देने वाले इस युवा सैनिक को सरकार के साथ ही क्षेत्र की जनता भी पूरी तरह से भूल चुकी है। शहीद के सम्मान का दावा करने वाली केंद्र सरकार एवं राज्य के शहीदों के घर.आंगन से मिट्टी ले जाकर देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण करने की बात कहने वाली राज्य सरकार के आला नेताओं एवं अधिकारियों को अब तक इस गुमनाम शहीद को श्रद्धांजलि एवं नमन करने तक की याद नहीं आई है। यही कारण है कि आज तक शहीद भंडारी के नाम पर ना तो कोई स्मारक बन पाया है और ना ही शहीद के नाम पर कोई स्कूल, सड़क ही है।
हालांकि शहीद भंडारी के भाई महावीर सिंह भंडारी ने बताया कि वे 2015 से लगातार शहीद की स्मृति को लंबे समय तक कायम रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसके तहत वे 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं। किन्तु आज तक उस पर मुकम्मल कार्रवाई नहीं हो पाई है।
एक बार पुनः उन्होंने आज उपजिलाधिकारी थराली के माध्यम से प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्रालय को पत्र भेजकर शहीद की स्मृति में गांव में मेमोरियल बनवानेएसुनाऊ में स्थापित राजकीय इंटर कालेज का नाम शहीद केशर सिंह भंडारी के नाम पर रखने की मांग की हैं। साथ ही उन्होंने मेमोरियल के लिए जमीन शहीद के परिजनों के द्वारा ही दिए जाने की बात भी कही है। युवा सैनिक की शहादत के करीब 57 वर्षों के बाद अब देखना यह है कि शहीदों का सम्मान करने दंभ भरने वाली सरकारों को शहीद की स्मृति को चिरस्मरणीय बनाने के लिए मेमोरियल का निर्माण करने एवं कालेज का नाम शहीद भंडारी के नाम पर रखने में आखिर और कितना वक्त लगेगा। गांव के ग्राम प्रधान आशीष थपलियाल ने भी शहीद की स्मृति में मेमोरियल एवं कालेज का नाम शहीद के नाम से रखने की मांग की है।









