• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

घटिया और नकली दवाएं दे रहीं हैं जन स्वास्थ्य को बड़ी चुनौती

03/04/25
in उत्तराखंड, देहरादून, हेल्थ
Reading Time: 1min read
0
SHARES
36
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

2017 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसके अनुसार विकासशील देशों में कम-से-कम 10% दवाएं, घटिया या नक़ली थीं। इस रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट रूप से कहा था कि ये आंकड़े बहुत कम रिपोर्ट हो सके हैं जब कि संभवत: यह समस्या इससे कहीं अधिक बड़ी हैविश्व स्वास्थ्य संगठन के ने एएमआर को संबोधित करते हुए कहा कि यदि थोक विक्रय के आंकड़े देखें, तो विकासशील देशों में घटिया और नक़ली दवाओं पर अमरीकी डॉलर 30.5 अरब से अधिक व्यय होता है। हर साल निमोनिया के इलाज करवा रहे 70,000 से 170,000 बच्चे (5 साल से कम आयु के), घटिया और नकली दवाओं के इस्तेमाल के कारण मृत होते हैं।प्रख्यात अधिवक्ता ने बताया कि बिहार में एचआईवी के साथ जीवित लोगों को, जिन्हें एडवांस्ड एचआईवी रोग है, को सबसे बड़ा जानलेवा खतरा दवा प्रतिरोधक संक्रमण से है -जैसे कि क्रिप्टोकॉकल मेनिनजाइटिस। एक ओर बड़ी संख्या में वे लोग हैं जिन्हें दवाएँ मुहैया ही नहीं हैं, और दूसरी ओर ऐसे लोग हैं जो दवा प्रतिरोधक संक्रमणों से जूझ रहे हैं।सबको बराबरी, अधिकार और सामाजिक न्याय के आधार पर स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करना पहले से ही एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। चाहे कोई भी रोग हो, सब को जल्दी और सही जांच, सही इलाज और देखभाल मिलना, जमीनी स्तर पर काफ़ी दुर्लभ है। जब दवाएं कारगर नहीं रहतीं क्योंकि दवा प्रतिरोधकता या रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस) हो जाती है तो यह चुनौती अधिक जटिल बन जाती है। अब कल्पना करें कि ऐसे में यदि दवाएं घटिया या नकली होंगी तो जन स्वास्थ्य की समस्या कितनी अधिक पेचीदा हो जाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अनुसार जो दवाएं गुणवत्ता मानकों और विनिर्देशों को पूरा नहीं करती वे घटिया या नकली श्रेणी में आती हैं। ऐसी घटिया या नक़ली दवाओं से इलाज नहीं हो पाता क्योंकि उनमें या तो उचित सामग्री नहीं होती या सही मात्रा में नहीं होती। यदि दवाओं में मिलावट होगी या विषैले पदार्थ होंगे तो वह फायदेमंद होने के बजाय उल्टा नुकसानदायक भी हो सकती हैं। और ऐसी घटिया और नकली दवाओं से दवा प्रतिरोधकता भी बढ़ती हैभारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् की वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा कि जब रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणु दवाओं से मृत नहीं होते हैं तो उसे रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस) कहते हैं – यानी कि जीवाणु दवा प्रतिरोधक हो चुके हैं और वह दवाएं इन पर असरकारी नहीं होंगी। अब इलाज के लिए नई दवाओं की ज़रूरत होगी और नई दवाएं या तो अत्यंत सीमित और महँगी हैं या है ही नहीं। हर साल 50 लाख लोग रोगाणुरोधी प्रतिरोध के कारण मृत होते हैं। यदि रोगाणुरोधी प्रतिरोध को रोका नहीं गया तो 2050 तक 1 करोड़ से अधिक व्यक्ति प्रति वर्ष इससे मृत होंगे और वैश्विक अर्थ व्यवस्था को अमरीकी डॉलर 100 ट्रिलियन से अधिक का नुक़सान होगा। मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, पशुधन और मुर्गीपालन, तथा कृषि आदि में दवाओं के दुरूपयोग के कारण रोगाणुरोधी प्रतिरोध एक वैश्विक जन स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। 60% दवाएं जो बनती हैं वे पशुधन और मुर्गीपालन में उपयोग की जाती हैं। दवाओं के दुरुपयोग के कारण रोगाणु, रोगाणुरोधी प्रतिरोध उत्पन्न कर लेते हैं और दवाएं रोगों पर कारगर नहीं रहती। अनेक दवा प्रतिरोधक जीवाणु हैं जो पशुओं से मनुष्य में पहुँच सकते हैं- जैसे कि साल्मोनेला, ई कोलाई, एस ऑरियस, कैंपीलोबैक्टर, क्लेब्सिएला, एंट्रोकॉकस, आदि। डॉ कामिनी वालिया ने चेताया कि हालांकि पशुओं से मानव तक संक्रमण फैलाव के संबंध में कुछ वैज्ञानिक प्रमाण हैं, परंतु बड़े स्तर पर शोध की आवश्यकता भी है। कुछ महीने पहले (दिसंबर 2024 में) विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें घटिया और नकली दवाओं से संबंधित 2017-2021 के वैश्विक आंकड़ें हैं। डॉ मैथ्यू ने बताया कि “इस रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए क्योंकि घटिया और नकली दवाओं की दर कम होने के बजाए बढ़ोतरी पर थी। हर साल यह दर 36.3% बढ़ रही थी। इनमें अनेक प्रकार की दवाएं शामिल थीं, जैसे कि, एंटीबायोटिक, एंटी-वायरल, एंटी-फंगल, एंटी-पैरासिटिक (मलेरिया आदि की दवाएं), कैंसर की दवाएं, वैक्सीन या टीके। इस रिपोर्ट में 877 मामलों का विस्तार से ज़िक्र है जहाँ घटिया और नक़ली दवाएं पकड़ी गई थीं। स्पष्ट है कि इसके कारण दवा प्रतिरोधकता या रोगाणुरोधी प्रतिरोध का ख़तरा अधिक गंभीर हो गया है।“मिनिमम इन्हिबिटरी कंसंट्रेशन”, दवाओं की उस न्यूनतम मात्रा को कहते हैं जिससे रोगाणु में बढ़ोतरी बंद हो जाती है। पर घटिया और नकली दवाएं अक्सर इस मानक पर खरी नहीं उतरती जिसके कारणवश न केवल रोगी अधिक पीड़ा झेलता है, संक्रमण का फैलाव नहीं रुकता, मृत्यु का ख़तरा बढ़ता है, बल्कि रोगाणुरोधी प्रतिरोध भी बढ़ता है। डॉ का कहना सही है कि घटिया और नकली दवाओं के कारण लोगों की आय का हर्जाना होता है, जेब से होने वाले स्वास्थ्य व्यय अनावश्यक रूप से बढ़ते हैं, और लोगों का स्वास्थ्य प्रणाली में विश्वास डगमगाता है।यदि दवाएं सही अवधि तक, या सही मात्रा में नहीं दी जाएंगी तब भी रोगाणुरोधी प्रतिरोध होने का ख़तरा बना रहता है और दवा प्रतिरोधक संक्रमण का फैलाव बढ़ता है।एक ओर जहाँ हमें यह सुनिश्चित करना है कि सभी आवश्यक दवाओं की कमी न होने पाए और आपूर्ति शृंखला मज़बूत बनी रहे, तो दूसरी ओर यह भी पक्का करना है कि दवाएं घटिया या नकली न हों। सरकार को प्रभावित समुदाय को गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया में भागीदार बनाना चाहिए। लीना ने एक उदाहरण साझा किया – 2024 में एचआईवी के साथ जीवित लोगों के नेटवर्क से शिकायत आने लगी कि नए बैच की जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवाएं बहुत कड़वी हैं और दवाओं की गोली टूट रही है। जब इसकी सूचना सरकार के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम और अन्य औषधि विनियामक अधिकारियों को दी गई तो एक हफ़्ते के अंदर इन दवाओं को विश्व स्वास्थ्य संगठन की उन दवाओं से बदला गया जिनकी गुणवत्ता की जांच हो चुकी थी। घटिया या नकली दवाओं पर रोक लगाने के लिए नई तकनीकी खोज ज़रूरी है। इसी दिशा में, द ट्रिनिटी चैलेंज ने 1 मिलियन ग्रेट ब्रिटेन पाउंड की प्रतियोगिता की घोषणा की है जिससे कि घटिया और नकली दवाओं पर रोक लगाने हेतु, विकासशील देशों के लोग नवीन तकनीकी समाधान प्रस्तुत कर सकें।भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा कि औषधि विनियमक अधिकारियों और स्थानीय निर्माताओं की क्षमता में विकास आवश्यक है जिससे कि नवीनतम निगरानी तकनीकियों का उपयोग हो सके और घटिया और नकली दवाओं पर विराम लग सके। वैश्विक आपूर्ति शृंखला को भी मजबूत करना होगा जिससे कि सभी आवश्यक जाँच और इलाज, सभी लोगों को सम्मान के साथ बिना विलंब मिल सके और रोगाणुरोधी प्रतिरोध की चुनौती का मुकाबला हम सब प्रभावकारी ढंग से कर सकें। देश और दुनिया में नकली और घटिया दवाओं का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। यह दवाइयां इंटरनेट के जरिए, काउंटर से या फिर गैर-कानूनी तरीके से बेची जाती हैं। आम तौर पर ये दवाइयां कोई असर नहीं करतीं लेकिन कई बार घातक होती हैं और जान भी ले सकती है। देश के विभिन्न राज्यों में हाल ही में नकली दवाइयों की बड़ी खेप पकड़ी गई। जयपुर में हाल ही 37 लाख रुपए से अधिक की नकली दवाएं जब्त कीं गई। ये नकली दवाएं जयपुर के अलावा पूरे राजस्थान में भेजी जा रही हैं। इन सभी जगहों से एट्रोवेसटाटीन टेबलेट, रेमीप्रील, ल्यूपिन फार्मा, यूरिमेक्स डी टेबलेट, सिपला, डुफास्टोन, अबोट की दवाएं संदेहास्पद पाई गई हैं। देश में नकली और घटिया दवाओं की बाढ़ आ गई है। आये दिन देश के विभिन्न भागों में घटिया और अमानक दवाऐं पकड़ी जा रही है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत सहित विभिन्न देशों में नकली दवाओं का कारोबार लगभग तीस अरब डॉलर तक पहुंच गया है। कोरोना काल में घटिया और नकली दवाओं के साथ अन्य सम्बद्ध उत्पाद धडल्ले से बिक रहे है जिसकी वजह से त्वचा की विभिन्न बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। दवाइयों का क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र हैं जहां असली व गुणवत्ता की पहचान करना बेहद कठिन होता है। चूंकि दवाओं का एक्शन-रिएक्शन खाने या प्रयोग करने के बाद पता चलता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत नकली दवाओं का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है। भारत में 25 फीसदी के करीब दवाइयां नकली है। हमारे देश में अंग्रेजी दवाइयों ने घर घर में अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है। जिसे देखो अंग्रेजी दवाइयों के पीछे भागता मिलेगा। सामान्य बीमारियों से लेकर असाध्य बीमारियों की दवा आज घरों में मिल जाएगी। इनमें चिकित्सकों द्वारा लिखी दवाइयों के अलावा वे दवाइयां भी शामिल है जो मेडिकल स्टोर्स से बीमारी बताकर खरीदी गई है अथवा गूगल से खोजकर निकाली गई है। ये दवाइयां असली है या घटिया अथवा नकली ये भी आम लोगों को मालूम नहीं है। घटिया दवाइयों का बाजार आजकल खूब फलफूल रहा है। आये दिन घटिया और नकली दवाइयां बरामद करने की खबरें मीडिया में सुर्खियों में पढ़ने को मिल रही
है। इन दवाइयों के सेवन से साधारण खांसी बुखार और जुखाम को ठीक होने में एक पखवाड़ा या महीना लग जाता है। इसके बावजूद ऐसी दवाइयां खरीदने में हमें कोई हिचकिचाहट नहीं हो रही है। लोग सामान्य बीमारियों में अस्पतालों में लम्बी लाइनों में धक्का खाने की अपेक्षा दूकानों से दवा खरीद लेते है। अनेक बार बड़े मुनाफे के चक्कर में दुकानदार घटिया दवाएं लोगों को थमा देते है जो आगे जाकर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित होती है। पढ़े लिखे लोगों को भी बिना डॉक्टर को दिखाएं ऐसी दवाएं खरीदते देखा जा सकता है। सरकारी दुकानों पर मिलीभगत से ब्रांडेड दवा के नाम से नकली दवा बेचने का खेल भी चल रहा है। अंग्रेजी दवाओं के इस जंजाल से निकलना आम लोगों के लिए भारी मुश्किल हो रहा है। अंग्रेजी दवाओं के  इस चक्रव्यूह में फंसना तो आसान है मगर निकलना दूभर। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में लगभग 200 बिलियन डालर का घटिया और नकली दवाओं एवं वैक्सीन का धंधा है। एशिया में बिकने वाली 30 प्रतिशत दवाएँ नकली या घटिया हैं। भारत में बिकने वाली हर पाँच  गोलियों के पत्तों में में से एक नकली है। इन दवाइयों से हर वर्ष लगभग 5 प्रतिशत धनहानि देश को होती है और ये धंधा बेरोकटोक चल रहा है और असली दवाइयों के व्यापार से भी ज्यादा तरक्की कर रहा है। दवा एक केमिकल होता है। रसायन होता है। दवा कंपनियां अपने मुनाफा एवं विपरण में सहुलियत के लिए इन रसायनों को अलग से अपना ब्रांड नाम देती है। जैसे पारासेटामल एक साल्ट अथवा रसायन का नाम है लेकिन कंपनिया इसे अपने हिसाब से ब्रांड का नाम देती हैं और फिर उसकी मार्केंटिंग करती है। ब्रांड का नाम ए हो अथवा बी अगर उसमें पारासेटामल साल्ट है तो इसका मतलब यह है कि दवा पारासेटामल ही है। *लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं।लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*

ShareSendTweet
http://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/08/Video-1-Naye-Sapne-1.mp4
Previous Post

डोईवाला : देहरादून एसएसपी ने किया डोईवाला का वार्षिक निरीक्षण

Next Post

चारधाम यात्रा मार्ग में भूस्खलन बना चुनौती

Related Posts

उत्तराखंड

डोईवाला: बार एसोशिएशन के अध्यक्ष पद पर तीन पत्रों की बिक्री

August 30, 2025
11
उत्तराखंड

डोईवाला: 57 टैट्रा पैक देशी शराब समेत तस्कर गिरफ्तार

August 30, 2025
14
उत्तराखंड

अपर पुलिस अधीक्षक कोटद्वार द्वारा कोतवाली लैंसडाउन का किया गया अर्द्धवार्षिक निरीक्षण

August 30, 2025
4
उत्तराखंड

सीमांत विकास खण्ड ज्योतिर्मठ -जोशीमठ के नव निर्वाचित ब्लॉक प्रमुख, ज्येष्ठ प्रमुख, कनिष्ठ प्रमुख एवं क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने शपथ ली

August 30, 2025
6
उत्तराखंड

अब अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धा आयोजन के लिए तैयार हैं उत्तराखंड – मुख्यमंत्री

August 29, 2025
9
उत्तराखंड

उत्तराखण्ड सरकार और जर्मन स्थित इनोवेशन हब राइन-माइन, के मध्य लेटर ऑफ इन्टेन्ट पर हस्ताक्षर

August 29, 2025
5

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

http://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/08/Video-1-Naye-Sapne-1.mp4

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    0 shares
    Share 0 Tweet 0

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

डोईवाला: बार एसोशिएशन के अध्यक्ष पद पर तीन पत्रों की बिक्री

August 30, 2025

डोईवाला: 57 टैट्रा पैक देशी शराब समेत तस्कर गिरफ्तार

August 30, 2025
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.