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- उर्गम के घंण्टाकरण मंदिर मे ब्रहकमल से सजी छॅतोलियाॅ।
- ब्रहकमल की छॅतोलियों के साथ मंदिर मे पंहुचते फुलारी ।
- प्रकाश कपरूवाण
जोशीमठ। उर्गम घाटी में रही नंदाष्टमी की धूम। घाटी के भर्की-भेटा मंे नौ सितबंर तक चलेगा नदंा उत्सव।
हिमालयी गाॅवों में नंदाष्टमी पर्व बडे ही धूम-धाम से मनाए जाने की पंरपरा है। उत्तराखंड के अनेक गाॅवों मे नंदाष्टमी को एक त्यौहार के रूप मे मनाया जाता है। उर्गम घाटी में नंदाष्टमी पर कुछ अलग से ही उत्सव का आयोजन होता है। यहाॅ एक-दो नही ब्लकि ब्रहकमल से सजी बीस छॅतोलियाॅ माॅ नंदा व घंण्टाकरण मंदिर मे पंहुचती है। उर्गम घाटी की इस अनूठी परंपरा के तहत घाटी के सलना गाॅव की दो छॅतोलियाॅ, ल्यारी-थैणां गाॅव की तीन , बडगिण्डा की पाॅच, देवग्राम की पाॅच, गीरा गाॅव की दो, बाॅसा गाॅव के दो छॅतोलियाॅ पंहुचती है। मुख्य छॅतोली ल्यारी के रावत परिवार की होती है जिसे माता नन्दा की छॅतोली कहा जाता है।
ब्रहमकमल से सजी बीस छॅतोलियाॅ को जागर के साथ नंदा मंदिर व घण्टाकरण मंदिर मे पंहुचने का दृष्य ही अदभुद होता है। कैलाश से माॅ नंदा के स्वरूप मे ब्रहमकमल के दर्शन करने के लिए बडी संख्या मे घाटी के ग्रामीण धंण्टाकरण मंदिर मे एकत्रित होते हैं और सभी बीस छॅतोलियों के मंदिर मे पंहचने के बाद सभी छॅतोलियों से एक-एक ब्रहमकमल के पुष्प को मंदिर मे चढाने के बाद पुष्पो को प्रत्येक गाॅववासी को प्रसाद स्वरूप दिया जाता है। इस ब्रहमकमल को लेकर ग्रामीण अपने घरो मे देवस्थान मे सुसज्जित करते है, और उसके बाद सभी घरो मे नंदाष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है।
उर्गम घाटी के प्रत्येक गाॅवो के बारीदार नंगे पाॅव ब्रहकमल के लिए दो दिन पूर्व नंदा मंदिर मे एकत्रित होकर एक साथ जाते हैं। इनका पहला पडाव निर्जन स्थान बंशीनारायण से चार किमी0 की दूरी पर रिखडार नामक उडियार मे होता है। अगले दिन प्रात स्नान करने के उंपरात सभी लोग मनवाखाल बुग्याल पंहुचते है और यहाॅ पूरे विधि-विधान से माॅ नंदा की पूजा/अर्चना के बाद ब्रहमकमल पुष्प तोडते है और पुन रात्रि विश्राम के लिए रिखडार नामक उडियार ही पंहुचते हैं। तीसरे दिवस याने नंदाष्टमी को प्रात रिखडार से प्रस्थान कर सायं पाॅच बजे तक सभी छॅतोलियाॅ उर्गम के देवालयो मे पंहुचती है। नंदा मंदिर उर्गम मे छॅतोलियों का स्वागत होता है। यहाॅ पहले से मौजूद जागरवेत्ता जागरो मे ही ब्रहमकमल पुष्प लेने गए फुलारियों व उनके साथ गए जागर वेत्ता से वहाॅ की कुशल क्षेम पूछते है। उसके बाद जागरो के गायन के साथ ही सभी बीस फुलारी घंटाकरण मंदिर पंहुचते है।
इधर उर्गम घाटी के भर्की तथा भेंटा ग्राम पंचायतो मे नंदाष्टमी के बाद नवमी व दशमी तिथि तक ंनदाष्टमी पंर्व का आयोजन होता है। भर्की के पंचनाम चैक व अन्य देवालयो मे दो दिवसयी नंदाष्टमी मेले मे दूर-दूर से भी लोग पंहुचते है।











