• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

विकल्पहीनता में नोटा का सहारा?

09/04/19
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
122
SHARES
153
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

शंकर सिंह भाटिया
देहरादून। करीब दो दशक के हो गए उत्तराखंड में एक बार भाजपा सत्ता में होती है तो अगली बार कांग्रेस के हाथों सत्ता होती है। पिछले दो संसदीय चुनावों से यहां की पांचों संसदीय सीटें एक बार भाजपा के पास होती हैं तो अगली बार पांचों पर कांग्रेस का कब्जा हो जाता है। इन दो दशकों में तीसरा विकल्प खड़ा होने के बजाय उसकी संभावनाएं समाप्त होती चली गई हैं। अब तो भाजपा-कांग्रेस के बीच उत्तराखंड में सत्ता की भागीदारी मैच फिक्सिंग की तरह लगने लगी है। भाजपा-कांग्रेस के बीच सत्ता के इस बंदरबांट से जनवादी ताकतें अच्छी तरह वाकिफ हैं, इसलिए कोई विकल्प न देखकर अब ऐसी ताकतें नोटा की शरण में जाने को मजबूर हैं। यही वजह है कि कई संगठन इस समय नोटा का बटन दबाने के लिए अभियान चलाए हुए हैं।
नोटा मतलब इनमें से कोई नहीं, चुनाव आयोग ने यह प्रावधान 2013 से किया है, इससे पहले 17ए के प्रावधान के तहत मतदाता रजिस्टर में किसी भी उम्मीदवार को वोट न देने की घोषणा करता था। अब चुनाव आयोग ने ईवीएम में एक अलग से बटन की व्यवस्था की है। हालांकि यदि नोटा को सबसे अधिक मत पड़ते हैं, तब भी उसके बाद सबसे अधिक मत पाने वाले उम्मीदवार को विजयी घोषित किया जाएगा। कई बार नोटा में पड़े मत जीत हार के समीकरण बदल देते हैं। इस बार तो नोटा के पक्ष में एक तरह से चुनाव प्रचार तक करते हुए कई संगठन देखे गए हैं। गैरसैंण राजधानी अभियान चुनाव के शोरगुल के बीच नोटा की तरफदारी में अभियान चलाए हुए है। महिला मंच भी सोशल मीडिया के जरिये नोटा के पक्ष में वोट करने का आग्रह कर रहा है। नवक्रांति स्वजराज मोर्चा ने भी नोटा के पक्ष में वोट करने की अपील जनता से की है। इसके अतिरिक्त कई अन्य संगठन भी नोटा के पक्ष में लगातार मैदान में उतरे हुए हैं।
हालांकि विभिन्न संगठनों के ये अभियान बहुत अधिक संगठित तौर पर नहीं चलाए गए हैं। प्रत्येक संगठन अपने-अपने तरीके से अपील कर रहा है। लेकिन यह कदम उत्तराखंड में विकल्पहीनता की इस स्थिति में एक संदेश जरूर दे रहा है। यदि स्थिति ऐसी ही रही तो भविष्य में कहीं नोट तीसरा विकल्प बनकर न उभरे। भाजपा-कांग्रेस के लोग इसे वोट की बर्बादी करार दे रहे हैं। वास्तव में वोट की बर्बादी जैसा कोई तर्क होता ही नहीं है। सभी लोग जीतने वाले उम्मीदवार को तो वोट नहीं करते, कम या ज्यादा दूसरे प्रत्याशियों को भी वोट मिलता है, उन्हें मिला हुआ वोट बर्बादी तो नहीं है? इसी तरह से नोटा को भी वोट करना वैधानिक है, इसलिए उसे वोट देना भी वोट की बर्बादी नहीं हो सकती है। नोटा की व्यवस्था ही इसीलिए की गई है कि वोटर को यदि कोई उम्मीदवार पसंद नहीं है, किसी भी उम्मीदवार को यदि वोटर योग्य नही ंसमझता है तो वह नोटा बटन दबाकर अपनी इच्छा जाहिर कर सकता है। इसलिए यह एक प्रजातांत्रिक कृत्य है।
हालांकि कोई सांगठनिक तरीके से नोटा का प्रचार नहीं हुआ है, लेकिन उत्तराखंड के हालात बहुत सारे लोगों को नोटा की तरफ जाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। वही दिल्ली के निर्देश पर खड़े किए गए उम्मीदवार, चुन लिए जाने के बाद जनता के प्रति उनकी बेरुखी, अपनी सांसद, विधायक निधि को भी ठीक ढंग से मैनेज न करने तथा विकास कार्यों में लगाने के प्रति कोई रुचि न रखना, निधि में कमीशनखोरी के आरोप, झूठे बयान देकर विकास होने का दावा करना, जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनहीन बने रहना, पहाड़ की दुर्दशा पर भी विकास का दावा करना जैसे आम बात हो गई है। इसलिए इन जनप्रतिनिधियों से अधिकांश लोगों को कोई उम्मीद नहीं रह गई है।
इन हालात में देखना यह होगा कि इस बार नोटा को विकल्प मानकर चलने वाले इसे किस तरह विकल्प बनाने में सफल हो पाते हैं? आने वाले समय में क्या यह काम अधिक संगठित तरीके से होगा? इस स्थिति में क्या नोटा जीत हार भी तय करने की स्थिति में होगा?

Share49SendTweet31
Previous Post

शाम पांच बजे थम गया उत्तराखंड में चुनाव प्रचार का शोरगुल

Next Post

नाबालिग लड़की का अपहर्ता गिरफ्तार, बिहार का रहने वाला है आरोपी, करता है मिस्त्री का काम

Related Posts

उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री आवास में चम्पावत से आए होल्यारों ने दी होली की शुभकामनाएं

February 25, 2026
6
उत्तराखंड

अल्पकालिक राजनीतिक लाभ मुफ्त रेवड़ी लोकतंत्र के लिये घातक

February 25, 2026
4
उत्तराखंड

उत्तराखंड में चार धाम आस्था सुरक्षा और पर्यावरण

February 25, 2026
7
उत्तराखंड

जनगणना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी, सभी अधिकारी गंभीरता से निभाए दायित्व- एडीएम

February 25, 2026
24
उत्तराखंड

भारत विकास परिषद कोटद्वार के तत्वावधान में पुरस्कार वितरण समारोह हुआ सम्पन्न

February 25, 2026
14
उत्तराखंड

डोईवाला: रायपुर विधायक व दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग

February 25, 2026
53

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67654 shares
    Share 27062 Tweet 16914
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45773 shares
    Share 18309 Tweet 11443
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38046 shares
    Share 15218 Tweet 9512
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37434 shares
    Share 14974 Tweet 9359
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37322 shares
    Share 14929 Tweet 9331

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री आवास में चम्पावत से आए होल्यारों ने दी होली की शुभकामनाएं

February 25, 2026

अल्पकालिक राजनीतिक लाभ मुफ्त रेवड़ी लोकतंत्र के लिये घातक

February 25, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.