फोटो- उच्च हिमालय मे स्थित भगवान वंशीनारायण का मंन्दिर ।
प्रकाश कपरूवाण
जोशीमठ।
दूरस्थ उच्च हिमालयी बुग्याल मे भगवान वंशीनारायण मंन्दिर मे प्रतिवर्ष रक्षाबन्धन को ही मेले का आयोजन होता है, हाॅलाकि पूर्व वर्षो मे इतनी बडी संख्या मे श्रद्धालु नही पंहुच पाते थे, लेकिन अब धीरे-धीरे श्रद्धालुओ की सख्यां मे बढोत्तरी हो रही है।
भगवान वशीनारायण मंन्दिर हिमालयी बुग्याल के मध्य एक सुरम्य स्थान पर है, मंन्दिर उत्तराखंण्ड के अन्य पौराणिक मंन्दिरों की ही शैली मे निर्मित है, यहाॅ भगवान नारायण का श्री विग्रह विराजमान है,। यहाॅ भगवान श्री हरिनारायण के चर्तुभुज स्वरूप के दर्शन होते है। मंन्दिर की पूजा परंपराओ का निर्वहन दूरस्थ गाॅव कलगोठ जो मंन्दिर से 6किमी0 की दूरी पर है, द्वारा किया जाता है। अब कलगोठ के ग्रामीणों ने मंन्दिर से कुछ ही दूरी पर एक अस्थाई धर्मशाला का निर्माण भी किया है।
रक्षाबन्धन पर्व पर इस मंन्दिर मे पंहुचने व भगवान को रक्षा सूत्र बाॅधकर क्षेत्र की समृद्धि की कामना की जाती है। इस वर्ष कलगोठ गाॅव के युवक मंगल दल द्वारा वंशीनारायण मे विशाल भंडारे का आयेाजन किया गया था,जिसमे वहाॅ पंहुचे सैकडो श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। वंशीनारायण मंन्दिर मे मान्य धार्मिक पंरपरानुसार सत्तू, घी व मक्कखन का ही भेाग चढाया जाता है।
वंशीनारायण मंन्दिर पंहुचने के लिए लंबी दूरी की खडी चढाई पार करनी होती है, यहाॅ पंहुचने के लिए गोपेश्वर से कुजों-मैकोट होते हुए कलगोठ से वंशीनारायण, स्यूण-बैमरू से होते हुए कलगोठ, पल्ला-जखोला किमाणा होते हुए कलगोठ,पाखी से लाॅजी-पोखनी होते हुए कलगोठ से वशीनारायण तथा उर्गम से गीरा-बाॅसा-मूला खर्क होते हुए सीधे वंशीनारायण पंहुचा जा सकता है।
युवक मंगल दल कलगोठ के अध्यक्ष रविन्द्र रावत, के अलावा आशीष रावत, लक्ष्मण रावत, कैलाश रावत सहित अनेक युवा भंण्डारे की ब्यवस्था मे दो दिन पूर्व से ही जुटे थे, कलगोठ मंन्दिर समिति के रतन सिह रावत, व भरत सिंह आदि प्रमुख लोगो ने श्रद्धालुओ का स्वागत व पूजन कराया।









