देहरादून, 21 फ़रवरी 2026. दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से आज शनिवार शाम को एक साहित्यिक संवाद का कार्यक्रम आयोजित किया गया. केंद्र के सभागार में “डिज़ायर, डिसीट एंड डेथ: अ कन्वर्सेशन ऑन लव एंड क्राइम” विषय पर सुपरिचित अंग्रेजी साहित्य की लेखिका एवं शिक्षाविद् प्रो. (डॉ.) रूबी गुप्ता की कहानी-संग्रह पुस्तक *लव एंड क्राइम* पर एक सार्थक चर्चा हुई। इस कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध पाठकों, विद्यार्थियों और साहित्यप्रेमियों ने अपनी उत्साह पूर्वक उपस्थिति दर्ज की।
इस संवाद में पूर्व डीजीपी उत्तराखण्ड, एवं प्रशासक, लेखक व स्तंभकार श्री अनिल रतूड़ी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर उन्होंने अपराध के मनोवैज्ञानिक पहलुओं, प्रेम और आसक्ति के बीच की एकअदृश्य रेखा और साहित्य तथा वास्तविक जीवन के अपराधों के बीच संबंधों पर गहन अन्वेषणात्मक तथ्यों के साथ प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कई वास्तविक अपराधों की जड़ें उन्हीं भावनात्मक तनावों में होती हैं, जिन्हें साहित्य अपनी विशेष संवेदनशीलता के साथ उसे अभिव्यक्त करने का प्रयास करता है। प्रो.रुबी गुप्ता का यह कथा संग्रह इन्हीं विशेषताओं के साथ पाठकों पर अपना प्रभाव रख छोड़ने में पूरी तरह सक्षम है।
अपने इस कहानी-संग्रह के बारे में बोलते हुए डॉ. रूबी गुप्ता ने कहा कि लव एंड क्राइम मानवीय संबंधों के जटिल पक्षों—प्रेम, ईर्ष्या, विश्वासघात और जुनून—की पड़ताल करता है। उन्होंने मनोवैज्ञानिक सस्पेंस और नॉयर परंपरा के प्रति अपने रुझान, लघुकथा लेखन की प्रक्रिया, तथा समकालीन भारतीय परिवेश में अपराध कथाओं की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
बातचीत के दौरान भारतीय अपराध कथा के विकास, नॉयर साहित्य में स्त्री पात्रों की भूमिका और नैतिक द्वंद्व जैसे विषयों के कई बिन्दु भी उभर कर सामने आये.
कार्यक्रम के समापन चरण में हुए प्रश्नोत्तर सत्र में श्रोताओं की ओर से कई सवाल जबाब भी किये गये.पाठकों ने अपने सवालों में कहानियों की प्रेरणा, लेखन के शोध-पक्ष, और वास्तविक घटनाओं तथा कल्पना के संबंध पर विविध प्रश्न पूछे। कुछ पाठकों ने कहानियों के वातावरण, मनोवैज्ञानिक गहराई और कथानक की तीव्रता की सराहना की।
स्टॉल पर पाठकों व साहित्य प्रेमियों ने इनकी पुस्तकों की खरीद भी की और लेखिका से पुस्तक पर हस्ताक्षर लेते हुए अनौपचारिक सवाल भी किये
डॉ. रूबी गुप्ता दस पुस्तकों की पुरस्कार-प्राप्त लेखिका एवं शिक्षाविद् हैं, जिन्हें इंग्लैंड में आयोजित इंटरनेशनल अगाथा क्रिस्टी फेस्टिवल में इंटरनेशनल राइटर-इन-रेज़िडेंस के रूप में सम्मानित किया गया है। उनका जासूसी उपन्यास द सीक्रेट ऑफ लाइफेंग पैगोडा पर फिल्म रूपांतरण कार्य प्रगति पर है, जबकि नो इल्यूशंस इन ज़ानाडू ब्लूम्सबरी से प्रकाशित है और ए डिग्री इन डेथ को क्रॉसवर्ड बुक अवॉर्ड की लंबी सूची में स्थान मिला था। वे वर्तमान में एसीसी विंग, इंडियन मिलिट्री अकादमी में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं और तीन दशकों से अधिक समय से लेखन एवं अध्यापन से जुड़ी हैं।
लव एंड क्राइम को पाठकों द्वारा इसकी रोचक कथावस्तु, मनोवैज्ञानिक गहराई और संबंधों के अंधेरे पक्ष की प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए सराहा गया है। यह संग्रह समकालीन भारतीय अपराध कथा के परिदृश्य में एक उल्लेखनीय योगदान के रूप में देखा जा रहा है।
आज का यह कार्यक्रम दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की उस निरंतर पहल का हिस्सा बना जिसके माध्यम से यहां पर साहित्य और समकालीन लेखन पर सार्थक संवाद को निरंतर प्रोत्साहित किया जाता है। श्रोताओं की उपस्थित से आज का यह साहि त्य संवाद का कार्यक्रम रोचक और विचारोत्तेजक बन गया.
कार्यक्रम में श्री एन. रवि शंकर, निदेशक दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र, मुख्य सूचना आयुक्त, श्रीमती राधा रतूड़ी, डॉ. बी.सी. पाठक, मधु पाठक, कल्याण सिंह बुटोला, सुरेन्द्र सजवाण, पूर्व मुख्य वन संरक्षक, उत्तराखण्ड, श्री जय राज, आर के बख्सी व आलोक सरीन सहित केन्द्र के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. डी. के. पाण्डे,सुंदर सिंह बिष्ट, राकेश कुमार आदि उपस्थित रहे.












