फाइल फोटो- रम्माण मेले मे कलाकार प्रदर्शन करते हुए।
वीडियो- रम्माण मेले के शानदार दृश्य ।
प्रकाश कपरूवाण
जोशीमठ। इस वर्ष नहीं हो सकेगा विश्व सास्ंकृतिक धरोहर ’’रम्माण ’ मेले का आयोजन, विश्व शांति व कोरोना से मुक्ति के लिए सूक्ष्म रूप मे पूजा एवं हवन के कार्यक्रम संपादित होगे।
प्रविवर्ष धार्मिक पंरपरानुसार आयोजित होने वाली पैनखंडा जोशीमठ के रम्माण मेले का आयेाजन इस वर्ष नही हो सकेगा। पौराणिक एवं मान्य धार्मिक परंपरानुसार बैसाख संक्राति के पर्व से ही पैनखंडा जोशीमठ के सलूड-डुंग्रा गाॅव मे मुख्य आयोजन रम्माण मेले से पूर्व विभिन्न मंदिरों मे पूजा/अर्चना व धार्मिक अनुष्ठान के कार्यक्रम शुरू हो जाते है। लेकिन कोरोना जैसी महामारी तथा शासन-प्रशासन के दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए तय हुआ कि गाॅव के चार बारीदार ही अगले पाॅच दिनो तक गाॅव के मंदिरों मे परंपरानुसार पूजन/अर्चन करेगे। और रम्माण दिवस के अवसर पर केवल हवन की प्रक्रियाएं होगी। इस हवन व पूजन के माध्यम से ही विश्व को कोरोना जैसी महामारी से मुक्ति की कामना ग्रामीणों द्वारा की जाऐगी।
पैनखंडा की विश्व सांस्कृतिक धरोहर रम्माण को विश्व पटल तक पंहुचाने मे अहम भूमिका निभाने अदा करने वाले रम्माण के संयोजक डा0कुशल भंडारी ने रम्माण मेले को इस वर्ष स्थगित करने की जानकारी देते हुए बताया कि गाॅव के जनप्रतिनिधियों से राय मशविरा करने के बाद इस वर्ष रम्माण मेले को स्थगित करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया गया है। केवल गाॅव के चार बारीदार पाॅच दिनों तक गाॅव के मंदिरो मे धार्मिक परंपरा का निर्वहन करते हुए पूजा कार्यक्रम करेगे। और रम्माण दिवस के मौके पर विश्व शांति व कोरोना से मुक्ति के लिए यज्ञ/हवन का आयेाजन किया जाऐगा। इसमे भी सामाजिक दूरी का पालन करते हुए आचार्य के साथ ही बारीदार व पश्वागण मौजूद रहेगे।
इससे पूर्व बैसाख संक्राति पर्व पर गाॅव के भूमियाल-क्षेत्रपाल देवता एक वर्ष की पूजा ग्रहण करने के बाद धूम सिह व हीरा सिंह पंवार के घर से मूल स्थान पर प्रतिस्थापित हुए। यहाॅ रम्माण दिवस तक भूमियाल देवता की पूजा होगी। और उसी दिन अगले वर्षभर के लिए पुष्कर सिहं नेगी के घर के लिए प्रस्थान करेगे।









