सत्यपाल नेगी/रुद्रप्रयाग:
राज्य मे कॉग्रेस पार्टी ने 2022 को फतह करने को लेकर अपने नये मुखिया के साथ-साथ नई चुनावी रणनीति पर दिगजो को भी अहम जिम्मेदारियां सौप दी है।
जहाँ पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को चुनाव प्रचार समिति की कमान तो उनके नजदीकी गणेश गोदियाल को प्रदेश कांग्रेस की कमान,व विधानसभा मे नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिह को कमान मिलने से अब रुद्रप्रयाग विधानसभा में भी कांग्रेस प्रत्याशियों के भी समीकरण बदल सकते है।
यह हम नही,बल्कि रुद्रप्रयाग के लोगों मे चर्चाये शुरू होती दिख रही है। हालाकि रुद्रप्रयाग विधान सभा मे कई प्रत्याशी अपनी दावेदारी पेश करेगे, मगर अब दो प्रत्यासियों के नामो पर बाजार गर्म दिख रहा है। महिला नेत्री व प्रदेश कांग्रेस महामंत्री लक्ष्मी राणा एंव युवा नेता व प्रदेश सेवादल के उपाध्यक्ष अंकुर रौथाण।
बात लक्ष्मी राणा की करे तो काग्रेस की तेजतर्रार अकेली महिला नेत्री है,इस समय उन्हें प्रदेश कॉग्रेस महामंत्री पद के साथ साथ चुनाव घोषणा पत्र कमेठी का भी सदस्य बनाया गया है।,वे पूर्व मे जखोली ब्लाक की प्रमुख रही, वर्तमान से पहले जनपद रुद्रप्रयाग मे जिला पंचायत की अध्यक्ष रही। 2017 के विधान सभा चुनाव मे कॉग्रेस पार्टी ने इन्हें महिला प्रत्याशी के रूप मे उतारा था,मगर उसी समय कॉग्रेस पार्टी के 10 विधायको ने पाला बदलते हुए भाजपा का दामन थाम लिया,जिसमे रुद्रप्रयाग के विधायक रहे ड़ा०हरक सिह रावत भी थे ओर लक्ष्मी राणा को हरक गुट से जोड़ा जाता था, उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष रहते हुए उस समय मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत को खरी-खोटी भी मीडिया के सामने सुनाई, उन्हें राज्यमंत्री के दर्जे से भी हटा दिया गया था,जिसका असर उनके चुनाव लड़ते वक्त साफ दिखाई दिया था कॉग्रेस के ज्यादातर लोग उनके साथ नजर नही आये,ओर उस समय के पार्टी जिलाध्यक्ष भी निर्दलीय चुनाव लड़े गये।

इसके चलते लक्ष्मी राणा को जीत नसीब नही हो सकी,हालाकि वे 15 हजार वोट लाने मे सफल रही।पर मोदी लहर मे उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लक्ष्मी राणा को महिलाओ का अच्छा समर्थक भी माना जाता है,वे सीधे व साफ बोलने के लिए भी जानी जाती है, तेज तरार महिला होने का उनको भी आने वाले विधानसभा 2022 मे फायदा मिल सकता है,प्रत्याशी बनने मे।
बात की जाए अंकुर रौथाण की तो ये हरीश रावत के बेहद नजदीकी माने जाते हैं। 2017 विधानसभा चुनाव में भी इनका नाम प्रत्याशीयों के साथ चर्चाओं मे रहा था। अंकुर रौथाण कांग्रेस संगठन के बहुत ही युवा सिपाही हैं। छात्र जीवन से ही भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एन.ए.सयू.आई) से जुड़े यह भी माना जाता है कि श्रीनगर वि वि विद्यायल मे जबतक अंकुर रौथाण अध्य्यन रत रहे तब तक यहॉ पर NSUI का काशा दबदबा रहता था वे बाद में गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर के छात्र संघ अध्यक्ष भी निर्वाचित हुए।

प्रखर वक्ता और ईमानदार छवि के चलते युवाओं पर इनकी पकड़ बहुत मजबूत थी जिसका नतीजा इनके बाद इनका छोटा भाई भी पहले छात्रसंघ अध्यक्ष और फिर विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के पद पर निर्वाचित हुआ। अंकुर रौथाण ने फिर संगठन की राजनीति की और एन.एस. यू.आई के प्रदेश सचिव बने इनके काम को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने उन्हें प्रदेश सचिव का दायित्व दिया गया। कांग्रेस ने युवाओं को राजनीति में सुनहरा अवसर देने के लिए युवा कांग्रेस के चुनाव करवाए ताकि आम लोग भी राजनीति में आ सके। उत्तराखण्ड में युवा कांग्रेस के प्रथम चुनाव में इन्होंने रुद्रप्रयाग विधानसभा का चुनाव लडा और विधानसभा अध्यक्ष निर्वाचित हुए। फिर दूसरे चुनाव में प्रदेश सचिव का चुनाव लडा और निर्वाचित हुए। फिर युवा कांग्रेस के महासचिव रहे।
कांग्रेस की सरकार बनने पर इन्हें रुद्रप्रयाग जनपद के जिला भेषज और सहकारी समिति का प्रशासक नियुक्त किया और फिर भेषज संघ का चुनाव लड़कर अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए। 2014 में जिला पंचायत की सीट आरक्षित होने पर सारी जिला पंचायत वार्ड से चुनाव लडा लेकिन 78 मतो से चुनाव हार गए। 2019 में भी अपनी सीट आरक्षित होने पर इन्होंने सिल्ला बमणगांव सीट जो की पहले ओबीसी थी आखिर समय मे सामान्य हुई से चुनाव लडा और वहां भी इन्हें 25% वोट प्राप्त हुए। युवाओं पर अंकुर रौथाण की अच्छी पकड़ है और रुद्रप्रयाग जनपद में हर गांव से इनके समर्थकों की संख्या अच्छी है। जिस प्रकार से अंतिम समय में इन्होंने दो बार अलग-अलग सीटों से चुनाव लडा तो उसको देखकर लगता है कि रुद्रप्रयाग विधानसभा में इनके व्यक्तिगत वोटों की संख्या भी 25% हो सकती है।
रुद्रप्रयाग विधानसभा में ठाकुर मतदाता की संख्या 60% प्रतिशत से अधिक है।और इनकी पकड़ हर वर्ग के लोगों में है। अंकुर रौथाण को गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर के अध्यक्ष होने का पूरा फायदा मिल सकता है चुनाव में क्योंकि श्रीनगर उच्च शिक्षा का केंद्र है और रुद्रप्रयाग जनपद के छात्रों की संख्या अधिक होती है।
बीजेपी ने भी श्रीनगर के बहुत से छात्र नेताओं को टिकट देकर आगे बढ़ाया उनमें ड़ा.हरक सिंह रावत,तीरथ सिंह रावत,ड़ा.धन सिंह रावत और विनोद कंडारी शामिल हैं,अगर कांग्रेस भी भारतीय जनता पार्टी के नक्शे कदम पर चलती है तो अंकुर रौथाण भी टिकट के प्रवल दावेदार हो सकते है। हालाकि यह जिले मे एक नई सुगबुहाट मात्र चली है,आखिर फैसला तो कॉग्रेस पार्टी के हाई कमान व चुनाव समिति के विशेषज्ञ लोगों को ही करना होगा।
मगर जब हमने दोनो नेताओ से इस बारे मे जानना चाहा तो उनका कहना है कि हर व्यक्ति की इच्छा होती है टिकट पाने की,,मगर पार्टी जिसे भी प्रतयाशी बनायेगी हम पूरी ईमानदारी-मेहनत से घोषित प्रत्यासी को जीताने का काम करेगे। राज्य मे कॉग्रेस की सरकार लायेगे।











