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सुषमा स्वराज: वो नेता जिन्होंने रिकॉर्ड तोड़े, दिलों को जीता और लोगों को प्रेरित किया

16/02/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला

सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 को श्री हरदेव शर्मा और श्रीमती लक्ष्मी देवी के यहाँ अंबाला छावनी में हुआ था। इनके पिता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक प्रतिष्ठित सदस्य थे। इन्होंने राजनीति विज्ञान और संस्कृत जैसे प्रमुख विषयों से अंबाला छावनी के एसडी कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। सुषमा स्वराज ने चंडीगढ़ में पंजाब विश्वविद्यालय के कानून विभाग से एलएलबी की डिग्री हासिल की। 1970 में इन्होंने, अंबाला छावनी के एसडी कॉलेज से सर्वश्रेष्ठ छात्रा का पुरस्कार प्राप्त किया। नई पीढ़ी की नेता मानी जाने वाली सुषमा स्वराज ने भारतीय राजनीति में अपनी शुरुआत वर्ष 1970 में छात्र नेता के रूप में की थी। इन्होंने इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे। वह एक आसाधारण वक्ता और प्रचारक हैं, जिन्होंने जनता पार्टी में शामिल होने के बाद आपातकाल के विरोध में सक्रिय रूप से भाग लिया था। भारतीय राजनीति में इनकी भूमिका ने इन्हें पहले दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री और बाद में विपक्ष की पहली महिला नेता का पद दिलाया। इन्होंने हरियाणा में महज़ 27 साल की उम्र में ही जनता पार्टी की राज्य अध्यक्षा का पद संभाला था।सुषमा अतिरिक्त पाठ्यचर्या गतिविधियों में प्रवीण थीं। इनकी रुचि शास्त्रीय संगीत,कविता,ललित कला और नाटक में भी थी। इन्हें कविता और साहित्य पढ़ना भी अच्छा लगता था। सुषमा स्वराज को लगातार तीन वर्षों तक एस.डी.कॉलेज के एनसीसी की सर्वश्रेष्ठ सैनिक छात्रा घोषित किया गया। हरियाणा के भाषा विभाग द्वारा आयोजित एक राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उन्हें लगातार तीन वर्षों तक सर्वश्रेष्ठ हिंदी वक्ता पुरस्कार प्रदान किया गया। वह ए.सी. बाली मेमोरियल घोषणा प्रतियोगिता में पंजाब विश्वविद्यालय की सर्वश्रेष्ठ हिंदी वक्ता बन गईं। उन्होंने भाषण प्रतियोगिताओं, वाद विवाद प्रतियोगिताओं, नाटकों और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में कई पुरस्कार जीते हैं। वह चार साल तक हरियाणा राज्य के हिंदी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षा भी रहीं।प्रखर वक्ता, राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण ओजपूर्ण वाणी की धनी भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जीव जगत को अलविदा कह दिया. बेहद विनम्रता और अकाट्य तर्कों के साथ अपने भाषणों से विरोधियों को जवाब देने वालीं सुषमा स्वराज का राजनीतिक सफर बेदाग रहा. विदेश मंत्री के कार्यकाल के दौरान उन्होंने विदेशों में बसे एक-एक भारतीय का जिस प्रकार ध्यान रखा, व चिंता की, वह कभी भुलाया नहीं जा सकता है.14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला शहर में जन्मीं सुषमा स्वराज नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेश मंत्री रहीं. सुषमा स्वराज ने अंबाला के एसडी कॉलेज और पंजाब विश्वविद्यालय के कानून विभाग से पढ़ाई की थी. राजनीतिक जीवन का प्रारंभ 1970 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से किया था और 1977 में केवल 25 वर्ष की आयु में विधायक चुनी गईं. 1977 में जब वह 25 साल की थीं, तब भारत की सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनी थीं. 1998 में वह दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी थीं. वह 7 बार सांसद और 3 बार विधायक रहीं.सन् 1990 में सुषमा स्वराज राज्यसभा की सदस्य बनीं और 1996 में लोकसभा चुनावों में दक्षिण दिल्ली से सांसद बनीं थीं. सुषमा स्वराज को 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्रालय दिया गया था. सन् 1998 में सुषमा स्वराज 12वीं लोकसभा के लिए दोबारा दक्षिणी दिल्ली से चुनी गईं. 2014 में 16वीं लोकसभा में सुषमा स्वराज विदिशा से जीतकर आईं. यूपीए-2 सरकार के दौरान सुषमा स्वराज लोकसभा में विपक्ष की नेता भी रहीं.सुषमा स्वराज स्कूल के दिनों में एनसीसी से भी जुड़ी रहीं. शुद्ध हिंदी में सजे और सधे हुए शब्दों से संसद से यूनाइटेड नेशन तक में उनके भाषणों ने करोड़ों लोगों के मन को छुआ.एक सफल नेता के साथ ही वह बेहद कुशल गृहणी भी थीं. सुषमा स्वराज ने कॉलेज के दोस्त स्वराज कौशल से लव मैरिज की थी. सुषमा ने 13 जुलाई 1975 को शादी की थी. उनके पति स्वराज कौशल सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने क्रिमिनल लॉयर हैं. वह देश के एडवोकेट जनरल और मिजोरम के गवर्नर भी रह चुके हैं. स्वराज कौशल 1998 से 2004 तक हरियाणा से सांसद भी रह चुके हैं.एम्स ले जाने से तीन घंटे पहले ही उन्होंने एक ट्वीट किया था. यह ट्विट जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक के लोकसभा में पारित होने को लेकर था. जैसे उन्हें पहले ही आभास हो गया था. विधेयक पारित होने पर प्रधानमंत्री का आभार जताया था. “तू इधर-उधर की न बात कर, ये बता कि काफिला क्यों लूटा? हमें रहजनों से गिला नहीं, तेरी रहबरी का ख्याल है।” यह अद्भुत वक्ता, कुशल राजनीतिज्ञ, पूर्व विदेश मंत्री और ‘पद्म विभूषण’ सुषमा स्वराज की राजनीति का अंदाज था। एक ऐसी नेता, जिन्होंने भाजपा की राजनीति भले ही की, लेकिन वह जहां भी और जब भी बोलने के लिए खड़ी हुईं, लगा कि हिंदुस्तान बोल रहा है। वह हिंदुस्तान को सोचती थीं, हिंदुस्तान को ही जीती थीं और हिंदुस्तान को ही ओढ़ती-बिछाती थीं। असल में वह राजनीति की सुषमा थीं और स्वराज उनके दिल में बसता था। मैं सोती नहीं और भारतीय राजदूतों को भी सोने नहीं देती,” सुषमा स्वराज ने एक बार पत्रकारों के एक प्रश्न के उत्तर में कहा था, जिसमें उनसे दुनिया भर में फंसे भारतीयों की मदद के लिए उनके अथक प्रयासों के बारे में पूछा गया था। अब सुषमा स्वराज ने अपनी आंखें हमेशा के लिए थमा ली हैं। मंगलवार रात दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया, और वे एक भावुक राजनीतिज्ञ और मानवतावादी मंत्री के रूप में अपनी विरासत छोड़ गईं। सुषमा स्वराज एक असाधारण व्यक्तित्व और मामलों को अत्यंत प्रभावी ढंग से समझने की विलक्षण क्षमता वाली भारतीय राजनीतिज्ञ थीं। सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी, 1952 को भारत के अंबाला में हुआ था। उन्होंने भारत में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न विधायी और प्रशासनिक पदों पर एक उत्कृष्ट भारतीय राजनीतिज्ञ और सरकारी अधिकारी के रूप में कार्य किया।पद्म विभूषण से सम्मानित सुषमा शर्मा को भारत की लौह महिला के नाम से जाना जाता था। ट्विटर पर सबसे अधिक फॉलो की जाने वाली भारतीय राजनेताओं में से एक बनने के साथ-साथ, वाशिंगटन पोस्ट ने उन्हें ‘सुपरमॉम ऑफ इंडिया’ का खिताब भी दिया था। सुषमा स्वराज ने नरेंद्र मोदी की पहली सरकार में भारत की विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया। इंदिरा गांधी के बाद, सुषमा स्वराज इस पद को संभालने वाली दूसरी महिलाथींनिष्कर्ष में यह कहना ठीक होगी कि वह एक महान वक्ता, एक विनम्र इंसान और एक महान भारतीय राजनीतिज्ञ थीं लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं

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