*कर्मचारियों के लिए अहितकारी शर्तें है
*नियमितीकरण का अधिकार नहीं:* यह संविदा नियुक्ति पूर्णतः अस्थायी है और कर्मचारी को नियमितीकरण का कोई कानूनी अधिकार प्रदान नहीं करती।
*अन्य भत्तों का अभाव:* निर्धारित मानदेय के अतिरिक्त कर्मचारियों को कोई अन्य भत्ते (Allowances) देय नहीं होंगे।
*ग्रेच्युटी का समावेश:* यदि किसी कर्मचारी की ग्रेच्युटी की देयता बनती भी है, तो उसे कुल मानदेय (Total Honorarium) के भीतर ही सम्मिलित माना जाएगा, यानी इसके लिए अलग से भुगतान नहीं होगा।
*सीमित अवकाश:* कर्मचारियों को एक वर्ष में केवल 12 आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) और 15 दिन का उपार्जित अवकाश (Earned Leave) ही मिलेगा। साथ ही, बचा हुआ उपार्जित अवकाश अगले वर्ष के लिए नहीं जोड़ा जाएगा
यदि कोई कर्मचारी नियमित सेवा के समान लाभ या समानता का दावा करता है, तो इसे ‘अनुशासनहीनता’ माना जाएगा और विभाग उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होगा।
*कार्यस्थल में अस्थिरता:* विभागीय आवश्यकताओं या नियमित नियुक्ति होने पर कर्मचारी का कार्यालय कभी भी बदला जा सकता है या उसे किसी अन्य पद पर समायोजित किया जा सकता है, जिस पर कर्मचारी आपत्ति नहीं कर पाएगा।
*कर्मचारियों का भविष्य
*अनुबंध की अवधि सामान्यतः वित्तीय वर्ष (28/29 फरवरी) तक ही है। इस अवधि के समाप्त होने के बाद सेवा विस्तार का निर्णय विभाग द्वारा ‘यथा प्रक्रिया’ लिया जाएगा, जो कि सुनिश्चित नहीं है।
बिना कारण हटाए जाने का भय: सरकार या सक्षम प्राधिकारी किसी भी समय एक महीने की लिखित सूचना देकर या एक महीने का मानदेय देकर सेवा समाप्त कर सकते हैं।
यदि चिकित्सकीय आधार पर यह पाया जाता है कि कर्मचारी भविष्य में अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए अयोग्य रह सकता है, तो बिना किसी पूर्व सूचना के सेवा समाप्त की जा सकती है।
यदि सरकार की राय में कर्मचारी अपने कर्तव्यों के संपादन में अनुपयुक्त पाया जाता है, तो उसे एक महीने की सूचना पर हटाया जा सकता है।
*यह अनुबंध स्पष्ट करता है कि कर्मचारियों की स्थिति एक “नितान्त अस्थायी संविदा कार्मिक” की है, जिसका उद्देश्य केवल मानदेय का सीधा भुगतान सुनिश्चित करना है, न कि उन्हें स्थायी सरकारी सेवा के लाभ देना। जो की माननीय सुप्रीम कोर्ट के अदे श का उलगंग है












